कॉरपोरेट बोर्डरूम को जलवायु जोखिमों को अपने मुख्य निर्णयों में शामिल करना चाहिए; सीईईडब्ल्यू का क्रेविस भारत के योजना निर्माण के तरीके को बदल सकता है: पीयूष गोयल
भारत अगले दो दशकों में असामान्य गर्म दिनों में प्रतिवर्ष 40 दिनों की बढ़ोतरी देख सकता है, CEEW के नए AI क्लाइमेट इंटेलिजेंस प्लेटफॉर्म की जानकारी
CRAVIS प्लेटफॉर्म में आईएमडी, आईआईटीएम पुणे और अन्य संस्थानों के 40 से अधिक वर्षों के भरोसेमंद आंकड़ों को 2070 तक के अनुमानों से जोड़ा गया है।
यह 'एजेंटिक AI' प्लेटफॉर्म है, जो सामान्य प्रश्नों के जरिए सटीक और स्रोतों पर आधारित जानकारी देता है।
नई दिल्ली: केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने आज नई दिल्ली में 'क्लाइमेट रेजिलिएंस एनालिटिक्स एंड विजुअलाइजेशन इंटेलिजेंस सिस्टम' (CRAVIS) को जारी करने के अवसर पर कहा, "कॉरपोरेट बोर्डरूम को जलवायु जोखिमों को अपने मुख्य निर्णयों में अनिवार्य रूप से शामिल करना चाहिए। सीईईडब्ल्यू का बनाया क्रेविस प्लेटफॉर्म इस बात में व्यापक बदलाव ला सकता है कि लगातार गर्म होती दुनिया में भारत अपनी योजनाएं कैसे बनाए।" अपनी तरह के इपहले एआई-संचालित क्लाइमेट इंटेलिजेंस प्लेटफॉर्म क्रेविस को काउंसिल ऑन एनर्जी, एनवायरनमेंट एंड वॉटर (CEEW) ने तैयार किया है।
इस प्लेटफॉर्म के अनुमान के अनुसार, त्वरित जलवायु परिवर्तन के कारण 1981-2010 के जलवायु आधार (बेसलाइन) की तुलना में अगले दो दशकों में भारत में प्रति वर्ष अतिरिक्त 15 से 40 अत्यधिक गर्म दिन* देखे जा सकते हैं। कई क्षेत्रों में असामान्य रूप से गर्म रातों में भी सालाना 20 से 40 दिनों की बढ़ोतरी होने का अनुमान है। गर्म रातें इंसानी सेहत पर नकारात्मक प्रभाव डालती हैं, क्योंकि ये सूर्यास्त के बाद भी शरीर को गर्मी से छुटकारा पाने से रोकती हैं, जिसका सीधा असर श्रमिकों की उत्पादकता, बुनियादी ढांचे की क्षमता और व्यापक आर्थिक लचीलेपन पर पड़ता है।
'क्रेविस' (CRAVIS) प्लेटफॉर्म 40 से अधिक वर्षों के ऐतिहासिक जलवायु आंकड़ों को 2030-2050 और 2051-2070 तक का अनुमान देता है। यह विभिन्न उत्सर्जन और ग्लोबल वार्मिंग से जुड़े परिदृश्यों के तहत 279 संकेतकों के आधार पर जिला-स्तरीय विश्लेषण करने में सक्षम है। यह उपयोगकर्ताओं (यूजर्स) को एकीकृत जोखिम विश्लेषण (integrated risk analysis) करने के लिए जलवायु के आंकड़ों को विभिन्न क्षेत्रीय आंकड़ों के साथ , जैसे बिजली का बुनियादी ढांचा, कृषि, भूमि उपयोग और जनस्वास्थ्य, जोड़कर देखने और समझने की सुविधा भी देता है।
यह प्लेटफॉर्म 'कोलैबोरेटिव डेटा कॉमन्स' (साझा डेटा मंच) के रूप में बनाया गया है। यह ओपन और इंटरऑपरेबल डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर पर आधारित है। यह विभिन्न संगठनों और भागीदारों को आंकड़ों और विश्लेषणों को साझा करने के लिए आमंत्रित करता है, ताकि इसके इंटेलिजेंस बेस को लगातार बढ़ाया और मजबूत बनाया जा सके। 'क्रेविस' (CRAVIS) प्लेटफॉर्म को रोहिणी नीलेकणी फिलैंथ्रोपीज, एचएसबीसी फाउंडेशन, स्पेक्ट्रम इम्पैक्ट, इंडिया क्लाइमेट कोलैबोरेटिव, और रेनमैटर फाउंडेशन के सहयोग से विकसित किया गया है।
पीयूष गोयल, केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री*, ने अपने मुख्य भाषण में कहा, “कल की रात अप्रैल की सबसे गर्म रातों में से एक रात महसूस हुई। बढ़ता तापमान, गर्म दिनों की बढ़ती संख्या और भारी बारिश की लगातार होती घटनाएं, इस बात का स्पष्ट संकेत हैं कि जलवायु परिवर्तन भारत के लिए मौजूदा समय की वास्तविकता है, जो हमारी अर्थव्यवस्था और दैनिक जीवन को प्रभावित कर रही है। पिछले एक दशक में, प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में, भारत ने जलवायु कार्रवाई (क्लाइमेट एक्शन) को केवल एक दायित्व नहीं, बल्कि एक आर्थिक रूप से व्यवहार्य योजना बनाने की दिशा में काम किया है। आगे बढ़ते हुए, कॉरपोरेट बोर्डरूम को जलवायु जोखिमों को अपने मुख्य निर्णयों में शामिल करना होगा।
आज, मुझे सीईईडब्ल्यू के एआई-संचालित क्लाइमेट इंटेलिजेंस प्लेटफॉर्म 'क्रेविस' को लॉन्च करते हुए बेहद खुशी हो रही है, जो सार्वजनिक जलवायु सूचनाओं के क्षेत्र में दुनिया भर के लिए भारत की एक अनूठी पेशकश साबित हो सकता है। यह भारत के बढ़ते 'डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर' (डीपीआई) में एक महत्वपूर्ण कड़ी है, जिसने पहले ही यूपीआई, ओपन नेटवर्क फॉर डिजिटल कॉमर्स (ओएनडीसी) और वैक्सीन मैत्री जैसी सफलताओं को देखा है। मुझे उम्मीद है कि कंपनियां निवेश के मार्गदर्शन, जोखिमों के आकलन और प्रत्येक चुनौती को आर्थिक रूप से व्यवहार्य अवसर में बदलने के लिए क्रेविस जैसे प्लेटफॉर्म का उपयोग करेंगी।”
डॉ. अरुणाभा घोष, सीईओ, काउंसिल ऑन एनर्जी, एनवायरनमेंट एंड वॉटर (CEEW), ने कहा, “सीईईडब्ल्यू में हमारा मानना है कि बेहतर सूचनाएं (intelligence) व्यापक रूप से सुलभ होनी चाहिए। यह प्लेटफॉर्म जलवायु लचीलेपन (क्लाइमेट रेजिलिएंस) के लिए हमारे 12 वर्षों के कार्यों पर आधारित है: 2014-15 में शुरुआती वैश्विक प्रयासों से लेकर बहुत ही बारीक शहर-स्तरीय विश्लेषणों तक, जैसे कि अमरावती में हमारा काम हो या सभी जिलों के जोखिम की मैपिंग करना, या अब लचीलेपन को सशक्त बनाने के लिए तैयार की गई केविस जैसी एक गतिशील, एआई-सक्षम प्रणाली।
जलवायु विज्ञान और एआई में प्रगति के बावजूद, निर्णयकर्ताओं को अभी भी ऐसी व्यावहारिक जानकारियों (ऐक्शनेबल इनसाइट्स) की जरूरत होती है जो उन्हें समय पर कदम उठाने में सक्षम बनाए। क्रेविस को क्लाइमेट इंटेलिजेंस को एक मॉडल से निकालकर शासन के सभी स्तरों पर निर्णय-कर्ताओं के हाथों तक पहुंचाने के लिए विकसित किया गया है, ताकि इसे भारत के सभी जिलों से लेकर बाजारों तक, और अंत में संपूर्ण 'ग्लोबल साउथ' में विभिन्न क्षेत्रों और स्तरों पर दैनिक योजनाओं और प्रतिक्रिया प्रणालियों के लिए उपयोगी, विश्वसनीय और उसमें शामिल करने योग्य बनाया जा सके।”
'क्रेविस' (CRAVIS) के निष्कर्षों के अनुसार, भारत के 281 डेटा सेंटर्स में से आधे से अधिक पहले से ही प्रति वर्ष 90 से अधिक दिनों तक 35 डिग्री सेल्सियस से ऊपर के तापमान का सामना कर रहे हैं। 2040 तक, यह स्थिति लगभग 90 प्रतिशत डेटा सेंटर्स के सामने आ सकती है। इससे इनकी कूलिंग (शीतलन) की ज़रूरतें और परिचालन लागत में काफी बढ़ोतरी हो जाएगी। दिल्ली में वर्तमान में लगभग 180 दिनों की तुलना में अगले 25 वर्षों में गर्म रातों (20 डिग्री सेल्सियस से ऊपर न्यूनतम तापमान) की संख्या 210 दिनों से अधिक होने का अनुमान है, जो कूलिंग की मांग में एक अतिरिक्त महीने की वृद्धि के बराबर है। इसका असर बिजली की अधिकतम मांग (पीक लोड) और वार्षिक खपत, दोनों पर पड़ेगा।
तापमान वृद्धि के साथ-साथ, अगले दो दशकों में भारी बारिश की घटनाएं भी लगातार बढ़ने का अनुमान है। 'क्रेविस' (CRAVIS) के अनुसार, कई जिलों में प्रतिवर्ष भारी बारिश वाले 10 से 30 दिनों की वृद्धि देखी जा सकती है। महाराष्ट्र, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, कर्नाटक और तमिलनाडु जैसे मध्य और दक्षिणी राज्यों में बारिश और गर्म दिनों, दोनों में ही अधिक वृद्धि होने की संभावना है। सीईईडब्ल्यू के ये निष्कर्ष ऐसे समय में आए हैं, जब भारत शुरुआती लू (हीटवेव) से लेकर संभावित 'सुपर अल नीनो' जैसी जलवायु की चरम स्थितियों का सामना कर रहा है। भारत पहले से ही गर्मी के बढ़ते जोखिम को देख रहा है, जहां 57 प्रतिशत से अधिक जिले और लगभग 75 प्रतिशत आबादी के सामने अधिक से बहुत अधिक गर्मी का जोखिम मौजूद है।
डॉ. विश्वास चितले, फेलो, सीईईडब्ल्यू ने कहा, “'क्रेविस' (CRAVIS) का वास्तविक प्रभाव तभी आ सकता है जब इसे निर्णय लेने की प्रक्रिया में नियमित रूप से शामिल किया जाए। यह प्लेटफॉर्म जटिल क्लाइमेट इंटेलिजेंस को नीति निर्माताओं, उद्योगपतियों, वित्तीय विशेषज्ञों, पत्रकारों और शहरी योजनाकारों के लिए सरल और सुलभ बनाता है। राज्यों के विभिन्न विभाग गर्मी की कार्य योजनाएं (हीट एक्शन प्लान) और अपनी तैयारी की रणनीतियों को अपडेट करने के लिए जिला-स्तरीय गर्मी और बारिश के संकेतकों का उपयोग कर सकते हैं, शहरी स्थानीय निकाय मास्टर प्लान और बुनियादी ढांचे के निवेश में जलवायु कारकों को जोड़ सकते हैं, और नियामकीय व उपयोगिता सेवाएं (यूटिलिटीज) मांगों के पूर्वानुमान और उसके अनुरूप लचीली योजनाओं के निर्माण में 'क्रेविस' (CRAVIS) के अनुमानों को शामिल कर सकती हैं।”
वैभव चुग, टेक्नोलॉजी और एआई लीड, सीईईडब्ल्यू ने कहा, “'क्रेविस' (CRAVIS) में मौजूद 'एजेंटिक एआई' जलवायु आंकड़ों के उपयोग को बेहद सरल बनाता है। उपयोगकर्ता मानचित्रों, चार्ट और डैशबोर्ड के जरिए जिला-स्तरीय जोखिमों का पता लगा सकते हैं। वे सामान्य भाषा में प्रश्न पूछ सकते हैं, जैसे कि बढ़ती गर्मी दिल्ली में बिजली की मांग को कैसे प्रभावित कर सकती है, या असम में चाय उत्पादन पर बारिश और तापमान में बदलाव का क्या असर पड़ सकता है। वे इस प्लेटफॉर्म से कुछ सेकंड में प्रमाणित आंकड़ों के जरिए स्पष्ट और स्रोतों पर आधारित जानकारी हासिल कर सकते हैं। यह वैज्ञानिक सटीकता और उपयोग करने में सरलता (ease of use) को जोड़ता है जिससे उपयोगकर्ताओं को आंकड़ों से लेकर निर्णयन प्रक्रिया तक तेजी से पहुंचने में मदद मिलती है।"
'क्रेविस' (CRAVIS) 279 संकेतकों के आधार पर जिला, ग्रिड (25-25 किलोमीटर) और राज्य स्तर पर जलवायु आंकड़े उपलब्ध कराता है। इन्हें तापमान, वर्षा और नमी (आर्द्रता) से जुड़े 20 से अधिक विश्लेषण-अनुकूल मापदंडों (मेट्रिक्स) के रूप में संकलित किया गया है। इनमें अत्यधिक गर्मी वाले दिन, भारी बारिश की घटनाएं, सूखे की गंभीरता और सूखे की सबसे लंबी अवधियों जैसे महत्वपूर्ण आंकड़े शामिल हैं।
एक विश्वसनीय और निर्णय लेने के लिहाज से उपयुक्त क्लाइमेट इंटेलिजेंस देने के लिए, इस प्लेटफॉर्म को भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD), केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण (CEA), भारतीय वन सर्वेक्षण (FSI), IIT दिल्ली और IITM पुणे जैसे आधिकारिक स्रोतों से आंकड़े लेकर बनाया गया है। यह एक गतिशील प्रणाली (dynamic system) होगी, इसलिए इसके बुनियादी डेटासेट में अपडेट के साथ-साथ 'क्रेविस' को भी रिफ्रेश किया जाएगा। इससे सुनिश्चित हो सकेगा कि यह तेजी से अनिश्चित हो रहे भविष्य में जलवायु को ध्यान में रखकर योजनाओं का निर्माण करने के लिए एक लगातार विकसित होने वाला संसाधन बना रहे।
असामान्य रूप से गर्म दिनों" (Unusually hot days) का अर्थ उन दिनों से है, जिनमें दैनिक औसत तापमान 1981-2010 के जलवायु आधार (बेसलाइन) के अनुसार, उस विशिष्ट जिले के लिए निर्धारित '90वें पर्सेंटाइल' (90th percentile) की सीमा से अधिक हो जाता है।


