एमिटी विश्वविद्यालय में मनाया गया विश्व फार्मासिस्ट दिवस 2024
नोएडा। फार्मासिस्टों के पेशेवर योगदान की सरहाना करने और उसके महत्व को बताने के लिए आज एमिटी विश्वविद्यालय के एमिटी इंस्टीटयूट ऑफ फॉर्मेसी द्वारा विश्व फार्मासिस्ट दिवस पर कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम का शुभारंभ एआईएमआईएल फार्मास्यिुटिकल कि आयुथवेदा के निदेशक डा संचित शर्मा, डीआरडीओ के नाभकीय औषधि तथा संबद्ध विज्ञान संस्थान के वैज्ञानिक डा अनंत नारायण भट्ट, एमिटी विश्वविद्यालय के हेल्थ एंड एलाइड साइंस के डिप्टी डीन डा तनवीर नावेद और एमिटी इंस्टीटयूट ऑफ फॉर्मेसी के उप निदेशक डा एच आर चिंतमे द्वारा किया गया।

एआईएमआईएल फार्मास्यिुटिकल कि आयुथवेदा के निदेशक डा संचित शर्मा ने कहा कि इस वर्ष के विश्व फार्मासिस्ट दिवस का विषय, “फार्मासिस्ट - वैश्विक स्वास्थ्य आवश्यकताओं को पूरा करना” है। वैश्विक स्वास्थ्य चुनौतियों का सामना करने और बेहतर स्वास्थ्य परिणामों को बढ़ावा देने में फार्मासिस्टों की महत्वपूर्ण भूमिका पर प्रकाश डालता है। फार्मासिस्टों का स्वास्थ्य सेवा प्रणालियों पर महत्वपूर्ण प्रभाव होता है, जिसमें दवा वितरित करने से लेकर रोगियों को उचित उपयोग पर परामर्श देना और दवा सुरक्षा सुनिश्चित करना शामिल है।
सुरक्षित दवा अनिवार्य है, और दवाओं का पहले आंतरिक परीक्षण किया जाना चाहिए, उसके बाद ही उन्हें रोगियों को दिया जाना चाहिए। ड्रग डिस्कवरी, नैनोटेक्नोलॉजी और जीनोमिक्स में एआई जैसी नई तकनीकों का उपयोग चिकित्सा की दुनिया को बदलने जा रहा है। युवा भविष्य के फार्मासिस्ट होंगे और इसलिए उन्हें कड़ी मेहनत करनी चाहिए और अपने ज्ञान को बढ़ाना चाहिए।” उन्होंने छात्रों से सीखने और कौशल विकास पर ध्यान केंद्रित करने का आह्वान किया जो उन्हें एक अच्छा फार्मासिस्ट बनाएगा
डीआरडीओ के नाभकीय औषधि तथा संबद्ध विज्ञान संस्थान के वैज्ञानिक डा अनंत नारायण भट्ट ने कहा कि प्राचीन काल में आयुर्वेद में चिकित्सा के जनक ऋषि चरक थे, जो एक चिकित्सक और फार्मासिस्ट दोनों थे। वर्तमान परिदृश्य में, हमारे पास फार्मासिस्ट हैं जो एक डॉक्टर की तुलना में अधिक संख्या में रोगियों के साथ बातचीत करते हैं और रोगी अक्सर अपना डॉक्टर बदलते हैं लेकिन फार्मासिस्ट नहीं।
भारत दुनिया में जेनेरिक दवाओं का सबसे बड़ा उत्पादक है, जिसकी कुल वैश्विक दवा निर्यात में 20 प्रतिशत हिस्सेदारी है। यह दुनिया में सबसे बड़ा वैक्सीन आपूर्तिकर्ता भी है, जो दुनिया में निर्मित सभी टीकों का 60 प्रतिशत से अधिक हिस्सा है। फार्मासिस्ट का ध्यान तकनीकी, उत्पाद-उन्मुख सेवा से रोगी-उन्मुख स्वास्थ्य सेवा में स्थानांतरित होना चाहिए। गलत दवा और खुराक से संबंधित त्रुटियों को डिजिटाइज्ड प्रिस्क्रिप्शन से हल किया जा सकता है, और कोविड 19 के दौरान स्टेरॉयड के अधिक उपयोग जैसे गलत प्रिस्क्रिप्शन से बचा जाना चाहिए। भविष्य की औषधियां अलग अलग व्यक्ति की प्रकृति के आधार पर होगी जैसा प्राचीन समय में हमारे आयुर्वेद मे होता था।
एमिटी इंस्टीटयूट ऑफ फॉर्मेसी के उप निदेशक डा एच आर चिंतमे ने कहा कि विश्व फार्मासिस्ट दिवस हर साल 25 सितंबर को मनाया जाता है, ताकि स्वास्थ्य संबंधी असमानताओं को संबोधित करते हुए दुनिया भर में अच्छे स्वास्थ्य और मजबूत, टिकाऊ स्वास्थ्य सेवा प्रणालियों को बढ़ावा देने की आवश्यकता के बारे में जागरूकता बढ़ाई जा सके। फार्मासिस्टों को यह सोचने की ज़रूरत है कि वे लोगों के कल्याण के लिए अपना सर्वश्रेष्ठ कैसे कर सकते हैं क्योंकि वे स्वास्थ्य सेवा प्रणाली की रीढ़ हैं। फार्मासिस्ट की भूमिका में दवा की खोज और दवाओं का निर्माण, दवाओं का विपणन और उन्हें ग्राहकों तक पहुँचाना शामिल है, जिससे समाज को लाभ होता है। एक फार्मासिस्ट सामाजिक रूप से भी जिम्मेदार होता है और उसे रोगियों को सही दवा उपलब्ध कराने में बहुत समझदारी से काम लेना चाहिए।
कार्यक्रम का समापन वाद-विवाद, पोस्टर एवं रंगोली प्रतियोगिताओं के परिणामों की घोषणा के साथ हुआ और अंत में एमिटी विश्वविद्यालय के हेल्थ एंड एलाइड साइंस के डिप्टी डीन डा तनवीर नावेद द्वारा धन्यवाद ज्ञापित किया गया।


