अंतरिक्ष विज्ञान से महिला सुरक्षा तक नवाचार की उड़ान, टीकमगढ़ के प्रखर ने पेश की नई पहल
विश्व अंतरिक्ष सप्ताह 2026 से जुड़े सम्मान प्रमाणपत्र में मिला एयरोस्पेस उद्यमिता का पुरुष्कार
टीकमगढ़। सपनों को संकल्प में बदलने और तकनीक को समाज की जरूरतों से जोड़ने की सोच के साथ आगे बढ़ रहे टीकमगढ़ जिले के युवा प्रखर विश्वकर्मा एयरोस्पेस नवाचार के साथ महिला सुरक्षा के क्षेत्र में भी नई संभावनाएं तलाश रहे हैं। बंसल इंस्टीट्यूट, भोपाल में बीटेक मैकेनिकल इंजीनियरिंग के द्वितीय वर्ष के छात्र प्रखर, और इसरो के स्पेस ट्यूटर हैं। अंतरिक्ष विज्ञान और स्वदेशी तकनीक में रुचि रखने वाले प्रखर ने अब महिलाओं की सुरक्षा और जागरूकता को केंद्र में रखकर ‘प्रोजेक्ट दुर्गा शक्ति’ तथा 'एयरो एक्स सुरक्षा' – एस्केप पॉड जैसी पहलें प्रस्तुत की हैं।
प्रखर की तकनीकी यात्रा का एक महत्वपूर्ण पक्ष विश्व अंतरिक्ष सप्ताह 2026 से संबंधित वह सम्मान प्रमाणपत्र है, जिसे उन्होंने साझा किया है। इस प्रमाणपत्र में उन्हें इस वर्ष के सबसे 'युवा एयरोस्पेस स्टार्टअप' के संस्थापक के रूप में चुना गया है| प्रमाणपत्र में नवाचार, नेतृत्व और अंतरिक्ष विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के प्रति उनके समर्पण की सराहना की गई है। यह उपलब्धि उनके द्वारा एयरोस्पेस क्षेत्र में आगे बढ़ने के प्रयासों को रेखांकित करती है।
‘प्रोजेक्ट दुर्गा शक्ति’ : सुरक्षा के साथ आत्मविश्वास का संदेश :-
महिलाओं की सुरक्षा केवल व्यक्तिगत चिंता नहीं, बल्कि पूरे समाज की जिम्मेदारी है। इसी सोच को आधार बनाकर प्रखर ने ‘प्रोजेक्ट दुर्गा शक्ति’ की शुरुआत की है। इस पहल का उद्देश्य महिलाओं और बालिकाओं में सुरक्षा के प्रति जागरूकता बढ़ाना, आत्मविश्वास को प्रोत्साहित करना और सुरक्षित सामाजिक वातावरण के निर्माण में योगदान देना है।
परियोजना की अवधारणा तकनीक, जागरूकता और कौशल विकास को एक साथ जोड़ती है। इसका जोर इस बात पर है कि महिलाओं को सुरक्षा संबंधी जानकारी और उपलब्ध संसाधनों के प्रति जागरूक बनाया जाए तथा समाज में सहयोग और संवेदनशीलता की भावना मजबूत हो। इस पहल के माध्यम से प्रखर तकनीकी सोच को सामाजिक जिम्मेदारी से जोड़ने का प्रयास कर रहे हैं।
‘एयरो एक्स सुरक्षा' – एस्केप पॉड : आपात स्थिति में मदद की तकनीकी अवधारणा :-
महिला सुरक्षा के क्षेत्र में प्रखर की दूसरी पहल ‘एयरो एक्स सुरक्षा' – एस्केप पॉड है। इसे एक छोटे और आसानी से साथ रखे जा सकने वाले व्यक्तिगत सुरक्षा उपकरण की अवधारणा के रूप में प्रस्तुत किया गया है। प्रस्तावित डिजाइन में की-चेन और पहनने योग्य बैंड जैसे विकल्प दर्शाए गए हैं, ताकि जरूरत पड़ने पर उपकरण को आसानी से इस्तेमाल किया जा सके।
इसकी परिकल्पना में SOS इमरजेंसी अलर्ट, तेज आवाज वाला अलार्म, चमकदार स्ट्रोब लाइट और आपातकालीन संपर्कों तक लोकेशन भेजने जैसी सुविधाएं शामिल हैं। इसके अतिरिक्त, ऑडियो-वीडियो रिकॉर्डिंग और आपात परिस्थिति में बच निकलने का अवसर बनाने वाले यांत्रिक सहायता तंत्र की भी अवधारणा प्रस्तुत की गई है।
इस तकनीकी पहल का उद्देश्य संकट के समय आसपास के लोगों का ध्यान आकर्षित करने, भरोसेमंद संपर्कों तक सूचना पहुंचाने और उपयोगकर्ता को सुरक्षित स्थान तक पहुंचने का अवसर देने में सहायता करना है। हालांकि, इन सुविधाओं की वास्तविक क्षमता और विश्वसनीयता प्रोटोटाइप निर्माण, परीक्षण तथा तकनीकी सत्यापन के बाद ही निर्धारित की जा सकेगी।
अंतरिक्ष विज्ञान से सामाजिक नवाचार तक :-
प्रखर की रुचि एयरोस्पेस, रॉकेट तकनीक और स्वदेशी रक्षा प्रौद्योगिकी में रही है। एयरो एक्स स्पेस टेक्नोलॉजी के माध्यम से वे तकनीकी विचारों को विकसित करने और युवाओं में वैज्ञानिक दृष्टिकोण को प्रोत्साहित करने की दिशा में काम करना चाहते हैं। वहीं, प्रोजेक्ट दुर्गा शक्ति और एयरो एक्स सुरक्षा के जरिए उनका प्रयास तकनीक को आम लोगों की सुरक्षा से जोड़ना है।
उनकी सोच इस विचार पर आधारित है कि इंजीनियरिंग का वास्तविक महत्व केवल मशीनों और उपकरणों के निर्माण में नहीं, बल्कि ऐसे समाधान विकसित करने में भी है जो लोगों के जीवन को बेहतर बना सकें। महिला सुरक्षा जैसे संवेदनशील विषय पर तकनीकी पहल करना इसी दृष्टिकोण का हिस्सा है।
युवाओं के लिए प्रेरणा बन रही नवाचार की सोच :-
बीआईएसटी भोपाल में पढ़ाई के साथ तकनीकी उद्यमिता की दिशा में प्रयासरत प्रखर की पहल यह संदेश देती है कि युवा अपनी शिक्षा, रचनात्मकता और सामाजिक जिम्मेदारी को एक साथ लेकर आगे बढ़ सकते हैं। अंतरिक्ष विज्ञान से लेकर महिला सुरक्षा तक, उनका लक्ष्य नई संभावनाओं की तलाश करना और समस्याओं के व्यावहारिक समाधान विकसित करने की दिशा में काम करना है।
इन परियोजनाओं को उपयोगी और भरोसेमंद बनाने के लिए आगे तकनीकी परीक्षण, सुरक्षा मानकों, डेटा गोपनीयता और उपयोगकर्ताओं की जरूरतों पर विशेष ध्यान देना महत्वपूर्ण होगा। यदि इन पहलुओं को प्रभावी ढंग से विकसित किया जाता है, तो ऐसी अवधारणाएं भविष्य में सुरक्षा और जागरूकता से जुड़े प्रयासों को नई दिशा देने में योगदान कर सकती हैं।


