आई.आई.टी रोपड़ और पंजाब यूनिवर्सिटी चंडीगढ़ द्वारा उत्तर भारतमें प्रौद्योगिकी विकास वातावरण को और मजबूत करने के लिए हाथ मिलाया

आई.आई.टी रोपड़ और पंजाब यूनिवर्सिटी चंडीगढ़ द्वारा उत्तर भारतमें प्रौद्योगिकी विकास वातावरण को और मजबूत करने के लिए हाथ मिलाया

रोपड़: भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आई.आई.टी) रोपड़ और पंजाब यूनिवर्सिटी चंडीगढ़(पीयू) द्वारा विज्ञान और प्रौद्योगिकी की गतिविधियों में सहयोग और समर्थन को बढ़ावा देने के लिए आज दोनों संस्थानों के दरमियान एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए। आईआईटी रोपड़ के निदेशक प्रोफ़ेसर राजीव आहूजा जी ने समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर करते वक़्त कहा कि यह समझौता ज्ञापन उद्योगों की विशेषज्ञता और अनुभव के साथ दोनों प्रख्यात संस्थानों की अनुसंधान एवं विकास शक्तियों को एकीकृत करेगा और उद्योग एवं शिक्षाविदों की वैज्ञानिक समस्याओं के तकनीकी समाधान खोजने में मदद करेगा तथा एक मजबूत व जीवंत नवाचार संचालित प्रौद्योगिकी विकास पारिस्थितिकी तंत्र स्थापित करने में भी मदद करेगा।  

निदेशक प्रोफ़ेसर राजीव आहूजा जी ने कहा कि 'आत्मनिर्भर भारत' के जनादेश का समर्थन करने के लिए, पंजाब विश्वविद्यालय, चंडीगढ़ और भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान रोपड़ इस क्षेत्र में साइंस एंड टेक्नोलॉजी क्लस्टर का नेतृत्व करने के लिए मिलकर एक साथ काम करेंगे।

उन्होंने कहा कि विज्ञान, प्रौद्योगिकी और नवाचार के क्षेत्र में संस्थागत सहयोग के महत्व को स्वीकार करते हुए, क्लस्टर बाद के वर्षों में क्षमताओं के विकास और संसाधन सृजन के क्रमिक निर्माण के लिए एक आधुनिक दृष्टिकोण को अपनाएगा। उन्होंने कहा कि यह क्लस्टर उद्योगों, राज्य सरकारों, जिला संगठनों, नगर निगमों, स्थानीय निकायों की क्षेत्रीय साइंस एंड टेक्नोलॉजी समस्याओं के लिए एक समाधान प्रदाता होगा और बौद्धिक संपदा, प्रौद्योगिकी प्रबंधन सहायता, टेक-ट्रांसफर / व्यावसायीकरण समर्थन और अनुसंधान और विकास गतिविधियों की पहुंच के क्षेत्रों में 'ट्रांसलेशनल रिसर्च इकोसिस्टम' को बढ़ावा देने के लिए एक सेवा प्रदाता के रूप में कार्य करेगा।

वहीं यह क्लस्टर नई शिक्षा नीति-2020 के लक्ष्य को पूरा करने के लिए मानव संसाधनों सहित ऊर्जा और संसाधनों का समन्वय भी करेगा ताकि कुशल मानव संसाधनों का निर्माण किया जा सके जो स्टार्ट अप इंडिया, स्किल इंडिया, स्वस्थ भारत-श्रेष्ठ भारत, मेक इन इंडिया आदि  भारत सरकार के अभियान और वैज्ञानिक सामाजिक उत्तरदायित्व (एसएसआर) दिशा निर्देश 2022 को मजबूत कर सकें।

उन्होंने कहा कि एस एंड टी क्लस्टरों को नीति आयोग के उपाध्यक्ष (वीसी) की अध्यक्षता वाली 'क्लस्टर एपेक्स कमेटी' द्वारा निर्देशित किया जा रहा है, जिसमें भारत सरकार के प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार (ओ/ओपीएसए) के कार्यालय से सचिवालय का समर्थन प्राप्त है। वहीं ये साइंस एंड टेक्नोलॉजी क्लस्टर 'कंपनी अधिनियम 2013' के साथ पंजीकृत हैं जो धारा - 8 तहत  नान प्राफिट कंपनी के रूप में कार्य करेगा। इन समूहों का मुख्य उद्देश्य अंतिम उपयोगकर्ताओं, अर्थात उद्योगों और सरकारी विभागों की अनुसंधान एवं विकास समस्याओं के लिए वन स्टॉप साल्यूशन के रूप में कार्य करना है।

भारत सरकार ने पहले ही पूरे भारत में छह साइंस एंड टेक्नोलॉजी क्लस्टर स्थापित किए हैं। इन समूहों के प्रमुख हितधारकों में शिक्षाविद, अनुसंधान संस्थान, उद्योग के सदस्य, एमएसएमई, स्टार्टअप समुदाय और स्थानीय प्रशासन शामिल हैं।

पीयू, चंडीगढ़ के प्रोफेसर मनु शर्मा और आईआईटी रोपड़ से डॉ पुष्पेंद्र पी सिंह इस सहयोगी कार्यक्रम को निष्पादित करने, निगरानी और समीक्षा करने के लिए समन्वयक होंगे।