नोएडा से देहरादून तक की पार्यावरण संकल्प यात्रा - डॉ. दीपक रमेश गौर
नोएडा। सेकटर 12 स्थित सूर्या संस्थान परिसर में आज प्रातः 11 बजे “#लेटअसग्रोफूड” घोषणा एवं जामुन वृक्षारोपण कार्यक्रम सफलता पूर्वक सम्पन्न हुआ। यह कार्यक्रम “#पार्यावरणसंकल्पयात्रा 2026” के अंतर्गत आयोजित किया गया, जो नोएडा से देहरादून तक की 360 किलोमीटर की जन-जागरूकता यात्रा का एक महत्वपूर्ण चरण है।
नोएडा से देहरादून तक की 360 किलोमीटर की पार्यावरण संकल्प यात्रा केवल एक भौतिक यात्रा नहीं थी यह चेतना की यात्रा थी, यह जिम्मेदारी का आह्वान था।

DIA–IMS नोएडा में पर्यावरणीय घोषणा, सत्यम फैशन इंस्टिट्यूट में #WORTHday के माध्यम से मूल्य-आधारित संकल्प और #VOICESforFUTURE के अंतर्गत युवाओं की सहभागिता —इन सभी प्रयासों का उद्देश्य स्पष्ट है: पर्यावरण संरक्षण अब विकल्प नहीं, आवश्यकता है।
आज सम्पन्न हुए “#लेटअसग्रोफूड” घोषणा कार्यक्रम के अंतर्गत जामुन वृक्ष का रोपण किया गया। यह केवल एक पौधा नहीं — बल्कि भविष्य की खाद्य सुरक्षा, पर्यावरण संतुलन एवं सामुदायिक जिम्मेदारी का प्रतीकात्मक बीज है।
पिछले एक दशक में जलवायु परिवर्तन ने कृषि पर गंभीर प्रभाव डाला है: असामान्य गर्मी ने गेहूं की उत्पादकता घटाई अनियमित मानसून ने धान की फसलों को प्रभावित किया बाढ़ और सूखे ने खड़ी फसलों को नष्ट किया भूमि की उर्वरता तापमान वृद्धि और रासायनिक दबाव से कम हुई भूजल स्तर निरंतर गिर रहा है दूसरी ओर, भारत की जनसंख्या पिछले 10 वर्षों में लगभग 14–15 करोड़ बढ़ी है।
एक तरफ खेती अस्थिर हो रही है। दूसरी तरफ भोजन की मांग बढ़ रही है। यदि यही स्थिति जारी रही, तो 2047 — जब भारत अपनी स्वतंत्रता के 100 वर्ष पूर्ण करेगा तब हमें जल संकट के साथ-साथ खाद्य संकट का भी सामना करना पड़ सकता है।
खाद्य संकट अचानक नहीं आता वह धीरे-धीरे आता है महंगाई के रूप में, पोषण की कमी के रूप में, किसानों की कठिनाइयों के रूप में और पारिस्थितिक असंतुलन के रूप में। इसीलिए #लेटअसग्रोफूड केवल एक अभियान नहीं है। यह भविष्य सुरक्षा का संकल्प है। जामुन का वृक्ष प्रतीक है: स्वदेशी शक्ति का
पोषण सुरक्षा का जैव विविधता का दीर्घकालिक पर्यावरण संतुलन का सामुदायिक खाद्य स्थिरता का आज जामुन लगाकर हम केवल पौधारोपण नहीं कर रहे — हम 2047 की तैयारी कर रहे हैं। “#पार्यावरणसंकल्पयात्रा 2025–26” के माध्यम से #magical3R की भावना से #giftatreenetwork और #TREEDO के सहयोग से, जागरूकता को जनांदोलन में परिवर्तित करने का सतत प्रयास किया जा रहा है।
इस घोषणा कार्यक्रम ने समाज, शिक्षण संस्थानों, युवाओं एवं जागरूक नागरिकों को एक साझा संदेश दिया है कि पर्यावरण संरक्षण और खाद्य सुरक्षा एक-दूसरे से जुड़े हुए राष्ट्रीय दायित्व हैं।
हमारा संदेश स्पष्ट है कि अन्न उगाइए, वृक्ष लगाइए, जिम्मेदारी निभाइए क्योंकि आने वाली पीढ़ियाँ हमसे यह नहीं पूछेंगी कि हमने कितने भाषण दिदिए ब्लकि वे यह पूछेंगी कि हमने कितने पेड़ लगाए।
आइए, हम सब मिलकर संकल्प लें कि हर घर, हर संस्था, हर परिसर में भोजन एवं फलदार वृक्षों की संस्कृति विकसित करेंगे। यही सच्ची देशभक्ति है। यही सच्चा विकास है। यही 2047 की तैयारी है।


