फोर्टिस के डॉक्टरों ने 18-माह के शिशु का बचाया जीवन
मूंगफली का सेवन करने की वजह से यह बच्चा कार्डियाक अरेस्ट और रेस्पिरेट्री फेलियर का शिकार हआ था
नोएडा: फोर्टिस नोएडा के डॉक्टरों ने एक असाधारण जीवन-रक्षक क्लीनिकल हस्तक्षेप कर मेरठ के एक 18-वर्षीय बच्चे को नाजुक कंडीशन से निकालकर उसे नया जीवनदान दिया है। इस बच्चे ने दुर्घटनावश मूंगफली निगल ली थी जिसकी वजह से उसकी हालत बेहद गंभीर हो गई थी, और तब उपचार के लिए उसे अस्पताल लाया गया। डॉ मयंक सक्सेना, एडिशनल डायरेक्टर, पल्मोनोलॉजी, फोर्टिस हॉस्पीटल नोएडा के नेतृत्व में डॉक्टरों की टीम ने इस बच्चे के वायुमार्ग में फंसी मूंगफली को क्रायो-बायप्सी फोरसेप से सफलतापूर्वक निकाला, और 2 दिनों के बाद इस बच्चे को स्थिर अवस्था में अस्पताल से छुट्टी दी गई।
इस बच्चे ने एक दिन पहले गलती से मूंगफली निगल ली थी और उसे पहले मेरठ के ही एक स्थानीय अस्पताल ले जाया गया। समय के बाद उसके लक्षण हल्के पड़ गए थे, और उसका पारंपरिक तरीके से इलाज किया जा रहा था। डॉक्टरों को यह लगा था कि संभवतः मूंगफली खुद से ही बाहर निकल गई थी या बच्चे के खाद्य मार्ग में चली गई थी। इसलिए, उन्होंने आगे कोई जांच नहीं की। लेकिन अगले कुछ ही घंटों में इस मूंगफली ने काफी पानी/नमी सोख ली थी, और इसके फूलने के बाद आकार इतना बढ़ गया था कि वह वायुमार्ग में रुकावट बन गई, जिसकी वजह से बच्चे को सांस लेने में कठिनाई
होने लगी। इस बच्चे को रातों-रात सांस लेने में परेशानी होने लगी थी और तब बच्चे के अभिभावक उसे आधी रात को ही इलाज के लिए फोर्टिस हॉस्पीटल नोएडा लेकर आए।
जब इस बच्चे को अस्पताल लाया गया तो उसे सांस लेने में काफी तकलीफ थी और उसका ऑक्सीजन लेवल काफी कम था, जिससे यह साफ था कि उसके वायुमार्ग में रुकावट थी। अस्पताल लाए जाने पर, उसे रेस्पिरेटरी फेलियर के चलते कार्डियाक अरेस्ट भी हुआ। फोर्टिस नोएडा में पिडियाट्रिक आईसीयू टीम ने तुरंत एडवांस लाइफ सपोर्ट पर रखा जिसमें इमरजेंसी इनट्यूबेशन और मैकेनिकल वेंटिलेशन शामिल था। बच्चे के वायुमार्ग में फंसी बाहरी वस्तु की पहचान करने और उसे निकालने के लिए तत्काल ब्रोंकोस्कोपी की गई।
क्रायो-बायप्सी फोरसेप और डॉरमिया बास्केट जैसी उन्नत तकनीकों का इस्तेमाल करते हुए, मेडिकल टीम ने मूंगफली के सभी टुकड़ों को सावधानीपूर्वक निकाला। यह हाइ-रिस्क ब्रोंकोस्कोपी में करीब 5 से 6 घंटे का समय लगा, और इसमें काफी सटीकता, धैर्य और तालमेल की जरूरत थी। इस प्रक्रिया के बाद, बच्चे की हालत अगले 24 घंटों तक नाजुक बनी रही और वह डॉ अंकित प्रसाद, कंसल्टेंट पिडियाट्रिक, फोर्टिस हॉस्पीटल नोएडा की देखरेख में रहा। धीरे-धीरे इस बच्चे की कंडीशन में सुधार होने लगा, और पूरी तरह रिकवर होने के बाद उसे स्थिर हालत में अस्पताल से छुट्टी दे दी गई।
इस मामले की जानकारी देते हुए, डॉ मयंक सक्सेना, एडिशनल डायरेक्टर, पल्मोनोलॉजी, फोर्टिस हॉस्पीटल नोएडा ने कहा, “मूंगफली जैसी ऑर्गेनिक वस्तु का वायुमार्ग में फंसना काफी खतरनाक हो सकता है। धीरे-धीरे ये पदार्थ पानी सोखते रहते हैं, और आकार में बढ़ते रहते हैं जो आगे चलकर वायुमार्ग को अवरुद्ध कर सकते हैं। शुरू में ये लक्षण हल्के होते हैं लेकिन तेजी से बिगड़ सकते हैं। शुरूआती जांच के तहत इमेजिंग, तत्काल डायग्नॉसिस और खासतौर से छोटे बच्चों में, तुरंत उसे हटाया जाना जरूरी होता है।”
मोहित सिंह, ज़ोनल डायरेक्टर, फोर्टिस हॉस्पीटल नोएडा ने कहा, “इस मामले ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि एडवांस इमरजेंसी केयर,खासतौर से छोटे बच्चों के मामले में, कितनी महत्वपूर्ण होती है। इस मामले की सफलता ने हमारी पल्मोनोलॉजी, पिडियाट्रिक्स, क्रिटिकल केयर और आईसीयू टीमों की क्लीनिकल उत्कृष्टता, तैयारी और तालमेल का परिचय दिया है। फोर्टिस हॉस्पीटल नोएडा,में हम बेहद चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में भी त्वरित,साक्ष्य-आधारित हस्तक्षेप प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध हैं।”


