ऑर्गन डोनेशन डे : एक डोनर कई लोगों को दे सकता है नया जीवन 

ऑर्गन डोनेशन डे : एक डोनर कई लोगों को दे सकता है नया जीवन 

नई दिल्ली/नोएडा: विश्व अंगदान दिवस के अवसर पर यथार्थ सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल्स के विशेषज्ञों ने लोगों से अंगदान का संकल्प लेने और अंग प्रत्यारोपण की बढ़ती मांग एवं उपलब्ध दाताओं के बीच मौजूद बड़े अंतर को कम करने में योगदान देने की अपील की। विशेषज्ञों ने बताया कि भारत में आज भी हजारों मरीज जीवनरक्षक अंग प्रत्यारोपण का इंतजार कर रहे हैं। ऐसे में अंगदान के प्रति जागरूकता बढ़ाना, सही जानकारी साझा करना और इससे जुड़े मिथकों को दूर करना समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि जीवित एवं मृतक, दोनों प्रकार के अंगदान सख्त चिकित्सीय, नैतिक और कानूनी प्रक्रियाओं के तहत किए जाते हैं, जिनमें दाता की गरिमा और सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता होती है तथा गंभीर अंग विफलता से जूझ रहे मरीजों को नया जीवन मिलने की उम्मीद मिलती है।

डॉ. प्रग्नेश देसाई, सीनियर डायरेक्टर एवं विभागाध्यक्ष – यूरोलॉजी, रीनल ट्रांसप्लांट, रोबोटिक्स एवं यूरो-ऑन्कोलॉजी, यथार्थ सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल, नोएडा एक्सटेंशन ने कहा, "अंगदान किसी व्यक्ति द्वारा दिया जाने वाला सबसे अनमोल उपहार है, जो अंतिम चरण की अंग विफलता से जूझ रहे मरीजों को नई उम्मीद और दूसरा जीवन प्रदान करता है। किडनी, लिवर, हृदय, फेफड़े, अग्न्याशय और आंत जैसे अंग कई लोगों की जान बचा सकते हैं, जबकि कॉर्निया, त्वचा, हड्डियां और हार्ट वाल्व जैसे ऊतक अनेक मरीजों के जीवन की गुणवत्ता में उल्लेखनीय सुधार ला सकते हैं। दुर्भाग्यवश, अंगों की मांग उनकी उपलब्धता से कहीं अधिक है। एक मृतक अंगदाता कई लोगों की जान बचाने के साथ-साथ ऊतक दान के माध्यम से अनेक अन्य लोगों को भी लाभ पहुंचा सकता है। अंगदान से जुड़े मिथकों को दूर करना भी बेहद जरूरी है। अंगदान केवल ब्रेन डेथ घोषित होने के बाद ही सख्त चिकित्सीय और कानूनी प्रक्रियाओं के तहत किया जाता है और डॉक्टरों की पहली प्राथमिकता हमेशा मरीज की जान बचाना होती है।

अंगदान के लिए कोई निश्चित अधिकतम आयु सीमा नहीं है। दान की उपयुक्तता व्यक्ति की उम्र नहीं, बल्कि उसके समग्र स्वास्थ्य पर निर्भर करती है। जीवित दाताओं की भी विस्तृत चिकित्सीय, मनोवैज्ञानिक और नैतिक जांच की जाती है ताकि उनकी सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके। नियमित फॉलो-अप, स्वस्थ जीवनशैली और समय-समय पर जांच के साथ किडनी दाता सामान्य और स्वस्थ जीवन जी सकते हैं। इस विश्व अंगदान दिवस पर आइए, अंगदान के प्रति जागरूकता बढ़ाएं, स्वयं अंगदान का संकल्प लें और अधिक से अधिक परिवारों को इस जीवनदायी पहल से जुड़ने के लिए के लिए प्रेरित करें।"

डॉ. मनोज गुप्ता, सीनियर डायरेक्टर एवं विभागाध्यक्ष – रोबोटिक एवं लैप्रोस्कोपिक जीआई सर्जरी, जीआई ऑन्कोलॉजी एवं लिवर ट्रांसप्लांट, यथार्थ सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल, ओमेगा-1, ग्रेटर नोएडा ने कहा, "अंगदान मानवता की सबसे महान सेवाओं में से एक है, जो अंतिम चरण की अंग विफलता से जूझ रहे मरीजों को नया जीवन प्रदान करता है। किडनी, लिवर, हृदय, फेफड़े, अग्न्याशय और आंत जैसे अंग जीवन बचाते हैं, जबकि कॉर्निया, त्वचा, हड्डियां और हार्ट वाल्व जैसे ऊतकों का दान कई लोगों के जीवन की गुणवत्ता में सुधार लाता है। चाहे जीवित दाता हों या मृतक, प्रत्येक अंगदाता समाज के लिए अमूल्य योगदान देता है। अंगदान को लेकर फैली भ्रांतियों को दूर करना आवश्यक है क्योंकि यही मिथक लोगों को इस नेक कार्य से पीछे हटाते हैं।

दाता की सुरक्षा, नैतिक प्रक्रियाएं और मरीज का हित हमेशा सर्वोच्च प्राथमिकता होती है। जीवित दाताओं की रक्त समूह संगतता, एचएलए टाइपिंग, क्रॉसमैच, किडनी या लिवर की कार्यक्षमता, वायरल स्क्रीनिंग, सीटी एंजियोग्राफी या लिवर वॉल्यूमेट्री सहित विस्तृत चिकित्सीय एवं मनोवैज्ञानिक जांच की जाती है। इन परीक्षणों से दाता और प्राप्तकर्ता दोनों की सुरक्षा सुनिश्चित होती है। अधिकांश दाता स्वस्थ जीवनशैली और नियमित फॉलो-अप के साथ सामान्य एवं सक्रिय जीवन जीते हैं। जागरूकता और सही जानकारी ही अंगदान की आवश्यकता और उपलब्धता के बीच की दूरी को कम कर सकती है।"

डॉ. रोहन, सीनियर कंसल्टेंट – नेफ्रोलॉजी, यथार्थ सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल, सेक्टर-110, नोएडा ने कहा, "अंगदान सबसे सार्थक मानवीय उपहारों में से एक है, जो कई लोगों का जीवन बचाने या बेहतर बनाने की क्षमता रखता है। किडनी, लिवर, हृदय, फेफड़े, अग्न्याशय और छोटी आंत के साथ-साथ कॉर्निया, त्वचा, हड्डियां, हार्ट वाल्व, टेंडन और रक्त वाहिकाओं का प्रत्यारोपण भी मरीजों को नया जीवन देता है। जीवित और मृतक दोनों प्रकार का अंगदान समान रूप से महत्वपूर्ण हैं। स्वस्थ व्यक्ति विस्तृत चिकित्सीय जांच के बाद सुरक्षित रूप से एक किडनी या लिवर का हिस्सा दान कर सकता है, जबकि एक मृतक अंगदाता कई लोगों की जान बचा सकता है।

अभी भी कई मिथक लोगों को अंगदान से दूर रखते हैं। जबकि सही चयनित दाता एक किडनी या लिवर का हिस्सा दान करने के बाद भी सामान्य और सक्रिय जीवन जी सकते हैं। कुछ मामलों में अलग रक्त समूह होने पर भी सफल प्रत्यारोपण संभव है। प्रत्येक संभावित दाता की विस्तृत चिकित्सीय, प्रयोगशाला और इमेजिंग जांच की जाती है। किडनी दान के बाद पर्याप्त पानी पीना, स्वस्थ जीवनशैली अपनाना, नियमित व्यायाम और समय-समय पर जांच करवाना दीर्घकालिक स्वास्थ्य बनाए रखने में मदद करता है।"

डॉ. बी. एस. सोलंकी, डीएम (नेफ्रोलॉजी), यथार्थ सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल, मॉडल टाउन, दिल्ली ने कहा, "अंगदान एक जीवन का अंत नहीं, बल्कि कई नए जीवन की शुरुआत है। किसी को दूसरा जीवन देना मानवता का सबसे बड़ा कार्य है। भारत में हर वर्ष दो लाख से अधिक लोगों को किडनी प्रत्यारोपण की आवश्यकता होती है, लेकिन केवल लगभग 10 हजार मरीजों को ही प्रत्यारोपण मिल पाता है। यह अंतर मृतक अंगदान की आवश्यकता को स्पष्ट करता है। एक मृतक अंगदाता आठ लोगों की जान बचा सकता है और ऊतक दान के माध्यम से लगभग 50 लोगों के जीवन को बेहतर बना सकता है।

क्रॉनिक किडनी रोग से पीड़ित मरीजों के लिए प्रत्यारोपण डायलिसिस की तुलना में बेहतर जीवन और अधिक स्वतंत्रता प्रदान करता है। स्वस्थ व्यक्ति एक किडनी दान करने के बाद भी सामान्य जीवन जी सकता है। अंगदान को लेकर फैले मिथकों को दूर करना आवश्यक है। डॉक्टर हमेशा मरीज की जान बचाने को प्राथमिकता देते हैं और कानूनी रूप से मृत्यु की पुष्टि होने के बाद ही अंग निकाले जाते हैं। अस्पताल की ओपीडी में विशेषज्ञों से परामर्श लेकर अंगदान की प्रक्रिया को समझें और स्वयं अंगदान का संकल्प लें। प्रत्येक दान किया गया अंग किसी मरीज के लिए नई उम्मीद, किसी परिवार के लिए नई शुरुआत और मानवता के लिए एक अमूल्य विरासत है।"