विश्व स्ट्रोक दिवस पर फेलिक्स हॉस्पिटल ने आयोजित की हेल्थ टॉक, फेसबुक लाइव से दी जागरूकता की जानकारी
न्यूरोलॉजिस्ट डॉ. मिथिलेश ने स्ट्रोक के लक्षण, कारण और समय पर उपचार के महत्व के बारे में बताया
ग्रेटर नोएडा के इमरजेंसी हेड डॉ. दानिश ने आपात स्थिति में मरीज को तत्काल चिकित्सा सहायता दिलाने की दी सलाह
नोएडा। विश्व स्ट्रोक दिवस के अवसर पर फेलिक्स हॉस्पिटल की ओर से स्ट्रोक के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए विशेष हेल्थ टॉक और सोशल मीडिया पर फेसबुक लाइव सत्र आयोजित किया गया। इस दौरान विशेषज्ञों ने स्ट्रोक के लक्षणों की पहचान, इसके प्रमुख कारणों, समय पर उपचार और बचाव के उपायों के बारे में जानकारी दी। विशेषज्ञों ने बताया कि स्ट्रोक एक गंभीर चिकित्सकीय आपात स्थिति है, जिसमें समय पर उपचार मिलने से मरीज की जान बचाने के साथ मस्तिष्क को होने वाली क्षति और स्थायी विकलांगता के जोखिम को भी कम किया जा सकता है।
नोएडा के सेक्टर-137 के फेलिक्स अस्पताल में हेल्थ टॉक के दौरान फेलिक्स हॉस्पिटल के कंसल्टेंट न्यूरोलॉजिस्ट डॉ. मिथिलेश ने स्ट्रोक के विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि मस्तिष्क तक रक्त और ऑक्सीजन की आपूर्ति बाधित होने पर स्ट्रोक की स्थिति पैदा होती है। यह समस्या मुख्य रूप से मस्तिष्क की रक्त वाहिका में खून का थक्का जमने या रक्त वाहिका के फटने के कारण होती है। दोनों ही स्थितियों में मरीज को तत्काल चिकित्सकीय सहायता की आवश्यकता होती है।
उपचार में देरी होने पर मस्तिष्क की कोशिकाओं को गंभीर नुकसान पहुंच सकता है। उन्होंने बताया कि स्ट्रोक के लक्षण अक्सर अचानक सामने आते हैं। चेहरे का एक तरफ झुक जाना, हाथ या पैर में अचानक कमजोरी अथवा सुन्नपन, बोलने या दूसरों की बात समझने में परेशानी, अचानक दिखाई देने में दिक्कत, चलने में संतुलन बिगड़ना और तेज सिरदर्द इसके प्रमुख लक्षण हो सकते हैं। ऐसे संकेतों को नजरअंदाज करना खतरनाक साबित हो सकता है। उन्होंने लोगों से अपील की कि यदि किसी व्यक्ति में इस तरह के लक्षण दिखाई दें तो घरेलू उपचार या लक्षणों के अपने आप ठीक होने का इंतजार करने के बजाय तत्काल अस्पताल पहुंचाएं।उन्होंने बताया कि स्ट्रोक के उपचार में समय की अहम भूमिका होती है।
अस्पताल में मरीज की स्थिति के अनुसार सीटी स्कैन या एमआरआई जैसी जांच की जाती हैं, ताकि स्ट्रोक के प्रकार का पता लगाकर उचित उपचार शुरू किया जा सके। कुछ मरीजों में रक्त का थक्का घोलने वाली दवा दी जा सकती है, जबकि उपयुक्त मामलों में थक्के को निकालने के लिए विशेष प्रक्रिया की आवश्यकता होती है। उपचार का निर्णय विशेषज्ञ डॉक्टर मरीज की स्थिति, जांच और लक्षण शुरू होने के समय के आधार पर लेते हैं।
वहीं ग्रेटर नोएडा में आयोजित हेल्थ टॉक के दौरान इमरजेंसी हेड डॉ. दानिश ने स्ट्रोक के मामलों में आपातकालीन चिकित्सा सहायता की भूमिका पर जानकारी दी। उन्होंने बताया कि स्ट्रोक के लक्षण दिखाई देने पर मरीज को जल्द से जल्द अस्पताल पहुंचाना चाहिए। परिजनों को लक्षण शुरू होने का समय नोट करना चाहिए और डॉक्टर को इसकी सही जानकारी देनी चाहिए।
मरीज को स्वयं वाहन चलाकर अस्पताल जाने देने के बजाय एंबुलेंस या अन्य सुरक्षित माध्यम से तत्काल चिकित्सा सहायता उपलब्ध करानी चाहिए। शुरुआती स्तर पर लक्षणों की पहचान और अस्पताल में समय पर जांच होने से उपचार की प्रक्रिया तेजी से शुरू करने में मदद मिलती है। इसलिए आम लोगों के लिए स्ट्रोक के चेतावनी संकेतों को समझना और आपात स्थिति में सही कदम उठाना बेहद जरूरी है।
फेसबुक लाइव सत्र के माध्यम से भी लोगों को स्ट्रोक के जोखिम कारकों और बचाव के उपायों के बारे में जागरूक किया गया। उन्होंने बताया कि अनियंत्रित रक्तचाप, मधुमेह, बढ़ा हुआ कोलेस्ट्रॉल, मोटापा, हृदय रोग, धूम्रपान, तंबाकू का सेवन और शारीरिक गतिविधियों की कमी स्ट्रोक का खतरा बढ़ा सकती है।
क्तचाप, ब्लड शुगर और कोलेस्ट्रॉल को नियंत्रित रखने, संतुलित आहार लेने, नियमित व्यायाम करने, वजन संतुलित रखने और धूम्रपान से दूर रहने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि नियमित स्वास्थ्य जांच और डॉक्टर की सलाह के अनुसार दवाओं का सेवन भी जरूरी है। विश्व स्ट्रोक दिवस पर आयोजित इस जागरूकता पहल के माध्यम से फेलिक्स हॉस्पिटल ने लोगों तक यह संदेश पहुंचाया कि स्ट्रोक के लक्षणों को पहचानना, समय पर अस्पताल पहुंचना और जोखिम कारकों को नियंत्रित रखना जीवन बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।


