नोएडा प्राधिकरण ने पानी के बिलों की वसूली के लिए पानी के मीटर लगा कर वास्तविक उपयोग के आधार पर शुल्क वसूलने की बनाई योजना

नोएडा प्राधिकरण ने पानी के बिलों की वसूली के लिए पानी के मीटर लगा कर वास्तविक उपयोग के आधार पर शुल्क वसूलने की बनाई योजना

नोएडा प्राधिकरण ने पानी के बिलों की वसूली के लिए पानी के मीटर लगा कर वास्तविक उपयोग के आधार पर शुल्क वसूलने की योजना बनाई है। प्राधिकरण क्षेत्र में बने सभी मकानों, फ्लैट्स वा कोठियों पर मीटर लगाए जाएंगे जिनमें प्रतिमाह रीडिंग पढ़ने के लिए और बिल भेजने के लिए एक एजेंसी को भी नियुक्त किया गया है। सभी घरों में मीटर लगाने, मीटर रीडिंग लेने और बिल भेजने वाली एजेंसी का खर्चा कितना होगा इसका अनुमान सहज ही लगाया जा सकता है। वर्तमान में प्राधिकरण द्वारा आवासीय औद्योगिक वाणिज्यिक व संस्थागत संपत्ति के क्षेत्रफल के आधार पर पानी का बिल लिया जाता है। अनेक घरों में पानी के लिए सबमर्सिबल पंप का उपयोग किया जाता है क्योंकि अथॉरिटी की सप्लाई का पानी कई सेक्टरों में पीने के योग्य नहीं होता। जिन घरों में पानी का कनेक्शन नहीं लिया गया है या पानी के वैकल्पिक स्त्रोत का उपयोग किया जाता है उनमें भूखंड के क्षेत्रफल के आधार पर पानी का बिल देय होता है। इसी आधार पर प्राधिकरण को नोएडा में हजारों मीटर लगाना रीडिंग लेना और बिल भेजना इस पर होने वाले व्यय के स्थान पर वर्तमान में चल रही न्यूनतम पानी की दर को भवन जितने मंजिल बना लिया गया हो या जितने में कोई परिवार निवास कर रहा है, उतने गुना वसूला जाना अधिक आसान वह कम खर्चे की योजना होगी। यदि प्राधिकरण के बनाए एमआईजी एल आई जी आदि मकान वर्तमान में तीन या चार मंजिल बन गए हैं तो उनका पानी का भुगतान तदनुसार 3 गुना या 4 गुना किया जा सकता है यही फार्मूला भूखंडों पर बने बनी कोठियों पर भी लागू किया जा सकता है की जितनी मंजिल बिल्डिंग बनाई गई है उतने गुना बिजली का पानी का बिल देय होगा।