होली के पकवानों का आयुर्वेदिक महत्व - डॉ चंचल शर्मा

होली के पकवानों का आयुर्वेदिक महत्व - डॉ चंचल शर्मा

होली के त्यौहार में रंगों का क्या महत्त्व है यह किसी से छुपा हुआ नहीं है लेकिन इस त्यौहार की एक और खासियत है और वह है इसपर बनने वाले पकवान। शरद ऋतु में मानव शरीर में पित्त का प्रकोप बढ़ जाता है  इसलिए भूख अच्छी लगती है, जो भी कुछ आप खाते-पीते हैं आसानी से पच जाता है, शरद ऋतु में कमजोर व्यक्ति भी मोटा हो जाता है, जबकि गर्मी में स्वस्थ्य व्यक्ति भी पतला दिखाई देने लगता है. क्योंकि गर्मी के दिनों में शरीर में वात का संचय बढ़ता है. ये वात सभी रोगों का राजा है, बिना वात के शरीर में कोई भी रोग नहीं होता है. सर्दियों में ही दशहरा, दीपावली, होली आती है. इन सभी त्योहारों में देशी घी, मिठाईयां, मालपुए, गुजिया, गुलगुले, सोंठ, तुलसी, मेथी व गोंद के लड्डू, उडद, सोया - मेथी के परांठे आदि खूब खाये जाते हैं.  क्योंकि इन सबमें घी व तेल का आधिपत्य होता है. जो कि वात का शमन करने में विशेष कार्य करता है.  इसी कारण हमारी संस्कृति में इन त्योहारों पर तरह -तरह के व्यंजन व पकवान खाने की परम्परा है. क्योंकि यह आसानी से पच जाते हैं.

होली के दिन से नए संवत की शुरुआत होती है, पौराणिक मान्यताओं की माने तो इसी दिन मनु और कामदेव का जन्म हुआ था इसलिए इसका महत्त्व और भी बढ़ जाता है. कामदेव को स्त्री पुरुष सम्बन्ध में प्रेम जागृत करने और काम वृति की सहायता से संतान सुख और अन्य इक्षाओं की पूर्ति के लिए पूजा जाता है। भारत के लगभग सभी हिस्से में अलग अलग रूप में इसे मनाया जाता है और देश के हर क्षेत्र में बनने वाले पकवानो का स्वाद, उनकी खुशबु, और बच्चों का उत्साह इसमें चार चाँद लगाते हैं. कुछ पकवान तो ऐसे हैं जिनके बिना होली का जायका ही अधूरा लगता है ऐसे ही कुछ स्वादिष्ट भारतीय व्यंजनों की चर्चा हम यहाँ करने वाले हैं साथ ही उनका इस त्यौहार में क्या खास महत्त्व है वह भी जानेंगे: 

पारम्परिक व्यंजन 

मालपुए: होली का नाम सुनते ही मुँह में मालपुए का स्वाद घुलने लगता है. मालपुआ में ड्राई फ्रूट्स, केला, सोंठ, घी, आटा आदि सामग्री मिली होती है जिसकी वजह से यह हमारे स्वस्थ्य के लिए लाभकारी साबित होता है और बदलते मौसम में हमारी रोग प्रतिरोधक क्षमता भी बढाता है. 

मूंग दाल के दही वड़े: आयुर्वेद के अनुसार उड़द दाल और दही के गुण धर्म भिन्न होने के कारण यह आपके स्वास्थ्य के लिये हानिकारक हो सकता है इसलिए आप इस होली मुंग दाल से बने दही बड़े बनाये और उसका स्वाद लें क्यूंकि मूंग दाल बहुत से पोषक तत्वों से भरपूर होता है और पचाने में भी आसान होता है. मूंग दाल विटामिन-B9 और फोलिक एसिड में समृद्ध होती है, जो आपके शरीर में रेड ब्लड सेल्स के उत्पादन को बढ़ाती है। ये ह्रदय रोग और मधुमेह से ग्रसित लोगों के लिए अच्छी है और इसके साथ बनाये हुए दही बड़े टेस्‍टी होने के साथ-साथ हेल्दी भी होंगे।

गुजिया: होली में गुजिया की मिठास न मिलीं हो तो सब फीका फीका लगता है लेकिन हाई कैलोरी के कारण गुजिया खाना स्वस्थ्य के लिए हानिकारक भी हो सकता है. पुराणी मान्यता के अनुसार ब्रज में भगवान कृष्ण को भोग लगाने के लिए होली में गुजिया बनाना प्रसिद्ध है. यदि आप चाहे तो गुजिया को बेक करके बना सकते है और उसमें मौजूद इलायची,घी, नारियल, काजू, खोया आदि के कारण यह फाइबर तथा एंटीऑक्सीडेंट और खनिज से भरपूर हो जाता है जो आपके स्वास्थ्य के लिए लाभदायक होगा। 

ठंडाई: होली के दिन ठंडाई पीने की परम्परा सदियों से चलती आ रही है. ठंडाई को दूध, सूखे मेवों, गुलाब की पंखुड़ियों और मसालों के मिश्रण से बनाया जाता है. ठंडाई पीने से शरीर और दिमाग को ठंडक मिलती है। ठंडाई पाचन तंत्र को मजबूत बनाती है, जिससे पेट में गैस, एसिडिटी और कब्ज आदि समस्याओं से राहत मिलती है। इतना ही नहीं, ठंडाई में मौजूद पोषक तत्व शरीर को तुरंत ऊर्जा प्रदान करते हैं।

पुरन पोली: पुरन पोली महाराष्ट्र का एक प्रमुख मिष्ठान व्यंजन है जिसे होली के मौके पर भी बनाया और चाव से खाया जाता है. इसके सेवन से शरीर की कमजोरी दूर होने के साथ शरीर को ताकत भी मिलती है। पूरन पोली को बनाने के लिए गुड और दाल को मिलाकर बनाया जाता है, जो शरीर को कई तरह के फायदे देता है। पूरन पोली के सेवन से शरीर का हीमोग्लोबिन बढ़ता है और पाचन-तंत्र भी मजबूत होता है।

आशा आयुर्वेदा की स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ डॉ चचल शर्मा ने बताया कि त्योहारों के इस देश में हर धार्मिक मान्यता की कोई न कोई खास वजह है और प्रेम के साथ एक दूसरे की खुशियों में शामिल होकर होली जैसे त्यौहार का मजा और भी बढ़ जाता है. इस होली आप रंगों के साथ अपने खान पान का भी विशेष ध्यान रखें और अच्छे पौष्टिक आहार में भारतीय पकवानों के जायके को शामिल करके अपने स्वास्थ्य का भी पूरा ख्याल रखें।