सर्दियों में फूलों से महकेगा घर-आंगन, अक्टूबर से ही शुरू करें तैयारी - रश्मि कुमारी (उद्यान विशेषज्ञ)
थोड़ी-सी योजना, सही पौधे और नियमित देखभाल से पूरी सर्दी खिली रहेगी आपकी बगिया ये कहना हैं रश्मि कुमारी, उद्यान विशेषज्ञ (हॉर्टिकल्चर) का
सुबह की हल्की धूप, हवा में ठंडक और मुस्कुराते रंग-बिरंगे फूल सर्दियों की बागवानी का अपना ही आनंद है। अच्छी बात यह है कि इसके लिए किसी बड़े बगीचे की जरूरत नहीं। घर की बालकनी, छत, बरामदा या छोटा-सा आंगन भी फूलों से सज सकता है। बस, तैयारी समय पर शुरू होनी चाहिए। उत्तर भारत के मैदानी इलाकों में अक्टूबर का महीना इसके लिए खास तौर पर उपयोगी है।

पहले तय करें, कहां और कौन-से फूल लगाएंगे : पौधे खरीदने से पहले उस जगह को देखें जहां आप उन्हें रखना चाहते हैं। दिन में कितनी देर धूप आती है? पानी निकलने का रास्ता है या नहीं? और पौधों को फैलने के लिए कितनी जगह मिलेगी? इन छोटे सवालों के जवाब आगे की कई परेशानियां कम कर देते हैं।
सर्दियों में अनेक प्रकार के मौसमी फूल आसानी से उगाए जा सकते हैं। इनमें प्रमुख हैं - पिटूनिया, पैंजी, कैलेंडुला, डायन्थस, फ्लॉक्स, एंटीराइनम (स्नैपड्रैगन), एस्टर, गेंदा, डहेलिया, साल्विया, वर्बीना, स्वीट एलिसम, गजानिया, स्टॉक, स्वीट पी, नास्टर्शियम, कॉर्नफ्लावर और सिनेरारिया।
फूलों की क्यारी बनाते समय लंबे पौधों को पीछे, मध्यम ऊंचाई वाले पौधों को बीच में तथा छोटे पौधों को आगे लगाने से बगीचा अधिक सुंदर और व्यवस्थित दिखाई देता है।
मिट्टी अच्छी होगी तो पौधे भी खिलेंगे: बागवानी की शुरुआत पौधा लगाने से नहीं, मिट्टी तैयार करने से होती है। क्यारी की मिट्टी को लगभग 20-30 सेंटीमीटर गहराई तक खोदकर भुरभुरा करें। खरपतवार, कंकड़ और पुरानी जड़ें हटा दें। इसके बाद अच्छी तरह वर्मीकम्पोस्ट मिलाएं। कच्ची गोबर की खाद डालने से बचें, क्योंकि इससे जड़ों को नुकसान हो सकता है। एक बात हमेशा याद रखें-पौधों को नमी चाहिए, लेकिन जड़ों के आसपास जमा पानी नहीं। भारी मिट्टी में जल निकासी सुधारें और जरूरत हो तो क्यारी थोड़ी ऊंची बनाएं। संभव हो तो रोपाई से 10-15 दिन पहले मिट्टी तैयार कर लें, ताकि वह अच्छी तरह बैठ जाए।

गमलों में बगियाः छोटी जगह, बड़ी खूबसूरती : पुराने गमलों को दोबारा इस्तेमाल करने से पहले साफ करें और नीचे के निकासी छेद जांच लें। छोटे मौसमी पौधों के लिए मध्यम आकार के गमले पर्याप्त हो सकते हैं, जबकि डहेलिया जैसे बड़े पौधों को अधिक जगह चाहिए। गमले का आकार पौधे की जड़ों और बढ़वार के अनुसार चुनें।
गमले के लिए ऐसी मिट्टी लें जो हल्की हो, नमी संभाल सके और अतिरिक्त पानी आसानी से निकाल दे। बगीचे की मिट्टी में तैयार कम्पोस्ट या वर्मीकम्पोस्ट तथा जरूरत के अनुसार कोकोपीट या अन्य उपयुक्त सामग्री मिलाई जा सकती है। बहुत भारी और सख्त मिट्टी में पौधों की जड़ें ठीक से नहीं फैल पातीं।

बीज कब बोएं और पौधे कब लगाएं? : उत्तर भारत के मैदानी क्षेत्रों में कई शीतकालीन फूलों के बीज सितंबर-अक्टूबर से बोए जा सकते हैं। अधिकतर मौसमी पौधों की रोपाई अक्टूबर-नवंबर में की जाती है, लेकिन सही समय तापमान और प्रजाति पर निर्भर करता है। जब तेज गर्मी कम होने लगे, तब नर्सरी से स्वस्थ पौधे लेना सुविधाजनक रहता है।
बीजों को पहले सीडलिंग ट्रे या छोटी नर्सरी क्यारी में उगाएं। पौध में कुछ स्वस्थ पत्तियां आ जाएं और जड़ें विकसित हो जाएं, तब उसे शाम के समय या हल्की धूप में सावधानी से बड़े गमले में लगाएं। रोपाई के तुरंत बाद हल्की सिंचाई करें।
धूप और पानी का सही संतुलन: अधिकांश शीतकालीन फूलों को अच्छी खिलावट के लिए रोज करीब 4-6 घंटे या उससे अधिक सीधी धूप लाभपहुंचाती है। कुछ प्रजातियां अधिक धूप पसंद करती हैं, जबकि कुछ हल्की धूप में भी अच्छी रहती हैं। इसलिए पौधों को उनकी जरूरत के अनुसार जगह दें।
सर्दियों में बार-बार पानी देना जरूरी नहीं। उंगली से मिट्टी की ऊपरी परत जांचें; सूखी महसूस होने पर जरूरत के अनुसार सिंचाई करें। सुबह पानी देना सामान्यतः बेहतर रहता है। लगातार गीली मिट्टी से जड़ सड़न और फफूंद का खतरा बढ़ सकता है।
कुछ छोटी आदतें, ढेर सारे फूल: सूख चुके फूलों को समय-समय पर हटाते रहें। इसे डेडहेडिंग कहते हैं और इससे पिटूनिया, गेंदा तथा कई अन्य मौसमी पौधों में नई कलियां बनने को बढ़ावा मिल सकता है। खरपतवार निकालें, जरूरत पड़ने पर ऊपरी मिट्टी हल्की ढीली करें और लंबे या भारी फूलों वाले पौधों को सहारा दें।
पत्तियों के नीचे और नई कलियों पर भी नजर रखें। एफिड, इल्ली, माइट या फफूंद की समस्या शुरुआत में पकड़ में आ जाए तो संभालना आसान होता है। खाद संतुलित मात्रा में दें; जरूरत से ज्यादा नाइट्रोजन मिलने पर कई पौधों में पत्तियां तो खूब आती हैं, पर फूल कम लग सकते हैं। पौधों की अच्छी वृद्धि और भरपूर फूलों के लिए आयरन, जिंक, बोरॉन और मैंगनीज जैसे सूक्ष्म पोषक तत्व (माइक्रोन्यूट्रिएंट्स) भी जरूरी हैं। इनकी कमी होने पर पतियां पीली पड़ सकती हैं और फूलों का विकास प्रभावित हो सकता है, इसलिए आवश्यकता के अनुसार संतुलित सूक्ष्म पोषक तत्वों का प्रयोग करें।
रंगों और ऊंचाई से सजाएं अपनी क्यारी: एक सुंदर बगिया में केवल फूलों की संख्या नहीं, उनकी सजावट भी मायने रखती है। ऊंचे एंटीराइनम या डहेलिया पीछे, मध्यम ऊंचाई वाले कैलेंडुला और डायन्थस बीच में तथा छोटे पैंजी, एलिसम और गजानिया आगे लगाएं। गुलदाउदी या डहेलिया के बड़े गमले किसी कोने को खास आकर्षण दे सकते हैं। जगह कम हो तो पिटूनिया और एलिसम को हँगिंग बास्केट, रेलिंग प्लांटर या विंडो बॉक्स में आजमाएं। रंगों का चुनाव भी सोच-समझकर करें-एक ही रंग के अलग-अलग शेड सुकून भरा रूप देते हैं, जबकि पीले, बैंगनी, गुलाबी और सफेद फूलों का मेल चटख रौनक पैदा करता है।
आज की तैयारी, पूरी सर्दी की मुस्कान: फूलों की बगिया एक दिन में नहीं बनती। थोड़ी योजना, मिट्टी की सही तैयारी, स्वस्थ पौधे और रोज के कुछ मिनटों की देखभाल धीरे-धीरे अपना रंग दिखाते हैं। अक्टूबर में गमले और क्यारियां तैयार कर लें, मौसम के अनुसार बीज या पौधे चुनें और धूप-पानी का ध्यान रखें। फिर देखिए, ठंडी सुबहों में खिलते फूल कैसे घर के हर कोने में ताजगी भर देते हैं।


