मानव बन जाए जग सारा, यह पावन संकल्प हमारा है संस्था का ध्येय वाक्य

मानव बन जाए जग सारा, यह पावन संकल्प हमारा है संस्था का ध्येय वाक्य

लखनऊ। भारतीय जीवन दर्शन, सांस्कृतिक पहचान, भाषायी साहित्य और चिरपुरातन सनातन धर्म  के गौरवपूर्ण मूल्यों को सम्पूर्ण राष्ट्र में ही नहीं अपितु वैश्विक मंच तक प्रभावी तौर पर संप्रेषित  करने, वसुधैव कुटुंबकम  की उदात्त भावना को संचारित कर विश्व  शान्ति और सौहार्द को फलीभूत करने की व्यापक संकल्पना को समर्पित अंतरराष्ट्रीय  संस्था "हिन्दी साहित्य  भारती" की कार्यकारिणी का पुनर्गठन किया गया है। देश-विदेश के विविध  आयामों से सम्बंधित प्रखर विद्वतजन इसमें शामिल हैं।

दस सदस्यीय  मार्गदर्शक मंडल के संरक्षण में उत्तर प्रदेश के पूर्व बेसिक शिक्षा मंत्री डॉ. रवीन्द्र शुक्ल को इस संगठन का अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष चुना गया है। श्री शुक्ल ने अपने  पर्यवेक्षण में देश भर से दस उपाध्यक्ष, महामंत्री, महामंत्री संगठन, सह संगठन महामंत्री, संयुक्त  महामंत्री, दस मंत्री, कोषाध्यक्ष सहित 111 सदस्यीय कार्यकारिणी सदस्यों को नामित करके उनके दायित्वों  का आवंटन भी किया।

उल्लेखनीय  है, यह संस्था अपने सूत्र वाक्य" मानव बन जाए जग सारा, यह पावन संकल्प हमारा"  की मूल अवधारणा पर काम करते हुवे वर्ष 2020 में अपने औपचारिक गठन के बाद मात्र पांच साल की सीमित समयावधि में ही देश-विदेश में अपनी पहचान सुस्थापित  करने में सफल रही है। ज्ञातव्य हो, संस्था की वैदेशिक कार्यकारिणी की अध्यक्षता वरिष्ठ विद्वान डॉ. संजय झा को सौंपी गई है, जबकि महामंत्री का दायित्व ब्रिटेन (लंदन) के डॉ. इन्द्र चारण को तथा महामंत्री संगठन की जिम्मेदारी कनाडा निवासित वैभव वैद्य को दी गई है। 

संस्था की नवगठित कार्यकारिणी में जहां आध्यात्मिक जगत के पूज्य स्वामी महामंडलेश्वर डॉक्टर शाश्वतानंद गिरि सरीखे विद्वतजन शामिल हैं, वहीं पूर्व राज्यपाल डॉ. कप्तान सिंह सोलंकी, भारत के पूर्व रक्षा सचिव व निवर्तमान राज्यपाल डॉ. शेखर दत्त की विशिष्ट योग्यता को भी वरण किया गया है।  प्रधानमंत्री के पूर्व वैज्ञानिक सलाहकार डॉ.ओम प्रकाश पाण्डेय सहित विभिन्न  ख्यातिलब्ध विश्वविद्यालयों के मौजूदा व निवर्तमान  कुलपतियों यथा- डॉ.वैद्यनाथ, पद्मश्री  प्रोफेसर अरविंद कुमार, प्रोफेसर अरुण दिवाकर नाथ वाजपेयी की भी सहभागिता ली गई है।

दिल्ली विश्वविद्यालय के प्रतिष्ठित हंसराज कालेज की प्राचार्या डॉक्टर रमा, दो दर्जन  महाकाव्यों के रचनाकार राष्ट्रीय कवि आचार्य देवेन्द्र देव, देश के जाने-माने साहित्यकार  व गीतकार डॉ. बुद्धि नाथ मिश्र, प्रोफेसर एस  तकमणि अम्मा (केरल), डा.एन.लक्ष्मी प्रिया (अंडमान), डॉ.मंजू पाण्डेय (उत्तराखंड), डा.वन्दना द्विवेदी (उत्तर प्रदेश), प्रोफेसर रजनी बाला (जम्मू-कश्मीर), डा.नरेश मिश्र (हरियाणा), डा.सुमित कुमार (दिल्ली), राजेन्द्र कुमार  सोनी (मुम्बई), डा.निर्मला देवी (विशाखापट्टनम), राम निवास शुक्ल (उत्तर प्रदेश), महेंद्र सुराना (महाराष्ट्र), पद्मश्री  डा.विष्णु पंड्या (गुजरात) के लिए विभिन्न पदीय दायित्व सौंपे गए हैं।  

मंत्रमुग्ध कर देने वाले भावपूर्ण ध्येय गीत के  संगीतमय प्रस्तुति  के बीच अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष डॉक्टर रवीन्द्र शुक्ल ने सभी नवपदधारियों का आह्वान किया कि मां भारती के चरणों में समर्पित इस वैश्विक मंच  को और अधिक गौरवपूर्ण पहचान दिलाएं और इस रचनात्मक आन्दोलन  को सफल बनाने में अपना अग्रणी योगदान प्रदान करें।

संस्था के मीडिया प्रभारी आनन्द उपाध्याय ने संस्था की कार्य प्रणाली और गतिविधियों की जानकारी विस्तार से दी।