गैस कॉल के नाम पर साइबर ठगी, SBI क्रेडिट कार्ड से 2.61 लाख की अवैध निकासी
प्रमोद दीक्षित (संवाददाता)
नोएडा, उत्तर प्रदेश। नोएडा के सेक्टर 82 स्थित पॉकेट 12 में रहने वाले एक युवक के साथ IGL गैस के नाम पर साइबर ठगी का गंभीर मामला सामने आया है। ठगों ने खुद को गैस कंपनी का प्रतिनिधि बताकर फोन किया और कनेक्शन बंद करने की धमकी देकर तकनीकी तरीके से SBI बैंक के क्रेडिट कार्ड से 2,61,174 रुपये की अवैध निकासी कर ली। यह घटना 30 जनवरी 2026 को दोपहर लगभग 1:30 बजे से 2:30 बजे के बीच की बताई जा रही है।
पीड़ित रितेश कुमार मिश्रा ने बताया कि वह 30 जनवरी को अपने कार्यालय में कार्यरत थे, तभी उनके मोबाइल फोन पर एक कॉल आया। कॉल करने वाले व्यक्ति ने खुद को IGL गैस से जुड़ा कर्मचारी बताते हुए कहा कि उनके गैस कनेक्शन की आउटस्टैंडिंग पेमेंट बाकी है और यदि तुरंत भुगतान नहीं किया गया तो कनेक्शन बंद कर दिया जाएगा। कॉल के दौरान जैसे ही उन्होंने अपने फोन की जांच की, मोबाइल अचानक हैंग हो गया।
पीड़ित के अनुसार, मोबाइल हैंग होने के कुछ ही समय के भीतर उनके SBI बैंक क्रेडिट कार्ड से कई संदिग्ध ट्रांजैक्शन किए गए। जब फोन सामान्य हुआ, तब तक कुल 2,61,174 रुपये की राशि फ्रॉड तरीके से निकाली जा चुकी थी। स्थिति की गंभीरता को समझते हुए रितेश कुमार मिश्रा ने तुरंत SBI क्रेडिट कार्ड के कस्टमर केयर से संपर्क किया और कार्ड को ब्लॉक कराया। इसके साथ ही सभी संदिग्ध ट्रांजैक्शन का विवरण बैंक को उपलब्ध कराया गया और ई-मेल के माध्यम से भी औपचारिक शिकायत दर्ज कराई गई।
बैंक में शिकायत दर्ज कराने के बाद पीड़ित ने बिना किसी देरी के साइबर क्राइम पोर्टल पर भी मामले की रिपोर्ट की। साइबर क्राइम कार्यालय में जाकर उन्होंने सभी ट्रांजैक्शन डिटेल, कॉल से संबंधित जानकारी और आवश्यक दस्तावेज सबमिट किए। साइबर क्राइम विभाग की ओर से इस मामले में FIR नंबर 33101260022891 जारी किया गया है।
पीड़ित के पिता का नाम जवाहर मिश्रा है। परिवार का कहना है कि ठगों ने एक प्रतिष्ठित और भरोसेमंद गैस कंपनी का नाम इस्तेमाल कर मानसिक दबाव बनाया और तकनीकी चाल के जरिए बड़ी रकम की ठगी को अंजाम दिया। यह घटना दर्शाती है कि किस प्रकार साइबर अपराधी आम नागरिकों को डर और जल्दबाजी की स्थिति में फंसा कर आर्थिक नुकसान पहुंचा रहे हैं।
इस मामले में अब स्थानीय पुलिस भी सक्रिय हो गई है। नोएडा फेस-2 थाना प्रभारी अवधेश प्रताप सिंह ने पूरे प्रकरण का स्वयं संज्ञान लेते हुए कार्रवाई शुरू कर दी है। थाना फेस-2 पुलिस के अनुसार, साइबर क्राइम पोर्टल पर दर्ज FIR और बैंक से प्राप्त ट्रांजैक्शन विवरण के आधार पर मामले की गहन जांच की जा रही है। पुलिस द्वारा कॉल डिटेल रिकॉर्ड, डिजिटल ट्रेल और तकनीकी साक्ष्यों का विश्लेषण किया जा रहा है, ताकि ठगी में शामिल आरोपियों की पहचान की जा सके।
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि साइबर ठगी के मामलों में किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। SHO अवधेश प्रताप सिंह के निर्देश पर संबंधित बैंक से समन्वय स्थापित किया गया है और यह भी जांच की जा रही है कि फ्रॉड ट्रांजैक्शन किन माध्यमों और किन खातों के जरिए किए गए। पुलिस का दावा है कि जांच के आधार पर जल्द ही ठगों तक पहुंचने का प्रयास किया जाएगा और दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
साइबर विशेषज्ञों का कहना है कि हाल के दिनों में इंडिया में गैस, बिजली, पानी और टेलीकॉम सेवाओं के नाम पर ठगी के मामलों में तेजी से वृद्धि हुई है। ठग अक्सर उपभोक्ताओं को कनेक्शन बंद करने या सेवा रोकने की धमकी देकर घबराहट पैदा करते हैं और इसी दौरान तकनीकी तरीके से मोबाइल या बैंकिंग सिस्टम तक पहुंच बना लेते हैं।
प्रशासन और साइबर क्राइम विभाग ने आम नागरिकों से अपील की है कि किसी भी अनजान कॉल पर भरोसा न करें और किसी भी प्रकार की भुगतान संबंधी जानकारी साझा करने से पहले संबंधित कंपनी के आधिकारिक नंबर से ही पुष्टि करें। यदि किसी प्रकार की साइबर ठगी होती है, तो तुरंत बैंक, स्थानीय पुलिस और साइबर क्राइम पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराएं।
फिलहाल इस मामले में बैंक और पुलिस स्तर पर जांच जारी है। पीड़ित को उम्मीद है कि समय रहते की गई शिकायत और पुलिस की सक्रियता के चलते उसे न्याय मिलेगा और ठगी की राशि की रिकवरी की दिशा में भी ठोस कदम उठाए जाएंगे।


