GIPSWU द्वारा पूरे देशभर में 26 जनवरी को ऑनलाइन हड़ताल तथा 03 फरवरी को राष्ट्रव्यापी विरोध प्रदर्शन का आह्वान
नई दिल्ली। “गिग एवं प्लेटफॉर्म सर्विस वर्कर्स यूनियन (GIPSWU) द्वारा पूरे देशभर में 26 जनवरी को ऑनलाइन हड़ताल तथा 03 फरवरी को राष्ट्रव्यापी विरोध प्रदर्शन का आह्वान, “राष्ट्रव्यापी ऑनलाइन एवं ऑफलाइन विरोध प्रदर्शन का नेतृत्व महिला गिग एवं प्लेटफॉर्म सर्विस वर्कर्स करेंगी।”
गिग एवं प्लेटफॉर्म सर्विस वर्कर्स यूनियन (GIPSWU) ने देशभर के सभी गिग एवं प्लेटफॉर्म सर्विस वर्कर्स से प्लेटफॉर्म अर्थव्यवस्था में जारी शोषण, असुरक्षा के विरुद्ध तथा वर्कर्स का दर्जा देने व केंद्रीय गिग कानून की मांग को लेकर सामूहिक विरोध प्रदर्शनों में भाग लेने का राष्ट्रव्यापी आह्वान किया है जिसमें बड़ी संख्या में महिला गिग वर्कर्स इस आंदोलन का नेतृत्व करेंगी।
इस सामूहिक कार्रवाई के अंतर्गत, गिग एवं प्लेटफॉर्म सर्विस वर्कर्स 26 जनवरी 2026 को अपने-अपने ऐप बंद कर ऑनलाइन विरोध प्रदर्शन करेंगे, जिसके पश्चात 03 फरवरी 2026 को देश के विभिन्न स्थानों पर राष्ट्रव्यापी विरोध प्रदर्शन किये जाएंगे।
राइड-हेलिंग, खाद्य एवं किराना डिलीवरी, घरेलू सेवाएँ, ब्यूटी एवं वेलनेस, लॉजिस्टिक्स, ई-कॉमर्स तथा डिजिटल सेवाओं सहित विभिन्न क्षेत्रों में कार्यरत गिग एवं प्लेटफॉर्म सर्विस वर्कर्स गंभीर और निरंतर चुनौतियों का सामना कर रहे हैं। इनमें मनमाने ढंग से वर्कर आईडी का ब्लॉक किया जाना, अपारदर्शी एवं अनुचित रेटिंग प्रणालियाँ, आय की असुरक्षा, प्रभावी शिकायत निवारण तंत्र की कमी तथा वर्कर्स से परामर्श किए बिना कार्य नीतियों में एकतरफा परिवर्तन शामिल हैं। महिला वर्कर्स को सुरक्षा, गरिमा एवं वैधानिक संरक्षण से संबंधित अतिरिक्त संवेदनशीलताओं का सामना करना पड़ता है। कई महिला वर्कर्स द्वारा सर्विस दे दी जाती है फिर जब कम का दाम मांगा जाता है तो हाथापाई, मारपीट जैसी नौबत आ जाती है। कई वीडियो अभी सोशल मीडिया पर देखे जा रहे है। ये महिला वर्कर्स जब कंपनी को अपना दुख बताती है तो कंपनी का AI सिस्टम टाइम पास बन कर रहा जाता है। अंत में ID ब्लॉक की शिकार महिला वर्कर्स से रोजगार छीन लिया जाता है। 50,000 Rs तक भरकर जो काम पर रखी जाती वो अचानक गैरकानूनी तरीके से जॉब से निकाल दी जाती है। जब अगर महिला वर्कर्स धरना प्रदर्शन पर जाए तो ID ब्लॉक करने की धमकी दी जाती है। यह सवाल सबके मन में नहीं होता है कि आखिर वर्कर्स चाहे वो किसी भी गिग कंपनी का हो उसे चेहरा छुपाकर मीडिया से क्यों बात करना पड़ रहा है । हर गिग आज मजबूर परिस्थितियों में काम कर रहा है फिर क्या उसके मौलिक एवं संवैधानिक अधिकारी का हनन खुले आम नहीं है तो और क्या है ? सरकार इस पर मौन है जबकि ID ब्लॉक एक जीता जागता उदाहरण सबके पास है जिसके हजारों वर्कर्स शिकार हो चुके है। Zomato के डायरेक्टर ने तो खुलेआम बोल दिया था कि वो 5000 से ज्यादा वर्कर्स को हर माह टर्मिनेट कर देते है। अर्बन कम्पनी के वर्कर्स इसके सबसे बड़े उदाहरण है जो मीडिया जगत से बात करना चाहते है।
बार-बार किए गए अभ्यावेदनों तथा भारत सरकार को, जिसमें श्रम एवं रोजगार मंत्रालय को प्रस्तुत औपचारिक मांग पत्र भी शामिल हैं, इसके बावजूद ये महत्वपूर्ण मुद्दे अब तक अनसुलझे बने हुए हैं।
हाल ही में भारत सरकार के श्रम एवं रोजगार मंत्रालय के मंत्री मनसुख मांडविया ने 10 मिनट की इंस्टेंट डिलीवरी प्रणाली को समाप्त किए जाने की घोषणा की। तथापि, यह घोषणा किसी औपचारिक अधिसूचना या लिखित आदेश के माध्यम से जारी हुई होगी किंतु किसी ने इसको दस्तावेज में नहीं देखा है। लिखित निर्णय के अभाव से यह परिलक्षित होता है कि सरकार गिग एवं प्लेटफॉर्म सर्विस वर्कर्स से संबंधित व्यापक एवं प्रणालीगत समस्याओं—जैसे मनमानी आईडी ब्लॉकिंग, बंडल बुकिंग प्रणाली, ऑटो-असाइन तंत्र, कार्य स्थल पर सुरक्षा एवं गिग व प्लेटफॉर्म वर्कर्स को एक वर्कर्स का दर्जा देना आदि को संबोधित करने की ठोस जिम्मेदारी लेने से बच रही है।
गिग वर्कर्स इस निरंतर निष्क्रियता से असंतुष्ट हैं, जो उनकी गरिमा, सम्मान, सुरक्षा, आजीविका तथा समग्र कल्याण के प्रति संवेदनहीनता को दर्शाती है। इस ऑनलाइन एवं ऑफलाइन विरोध के माध्यम से गिग एवं प्लेटफॉर्म सर्विस वर्कर्स भारत सरकार, ऐप-आधारित कंपनियों तथा आम जनता को यह स्पष्ट संदेश देना चाहते हैं कि गिग एवं प्लेटफॉर्म सर्विस वर्कर्स द्वारा झेली जा रही समस्याएँ वास्तविक, तात्कालिक एवं दीर्घकालिक हैं तथा उनकी वैध मांगों को बिना किसी और विलंब के संबोधित किया जाना आज आवश्यक है।
इन लोकतांत्रिक विरोध प्रदर्शनों के माध्यम से वर्कर्स अब सरकार, प्लेटफॉर्म कंपनियों तथा जनता के समक्ष अपनी दीर्घकालिक एवं वैध मांगों को सामूहिक रूप से प्रस्तुत करना चाहते हैं, जिनमें निम्नलिखित मांगे शामिल हैं:
• गिग एवं प्लेटफॉर्म सर्विस वर्कर्स के लिए पृथक एवं व्यापक एक केंद्रीय कानून का निर्माण।
• मनमाने ढंग से आईडी ब्लॉकिंग, ऑटो असाइंड एवं अनुचित रेटिंग सिस्टम पर तत्काल रोक।
• ग्राहक शिकायतों पर वर्कर्स को स्पष्टीकरण या उत्तर देने का अवसर।
• आय दरों/कमीशन में वृद्धि तथा अग्रिम कटौतियों पर रोक।
• डबल कैंसलेशन पेनल्टी, टाइम कैप, बंडल बुकिंग प्रणालियों एवं ऑटो-असाइन तंत्र की समाप्ति।
• चिकित्सीय आपात स्थितियों हेतु ऐप में “रेड बटन” सुविधा तथा मासिक धर्म अवकाश का प्रावधान।
• किसी भी नई परियोजना की शुरुआत या कार्य स्थितियों में परिवर्तन से पूर्व वर्कर्स से पूर्व परामर्श।
• कार्य क्षेत्र एवं दूरी की सीमा का निर्धारण।
• कार्यस्थल पर महिलाओं के यौन उत्पीड़न (निवारण, प्रतिषेध एवं प्रतितोष) अधिनियम के अंतर्गत आंतरिक शिकायत समितियों का गठन एवं प्रभावी संचालन।
• पारदर्शी, संवेदनशील एवं वर्कर्स-अनुकूल शिकायत निवारण तंत्र की स्थापना।
GIPSWU देशभर के सभी गिग एवं प्लेटफॉर्म सर्विस वर्कर्स से, किसी भी प्लेटफॉर्म या क्षेत्र से जुड़े होने की परवाह किए बिना, 26 जनवरी 2026 को ऑनलाइन विरोध प्रदर्शन तथा 03 फरवरी 2026 को राष्ट्रव्यापी विरोध प्रदर्शन में एकजुट होकर भाग लेने का आह्वान करता है।
GIPSWU ने माननीय सांसदों, ट्रेड यूनियनों, महिला संगठनों, नागरिक समाज समूहों तथा आम जनता से गिग एवं प्लेटफॉर्म सर्विस वर्कर्स के सम्मान, गरिमा, कार्यस्थल पर सुरक्षा एवं न्याय के लिए उनके संवैधानिक एवं लोकतांत्रिक संघर्ष के प्रति एकजुटता एवं समर्थन व्यक्त करने की अपील की है।


