अंगद की रावण को चुनौती व मेघनाद,कुंभकरण,अहिरावण वध

अंगद की रावण को चुनौती व मेघनाद,कुंभकरण,अहिरावण वध

नोएडा। श्रीराम मित्र मंडल नोएडा रामलीला समिति द्वारा आयोजित रामलीला मंचन स्थल रामलीला मैदान सेक्टर-62 में नवम दिवस मुख्य अतिथि नोएडा प्राधिकरण के विशेष कार्याधिकारी एन.के.सिंह,पूर्व मुख्य कार्यपालक अधिकारी पी.के.अग्रवाल,गौतमबुद्धनगर के पूर्व एडीएम एलआर बच्चू सिंह,आदि द्वारा दीप प्रज्वलन कर रामलीला मंचन की शुरुआत की गई।

श्रीराम मित्र मंडल रामलीला समिति के चेयरमैन उमाशंकर गर्ग,अध्यक्ष धर्मपाल गोयल,महासचिव डॉ मुन्ना कुमार शर्मा, कार्यकारी अध्यक्ष राजकुमार गर्ग,वरिष्ठ उपाध्यक्ष सतनारायण गोयल,कोषाध्यक्ष राजेंद्र गर्ग,अनिल गोयल,एस एम गुप्ता, बजरंगलाल गुप्ता ने सभी अतिथियों व उपस्थितजनों को अंगवस्त्रम ओढ़ाकर व स्मृति चिह्न भेंट कर सम्मानित किया।

पहले दृश्य में अंगद रावण से कहता है कि माता सीता को लौटा दो और प्रभु की शरण में आ जाओ।लेकिन अहंकार वश रावण अंगद का उपहास उड़ाता है।तब अंगद अपना पैर रोपते हैं और कोई भी अंगद का पैर डिगा नहीं पाया।

अंत में रावण उठता है और ज्योंहि अंगद का पैर पकड़ने उठता है अंगद कहते हैं कि अगर पैर पकड़ने हैं तो श्रीराम के पकड़ो।रावण लज्जित होता है और अंगद रामदल में पहुंच जाते हैं।श्रीराम सेना लंका पर आक्रमण कर देती है।रावण अपने पुत्र मेघनाद को भेजता है।मेघनाद लक्ष्मण पर शक्ति से प्रहार करता है और लक्ष्मण मूर्छित हो जाते हैं।हनुमान जी सुषेन वैद्य को लाते हैं जो संजीवनी लाने को कहते हैं। हनुमान संजीवनी लेने जाते हैं जिसे देख दर्शक प्रसन्नता से झूम उठते हैं।संजीवनी से लक्ष्मण की मूर्छा खुलती है।

अगले दृश्य में मूर्छा टूटने के पश्चात लक्ष्मण मेघनाथ का वध करने की प्रतिज्ञा लेते हैं और राम से आशीर्वाद ले कर मेघनाथ से पुनः युद्ध के लिए जाते हैं।वध करने की प्रतिज्ञा लेकर लक्ष्मण जिस समय युद्ध भूमि में जाते समय श्रीराम उनसे कहते हैं- "लक्ष्मण, रण में जाकर तुम अपनी वीरता और रणकौशल से रावण-पुत्र मेघनाद का वध कर दोगे, इसमें मुझे कोई संदह नहीं है।

परंतु एक बात का विशेष ध्यान रखना कि मेघनाद का मस्तक भूमि पर किसी भी प्रकार न गिरे।क्योंकि मेघनाद एकनारी-व्रत का पालक है और उसकी पत्नी परम पतिव्रता है।ऐसी साध्वी के पति का मस्तक अगर पृथ्वी पर गिर पड़ा तो हमारी सारी सेना का ध्वंस हो जाएगा और हमें युद्ध में विजय की आशात्याग देनी पड़ेगी।

श्रीराम जी की बात सुनकर लक्ष्मण अपनी सेना लेकर चल पड़े। रणभूमि में उन्होंने वैसा ही किया।युद्ध में अपने बाणों से उन्होंने मेघनाद का मस्तक उतार लिया, पर उसे पृथ्वी पर नहीं गिरने दिया।हनुमान उस मस्तक को रघुनंदन के पास ले आये।तत्पश्चात मेघनाद की पत्नी सुलोचना अपने पति का सर लेने के लिए श्रीराम शिविर में जाती है।

राम को जब यह पता चलता है तो वह स्वयं सुलोचना से मिलने निकल पड़ते हैं और सुलोचना को विधि के विधान से अवगत कराते हैं।मेघनाद के वध के पश्चात रावण कुंभकरण को जगाता है।कुंभकरण के पराक्रम से राम सेना में खलबली मच जाती है।तब भगवान श्रीराम बाणों से उस पर प्रहार करते हैं और कुंभकरण का वध कर देते हैं।