भारत रत्न प्रधानमंत्री स्व.अटल बिहारी वाजपेई की याद में "अटल स्मृति"

भारत रत्न प्रधानमंत्री स्व.अटल बिहारी वाजपेई की याद में "अटल स्मृति"

पुस्तक समीक्षा - अटल स्मृति (खण्ड काव्य) 

भारत रत्न प्रधानमंत्री स्व.अटल बिहारी वाजपेई की याद में, कवि उमाकान्त तिवारी ‘प्रचण्ड’ ने अटल स्मृति नामक खण्ड काव्य लिखकर हिन्दी काव्य जगत में हिन्दी मातृभाषा का काव्य स्तूप स्तम्भित किया है। 
लेखन शैली में जहाँ विविध रंगों की सुमनों का  माल्य है, वहीं  स्वर लहरी की गंग तरंग  भी है  जो पूज्य अटल बिहारी वाजपेई जी जैसे महामानव के गरिमाओं का अष्टगन्ध प्रसारित करता हुआ  स्वयं सुगंध मय  दीपशिखा की न्याईं  प्रज्वलित है ।  आदरणीय अजातशत्रु अटल बिहारी वाजपेई जी की लोक कल्याण चिन्तन धारणाओं को  कवि ने अनुपमेय ढंग से प्रस्तुत किया है ।  जिसमें प्रचण्ड का तेज सहज ही सभी पापों- तापों  एवं समस्त कलूषताओं  का  

संशोधन करता हुआ  न्याययिक प्रणालियों की पद्य पंचाशिका है । सभी भटके पथिको का सुगम राह और संतुष्ट जीवन का संतोषी कर्मयोग  की सुगंध भी।  
 कवि के हृदय में इस पुस्तक का जन्म  इक  भावनात्मक गहरे आघात से प्रारम्भ होता हुआ दृष्टिगोचर होता है । 
 क्योंकि जब माननीय अटल बिहारी वाजपेई जी का महाप्रयाण हुआ   तब यह सुनते ही कवि शोकाकुल हो जाते हैं और उसी क्षण से निरंतर मुखरित होती हुई कविताएं लगभग एक वर्ष में  पुस्तक का रूप धारण करती है।

कवि की भावनात्मक मान्यताएं सैद्धांतिक हैं,वह जानता है
कि पूज्य अटल बिहारी वाजपेई जी एक युग पुरुष ही हैं
जिनका अवतरण इस अवनी पर निरंतर संभव नहीं है।
 इसी कारण  वह सैद्धांतिक विचार प्रवाहों में घुल गये हैं
और अपने उस मौलिक सोच -विचार में पूज्य अटल बिहारी वाजपेई जी को पाता है तब गाता है।
 इस पुस्तक में वह धारणात्मक ज्ञान एवं प्रेम की पराकाष्ठा है
 जिसका हर एक पंक्ति मानव जीवन दर्शन को उजागर करता है।  कीर्ति उन्नयन, बिखरों  को सूत्रित करना विचार धाराओं का परिमार्जन  तथा भारत के सम्प्रभुता अखण्डता के प्रति सचेष्ट रहने को उत्सुक करती हुई इस (अटल स्मृति) पुस्तक की सभी पंक्तियां न्यायोचित है।
 गायन शैली में डुबा हुआ कवि निश्चय ही भावना के प्रवाह में बहता हुआ ब्याकरण के नियमों और छन्द के सैद्धांतिक मात्राओं   के ऊहापोह से हटता एवं बचता नजर आता है।
    अटल स्मृति नामक इस खण्ड काव्य में कुल सात सर्ग हैं । 
 सभी सर्गों में  आरम्भ से अंत तक  कवि की मौलिकता एवं स्वर लयवद्धता  का समावेश है।  अस्तु पुस्तक के सभी पद्य अनुकरणीय है ।

कवि ने इस पुस्तक में हिन्दी,अवधी एवं ब्रज भाषा का प्रयोग किया है।  काव्य शैली में विविधता अवश्य है,किन्तु अनेकता में एकता और अखंडता, संप्रभुता का सूत्र सूत्रित है।   लेखक -उमाकान्त तिवारी, प्रचण्ड,  जी का भाषा जगत पर  असाधारण अधिकार होने के नाते ही इस पुस्तक में प्रायः कई क्लिष्ट शब्द  भी संगीतमय और सहज ही तुकान्तमय  है ।

 - किरण आशा की प्रबल हो, हो धुरंधर नीतियों में।
  तुम अकेले चले पैदल, गाँव के हर वीथियों में।।* 

 इस पद्  में कवि भाव जगत में डूबा हुआ  भारत रत्न प्रधानमंत्री स्वर्गीय अटल बिहारी वाजपेई जी को पुकार रहा है  -कि हे महामानव आप सभी  मानव जाति की आशा हो  , उम्मीद की किरण हो आप । क्योंकि आप समूची मानव जाति के कल्याण के लिए अकेले ही गांवों -शहरों में सब जगह अमीरों और गरीबों सबके ही दुःख -दर्द को मिटाने का प्रयास किया है ।आप नीतियों के धुरंधर ज्ञानी हैं,विशेष जानकार हैं आप वाकई में आपके प्रणों में हजारों प्राण समाहित है।

पद्य  -हाँ हज़ारों प्राण  आपके प्राण में मिल जा रही।
         कर्मण्येवाधिकारस्ते की सुगंधी आ रही।।

इस पद का अभिप्राय यही है कि हे माननीय अटल जी आप
एक ऐसे महान कर्मयोगी है जिनकी प्रस्फुरित सुगंध सभी भारतीयों में पायी जाती है। इसीलिए आप अजातशत्रु हैं।
आपका कोई शत्रु है ही नहीं क्योंकि आप सभी जनों से प्रेम करते थे और सभी आपसे।

पद्य -अजातशत्रु आपके  महिमा की गाने गा रही।
        कर्मण्येवाधिकारस्ते की सुगंधी आ रही।। 

विशेष -राष्ट्र  निष्ठा को उजागर करती हुई पुस्तक में प्रकाशित एक पंक्ति सर्वींगीण भारत मां के लिए निष्ठा से भरा हुआ है।

पूर्ण भारती का आँचल हो , अन्य कोई अरमान नहीं।
है सर्वस्व मेरी भारत मां ,और कोई भगवान नहीं।।