आईआईटी रोपड़ ने अनुसंधान, प्रौद्योगिकी और उद्यमशीलता में बड़ी घोषणाओं के साथ मनाया 18वाँ स्थापना दिवस
पंजाब के राज्यपाल गुलाब चंद कटारिया ने दिया मुख्य भाषण
भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान रोपड़ (आईआईटी रोपड़) ने मंगलवार को अपना 18वाँ स्थापना दिवस मनाया और भारत के अनुसंधान एवं नवाचार परितंत्र को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से अनेक शैक्षणिक, तकनीकी और उद्यमशीलता संबंधी पहलों की घोषणा की। संस्थान के सभागार में 'देश में अनुसंधान, नवाचार और उद्यमशीलता को गति देना' विषय पर आयोजित इस कार्यक्रम में पंजाब के राज्यपाल एवं चंडीगढ़ के प्रशासक गुलाब चंद कटारिया मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे और उन्होंने एक प्रेरणादायक मुख्य भाषण दिया। राज्यपाल ने कहा, "आईआईटी रोपड़ जैसे संस्थान आत्मनिर्भर भारत के इंजन हैं। यहाँ के शोध की गुणवत्ता, उद्यमशीलता की भावना तथा प्राध्यापकों और छात्रों की लगन यह सिद्ध करती है कि भारतीय उच्च शिक्षा किस ऊँचाई को प्राप्त कर सकती है।"
स्वागत भाषण प्रो. राजीव आहूजा, निदेशक, आईआईटी रोपड़ ने दिया, जिसमें उन्होंने कहा, "2008 में सतलुज के तट पर स्थापित एक युवा संस्थान से आईआईटी रोपड़ आज राष्ट्रीय महत्व का एक शोध-गहन विश्वविद्यालय बन चुका है। हमारे प्राध्यापक और छात्र उच्च प्रभाव वाले शोध प्रकाशित कर रहे हैं, पेटेंट दाखिल कर रहे हैं और ऐसे स्टार्टअप बना रहे हैं जो वास्तविक समस्याओं का समाधान करते हैं। हमारी आकांक्षा है कि अनुसंधान, नवाचार और उद्यमशीलता में हम देश के सबसे प्रभावशाली संस्थानों में शामिल हों और हमारे कार्य का लाभ समाज, उद्योग और राष्ट्र तक पहुँचे।"
समारोह में आईआईटी रोपड़ के संस्थापक निदेशक (पूर्व) प्रो. एम.के. सुरप्पा, जो अन्ना विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति भी हैं, ने संस्थान की उल्लेखनीय यात्रा पर विचार साझा किए और शोध नेतृत्व की दिशा में इसके अग्रगामी पथ पर विश्वास व्यक्त किया। धन्यवाद ज्ञापन डॉ. पुष्पेंद्र पी. सिंह, डीन, कॉर्पोरेट एलुमनी प्लेसमेंट एवं रणनीति (सीएपीएस) तथा परियोजना निदेशक, अन्नम एआई ने दिया।
प्रमुख घोषणाएँ: सुपरकंप्यूटिंग से डिजिटल धरोहर तक-
इंडस एचपीसी — उच्च प्रदर्शन कंप्यूटिंग सुविधा: संस्थान ने इंडस एचपीसी का औपचारिक उद्घाटन किया, जो एक अत्याधुनिक उच्च प्रदर्शन कंप्यूटिंग सुविधा है। इससे इंजीनियरिंग, जीव विज्ञान, जलवायु मॉडलिंग और कृत्रिम बुद्धिमत्ता के क्षेत्र में संगणनात्मक शोध को अभूतपूर्व गति मिलेगी। यह सुविधा आईआईटी रोपड़ को समर्पित एचपीसी अवसंरचना वाले चुनिंदा भारतीय तकनीकी संस्थानों की श्रेणी में स्थापित करती है।
शौर्य स्थल: देश की सशस्त्र सेनाओं को सम्मान देने और पंजाब की रणनीतिक भूमि पर स्थित संस्थान की देशभक्तिपूर्ण पहचान को मूर्त रूप देने के लिए एक समर्पित स्मारक स्थल — शौर्य स्थल — का अनावरण किया गया।
नालंदा चैटबॉट एवं डिजिटल अवसंरचना: संस्थान ने स्वदेशी रूप से विकसित एआई-संचालित चैटबॉट 'नालंदा' लॉन्च किया, जो शैक्षणिक और प्रशासनिक प्रश्नों के लिए एक बुद्धिमान इंटरफेस के रूप में कार्य करेगा। इसके साथ ही एक प्रकाशन डैशबोर्ड और डिजिटल अभिलेखागार भी प्रारंभ किए गए, जो संस्थान के बढ़ते शोध-कार्यों तक सभी हितधारकों को पारदर्शी पहुँच प्रदान करेंगे।
आरडीआईएफ निवेश प्रतिबद्धताएँ: आईआईटी रोपड़ ने अपने अनुसंधान, विकास एवं नवाचार कोष (आरडीआईएफ) के लिए भागीदारों से औपचारिक निवेश प्रतिबद्धताओं की घोषणा की, जो संस्थान की अनुसंधान क्षमताओं और व्यावसायीकरण की संभावनाओं में निजी क्षेत्र के बढ़ते विश्वास का प्रमाण है।
उत्कृष्टता को सम्मान: प्राध्यापक एवं कर्मचारी पुरस्कार-
स्थापना दिवस समारोह एक औपचारिक पुरस्कार समारोह के माध्यम से आईआईटी रोपड़ के प्राध्यापकों और कर्मचारियों के योगदान को सम्मानित करने का भी अवसर बना। इन पुरस्कारों के माध्यम से संस्थान ने यह संदेश दिया कि शैक्षणिक उत्कृष्टता की नींव उसके पूरे कार्यबल की मूक एवं अटल निष्ठा पर टिकी है।
छह छात्र स्टार्टअप्स को ₹1-1 लाख का बीज अनुदान-
शाम के सबसे उत्साहवर्धक क्षण में आईआईटी रोपड़ ने अपना छात्र उद्यमिता सहायता कार्यक्रम औपचारिक रूप से प्रारंभ किया और छह होनहार छात्र स्टार्टअप टीमों को ₹1,00,000 प्रति टीम के अनुसार बीज अनुदान प्रदान किया। इन उद्यमों ने विविध क्षेत्रों में अपनी उपस्थिति दर्ज कराई है, जो संस्थान की प्रतिभा की व्यापकता और युवा नवप्रवर्तकों द्वारा संबोधित की जा रही ज्वलंत समस्याओं को दर्शाते हैं।


