मध्यम वर्ग को ग़रीब बनाने का बजट हैं यें - दीपक विग

मध्यम वर्ग को ग़रीब बनाने का बजट हैं यें - दीपक विग

बजट-: मध्यम वर्ग जिसकी अब देश में आबादी 40 करोड़ हैं उसके लिये अब तक का सबसे बेकार बजट, निम्न मध्यम ओर उच्च मध्यम वर्ग को कोई लाभ नहीं,इनकम टैक्स में कोई छूट नहीं स्टैण्डर्ड डिडक्शन को 75000₹ से बड़ाकर 300000₹ करना चाहिए था, एजुकेशन लोन पर ब्याज 3% करना चाहिए था,बेसिक माध्यमिक ओर उच्च शिक्षा की निश्चित फ़ीस तय होनी चाहि थी।

सरकारी सार्वजनिक व निजी क्षेत्र आईआईटी आईआईएम में सभी शिक्षा संस्थानों में फ़ीस मध्यम वर्ग की पहुँच में करनी चाहिए थी, ट्रांसपोर्ट फ़ीस ओर ट्यूशन फ़ीस के अलावा सभी तरह की फ़ीस निरस्त करने चाहिए थे, स्वास्थ्य क्षेत्र में एमबीबीएस व एमडी डॉक्टर्स की फ़ीस सरकार को तय करनी चाहिए थी, हॉस्पिटल चार्जेस नो प्रॉफिट नो लॉस पर निर्धारित होंनें चाहिये थे।

स्वास्थ्य बीमा की क़ीमते हर वर्ष बड़ती जा रहीं हैं उन्हें घटा कर मध्यम वर्ग की पहुँच में लाना चाहिये, वरिष्ठ नागरिकों को दुबारा रेलवे ओर हवाई यात्रा में छूट मिलनी चाहिए थी जो सरकार ने 20-21 में छीन लीं थीं, दवाईयो पर जीएसटी 5% होनी चाहिए थीं।

200 mtr तक के प्लॉट ओर फ्लैट पर स्टाम्प ड्यूटी 2% करनी चाहिए थीं,आटा दाल चावल घी तेल पर जीएसटी ख़त्म होना चाहिए था, गोल्ड सिल्वर के ज़ेवर पर जीएसटी 1% करना चाहिए था ताकि मध्यम वर्ग बहन बेटी के विवाह पर भारतीय परंपरा का पालन कर सकता, छोटे दुकानदार फैक्ट्री चलाने वालो को घाटा होने पर उनके लिए ब्याज मुक्त ऋण की व्यवस्था करनी चाहिये थीं।

शेयर मार्केट पर टैक्स बढ़ाया,इंटरनेट ओर मोबाइल कॉल के चार्जेस कम करने चाहिए थे,महंगाई ओर जीवन यापन की लागत को कम करने के लिये कुछ नहीं किया, कुलमिला कर मध्यम वर्ग को ग़रीब बनाने का बजट हैं यें।

लेखक : दीपक विग पूर्व महानगर अध्यक्ष समाजवादी पार्टी, चेयरमैन पंजाबी विकास मंच, राजनीतिक सामाजिक विश्लेषक