पूर्व राष्ट्रपति राम नाथ कोविन्द ने किया प्रधानमंत्री के संविधान पर दिए गये भाषणों की पुस्तक ‘नए भारत का सामवेद’ का लोकार्पण

पूर्व राष्ट्रपति राम नाथ कोविन्द ने किया प्रधानमंत्री के संविधान पर दिए गये भाषणों की पुस्तक ‘नए भारत का सामवेद’ का लोकार्पण

नई दिल्ली। देश के पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविन्द ने कहा है कि हमारे संविधान की यह खूबी है कि इसका कोई भी अंश कालातीत नहीं हुआ है। उसके अंदर से ही यह व्यवस्था भी निकलती है कि संविधान निर्माण के बाद के दिनों में कहीं कोई चूक हो, तो उसका परिमार्जन भी किया जा सके। जम्मू-कश्मीर से 370 और 35-ए की समाप्ति इसका सबसे बड़ा उदाहरण है। इस अर्थ में ठीक ही कहा जाता है कि यह जागृत संविधान है।

पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविन्द ने उक्त उद्गार यहां इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र के समवेत सभागार में ‘नए भारत का सामवेद’ पुस्तक का लोकार्पण करते हुए व्यक्त किया। प्रभात प्रकाशन से आई पुस्तक का पुरोकथन सुप्रसिद्ध पत्रकार ‘पद्मश्री’ रामबहादुर राय ने लिखा है, जबकि पुस्तक का संयोजन इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र में एशोसिएट एडिटर डॉ. प्रभात ओझा ने किया है। 

इस अवसर पर विदेश और संस्कृति राज्य मंत्री मीनाक्षी लेखी ने कहा कि बाबा साहब भीमराव आम्बेडकर संविधान की आत्मा थे। दुख की बात है कि पहले की सरकारों ने इस आत्मा का निरादर किया। आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी उस आत्मा का सम्मान कर रहे हैं। उन्होंने डॉ. आम्बेडकर से जुड़े पांच स्थानों को ‘पंचतीर्थ’ के रूप में विकसित कर नई पीढ़ी को भी बाबा साहब से जुड़ने की प्रेरणा दी है।

इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र के अध्यक्ष और वरिष्ठ पत्रकार रामबहादुर राय ने कहा कि इस सरकार के आने के पहले तक संविधान का बनवास चल रहा था। नरेंद्र मोदी ने आकर इस बनवास को खत्म किया है। जो लोग कहते हैं कि संविधान खतरे में है, दरअसल संविधान नहीं, वही लोग खतरे में हैं। प्रारम्भ में इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र के सदस्य सचिव डॉ. सच्चिदानंद जोशी ने कहा कि संविधान के बारे में आज आम लोगों के साथ ऩई पीढ़ी में जागरण की जरूरत है। इस काम को यह पुस्तक पूरा करेगी। आयोजन का संचालन प्रभात प्रकाशन के प्रभात कुमार ने और धन्यवाद ज्ञापन डॉ. प्रभात ओझा ने किया।