माफिया मुख्तार अंसारी को कोर्ट ने सुनाया पांच वर्ष छः माह का सजा
पीएनआई न्युज एजेंसी नोएडा
मुख्तार अंसारी को धमकी मामले में सजा मिलने के बाद रूंगटा परिवार को नंद किशोर
रूंगटा अपहरण कांड में न्याय की उम्मीद जगी है। मुख्तार अंसारी व उसके गिरोह के लोगों ने नंद किशोर रूंगटा अपहरण मामले में पैरवी करने पर वादी के पूरे परिवार को वाराणसी के रूंगटा परिवार को 26 साल बाद न्याय मिलने की उम्मीद जगी है। इस परिवार को जख्म देने वाले मुख्तार अंसारी को कोर्ट ने गुरुवार को पांच साल छह माह की सजा सुनाई है। साथ ही उस पर 10 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है। मुख्तार अंसारी को धमकी मामले में सजा मिलने के बाद रूंगटा परिवार को नंद किशोर रूंगटा अपहरण कांड में न्याय की उम्मीद जगी है। मुख्तार अंसारी व उसके गिरोह के लोगों ने नंद किशोर रूंगटा अपहरण मामले में पैरवी करने पर वादी के पूरे परिवार को बम से उड़ाने की धमकी दी थी। आइए जानते हैं पूरा मामला....
वाराणसी के जवाहर नगर एक्सटेंशन निवासी रहे कोयला कारोबारी और विश्व हिंदू परिषद के कोषाध्यक्ष नंद किशोर रूंगटा के अपहरण और हत्या से संबंधित जो मूल मुकदमा है, वह आज भी कोर्ट में लंबित है। इस मामले की पैरवी सीबीआई कर रही है। मुकदमे में नामजद दो बदमाश 26 साल बाद भी नहीं पकड़े जा सके हैं। सीबीआई की तरफ से दोनों के खिलाफ दो-दो लाख रुपये के इनाम घोषित किए गए हैं।जवाहर नगर एक्सटेंशन निवासी महावीर प्रसाद रूंगटा ने 23 जनवरी 1997 को भेलूपुर थाने में अपने भाई नंद किशोर रूंगटा के अपहरण का मुकदमा दर्ज कराया था। उनका आरोप था कि 22 जनवरी 1997 को सफेद रंग की मारूती वैन में सवार विजय सिंह और उसके साथियों ने उनके भाई का अपहरण कर लिया।पुलिस ने विवेचना शुरू की तो सामने आया कि विजय के रूप में मुख्तार अंसारी ही झारखंड का कोयला कारोबारी बनकर कारोबार के सिलसिले में नंद किशोर रूंगटा से मिला था। चुनाव के लिए मुख्तार को पैसा चाहिए था। उसने नंद किशोर रूंगटा से कारोबार के संबंध में बातचीत करने के लिए उन्हें अपनी वैन में बैठाया और फिर उनका अपहरण कर तीन करोड़ रुपये की फिरौती मांगी थी। पुलिस से शिकायत करने पर परिजनों को बम से उड़ाने की धमकी देकर मुख्तार अंसारी ने पहली किस्त वसूल भी ली थी, लेकिन उसके बाद नंद किशोर रूंगटा का कहीं पता ही नहीं लगा।कहा जाता है कि नंद किशोर रूंगटा की हत्या कर शव प्रयागराज में ठिकाने लगा दिया गया था। परिजनों को अब तक नंदकिशोर का शव नहीं मिला है। इसकी टीस पूरे परिवार को है। यह मामला सामने आने के बाद अपहरण के मुकदमे में हत्या और आपराधिक षड्यंत्र संबंधी धाराएं भी बढ़ा दी गईं। नौ आरोपियों में से तीन को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया था। इसके बाद एक अगस्त 1997 को मुकदमे की विवेचना सीबीआई को सौंप दी गई थी।सीबीआई को विवेचना सौंपे जाने से पहले भेलूपुर थाने के तीन विवेचकों ने नंद किशोर रूंगटा केस की जांच की थी। पुलिस ने नौ आरोपियों को चिह्नित कर नामजद किया था। उनमें मुख्तार अंसारी, गुरमीत सिंह उर्फ हैप्पी, जसविंदर सिंह, परविंदर सिंह, अताउर रहमान उर्फ बाबू उर्फ सिकंदर, सहाबुद्दीन, मूसे भाई, लालजी यादव उर्फ मास्टर और जितेंद्र तिवारी का नाम शामिल था। इनमें से गुरमीत, जसविंदर और परविंदर को 18 मार्च 1997 को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया था। गाजीपुर के महरूपुर निवासी अताउर रहमान और सहाबुद्दीन पर आज भी सीबीआई की ओर से दो-दो लाख रुपये का इनाम घोषित है। मुकदमे में आगे क्या हुआ, इसके बारे में भेलूपुर थाने की पुलिस के साथ ही कमिश्नरेट के उच्चाधिकारियों को भी कोई जानकारी नहीं है।


