डॉ. कुणाल दास के नेतृत्व में AI सक्षम मैग्नेटिक नियंत्रित कैप्सूल एंडोस्कोपी परियोजना को अंतर्राष्ट्रीय मंच पर मान्यता

डॉ. कुणाल दास के नेतृत्व में AI सक्षम मैग्नेटिक नियंत्रित कैप्सूल एंडोस्कोपी परियोजना को अंतर्राष्ट्रीय मंच पर मान्यता

गाजियाबाद। कौशांबी स्थित यशोदा सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल, के गैस्ट्रोएंटरोलॉजी विभाग के निदेशक और प्रमुख डॉ. कुणाल दास ने एक अभिनव परियोजना प्रस्तुत की, जिसे "AI सक्षम मैग्नेटिक नियंत्रित कैप्सूल एंडोस्कोपी कम अल्ट्रासाउंड द्वारा GI रोगों और GI कैंसर का पता लगाने" के रूप में जाना जाता है, जिसे विश्वभर से चुनी गई 10 परियोजनाओं में से एक के रूप में थी लिंडाउ साइथॉन में स्वीकार किया गया है।

यह परियोजना, यदि स्वीकृत होती है, तो 73वीं नोबेल 2024 लॉरिएट मीटिंग में लिंडाउ, जर्मनी में (30 जून से 5 जुलाई, 2024) नोबेल लॉरिएट्स की टीम के समक्ष प्रस्तुत की जाएगी। इस परियोजना का मुख्य उद्देश्य AI के साथ भविष्य की कैप्सूल एंडोस्कोपी विकसित करना है जिसमें अल्ट्रासाउंड क्षमताएं होंगी, जो GI रोगों और GI कैंसरों जैसे पेट के कैंसर, भोजन नली के कैंसर आदि का निदान कर सकें। इसके अलावा, इसकी अल्ट्रासाउंड क्षमताओं का उपयोग करके यह तय किया जा सकेगा कि कैंसर के किस चरण में सर्जरी की आवश्यकता है या नहीं।

इस परियोजना में AI और स्वयं सीखने की क्षमताएं भी प्रस्तावित हैं और यह दूर से भी काम कर सकती है। मरीजों को इन परीक्षणों के लिए अस्पताल आने की जरूरत नहीं होगी; डॉक्टर अस्पताल से या यहां तक कि घर से भी छवियों को पढ़ सकेंगे। यह मरीजों के लिए अत्यधिक लाभकारी होगा और यह परिवहन लागत, बिजली लागत को बचाने में सहायक होगा और भविष्य को अधिक सतत बनाने में मदद करेगा तथा कार्बन फुटप्रिंट को कम करेगा।

डॉ. कुणाल दास ने यह भी बताया कि यह उनके लिए एक दुर्लभ सम्मान और महान गौरव की बात है कि उन्हें थाईलैंड, चीन, फ्रांस, यूएसए, कैमरून, गाम्बिया जैसे बहु-महाद्वीपीय, बहु-देशीय समूह के अत्यंत प्रतिभाशाली चिकित्सकों और वैज्ञानिकों का नेतृत्व करने का एक जीवन भर में एक बार मिलने वाला अवसर प्राप्त हुआ है। यदि यह परियोजना वास्तविकता में परिणत होती है, तो यह आज हम जिस तरह से चिकित्सा का अभ्यास करते हैं, उसे क्रांतिकारी ढंग से बदल देगी। डॉ. दास इस परियोजना को भारत में पूरा करने की इच्छा रखते हैं। इस परियोजना से 'आत्मनिर्भर भारत', 'भारत बने विश्वगुरु' और 'विश्वमित्र' की अवधारणाओं को भी स्थापित किया जाएगा।