अस्पष्ट पुरुष निसंतानता जांचने के लिए ​​​​उपकरण भरोसेमंद नहीं, लेकिन आयुर्वेद इलाज से हुआ संभव- डॉक्टर चंचल

अस्पष्ट पुरुष निसंतानता जांचने के लिए ​​​​उपकरण भरोसेमंद नहीं, लेकिन आयुर्वेद इलाज से हुआ संभव- डॉक्टर चंचल

हर कोई अपने वंश को आगे बढ़ाने के लिए एक संतान की चाहत रखता है। लेकिन कई बार महिला या पुरुष को शारीरिक-मानसिक परेशानी के कारण बच्चा होने में परेशानी आती है। निसंतानता एक ऐसी स्थिति है जब 1 साल तक नियमित असुरक्षित संभोग के बाद महिला गर्भधारण नहीं कर पाती है। भारत में लगभग 12-15% जोड़े निसंतान हैं। 

बहुत से लोग अभी भी सोचते हैं कि निसंतानता केवल महिलाओं की शारीरिक कमियों के कारण होता है, जबकि ऐसा नहीं है। निसंतानता की समस्या की परिस्थितियों में सामाजिक दबाव और दोष आमतौर पर महिलाओं पर केंद्रित होते हैं। हालाँकि, कुछ रिपोर्ट का मानना है कि 50% निसंतान दंपतियों में पुरुष निसंतानता का कारण हैं और सिर्फ दुनिया के लगभग 7% पुरुष वयस्क बनने तक पिता बनने की क्षमता खो देते हैं।
 
आशा आयुर्वेदा स्थित डॉक्टर चंचल शर्मा बताती है कि पुरुष निसंतानता न केवल पुरुषों के स्वास्थ्य का मुद्दा है, बल्कि महिलाओं के स्वास्थ्य का भी मुद्दा है, क्योंकि अनियंत्रित पुरुष निसंतानता के लिए प्रजनन उपचार का मौजूदा बोझ महिलाओं पर पड़ता है। 
पीएमसी की एक रिपोर्ट के मुताबिक, पुरुष निसंतानता को मूल्यांकन करने के लिए वीर्य विश्लेषण किया जाता है, लेकिन यह टेस्ट भी पुरुष निसंतान के निदान के लिए अपर्याप्त है। नतीजतन, लगभग 20% निसंतान पुरुषों में निसंतानता की समस्या पता नहीं लगता है। 

अनिर्धारित पुरुष निसंतानता में दो श्रेणियां शामिल हैं: (i) इडियोपैथिक पुरुष निसंतानता- जिसमें निसंतान पुरुष उस असामान्यता के अज्ञात कारण के साथ असामान्य वीर्य विश्लेषण करवाते हैं और (ii) अस्पष्टीकृत पुरुष निसंतानता- "सामान्य" वीर्य विश्लेषण वाले पुरुष जो अज्ञात कारण पुरुष महिला को गर्भवती नहीं कर पाता है। 

डॉक्टर चंचल शर्मा का कहना है कि पहले सिर्फ स्पर्म विश्लेषण के जरिए ही पुरुष निसंतानता के बारे में पता लगता थे। लेकिन समय के साथ बदलाव आने से 2010 को डब्ल्यूएचओ वीर्य विश्लेषण में बड़े परिवर्तन शामिल किए हैं, जैसे की शुक्राणु गतिशीलता और शुक्राणुओं की संख्या जानने पर भी महत्व दिया।
लेकिन अभी भी फर्टिलिटी के लिए शुक्राणु की क्षमता (डीएनए) के बजाय वीर्य के गुणों को देखते है। क्योंकि आज के समय में स्पर्म विश्लेषण सिर्फ एक मात्र जरिए नहीं है जिससे डीएनए में होने वाली खराबी, आरएनए में होने वाली असामान्यताएं जैसी समस्याओं का सटीक कारण का पता चल सके।  

अस्पष्ट निसंतानता पुरुषों का उपचार सामान्य शुक्राणु जैसे, संख्या, गतिशीलता, आकार को समझने की कमी के कारण सीमित है। लेकिन डॉक्टर चंचल शर्मा बताती है कि आयुर्वेद में शुक्राणु से जुड़ी सभी समस्याओं का इलाज मौजूद है। आयुर्वेद में पुरुष निसंतानता का उपचार प्राकृतिक औषधियों, हर्बल तैलो एवं जड़ी बुटियों के द्वारा सफल तरीके से किया जाता है। आयुर्वेदिक उपचार में पुरुष निःसंतानता की समस्या को जड़ से ठीक करने में सबसे अच्छे विकल्पों में से एक है।

आयुर्वेदिक हर्बल औषधियों में अश्वगंधा, अमलकी, हरितिकी, शतावरी जैसे प्राचीन लाभकारी जड़ी बूटियों के सेवन से होर्मोनल बैलेंस करने में मदद मिलती है। इन औषधियों के अतिरिक्त पंचकर्मा चिकित्सा भी उपलब्ध है जिसके प्रयोग से शरीर की ऊर्जा को पुनः जीवित किया जाता है। इसके अतिरिक्त प्रामाणिक आयुर्वेदिक ग्रंथों में वर्णित वाजीकरण उपचार प्रदान करके, केवल जीवन शैली प्रबंधन द्वारा आयुर्वेद के साथ पुरुष निसंतानता का उपचार सफलतापूर्वक किया जाता है।

डॉ. चंचल ने बताया कि शुक्र धातु यौन क्रिया, क्षमता और प्रजनन क्षमता के लिए मुख्य रूप से जिम्मेदार है। वाजीकरण चिकित्सा शुक्र धातु को पोषण करती है या पुरुष को काफी ज़ादा सक्रिय बनाती है। 

साथ ही अपनी डाइट में दुध को शामिल करें। मिर्च-मसाला वाला खाना कम खाएं और नियमित रूप से व्योग और ध्यान करें जिससे आपका तनाव भी काफी कम होगा। आवीएफ के मुकाबले इस चिकित्सा से न जाने कितने दंपति बच्चा पाकर माता-पिता बनने का सुख प्राप्त कर रहे हैं। इस इलाज की सबसे अच्छी बात यह है कि कई गुणा सस्ती है और सफलता दर भी ज्यादा है।