शारदाकेयर हेल्थसिटी ने ग्रेटर नोएडा में ‘फ़्री मदर एंड चाइल्ड हेल्थ चेक-अप कैंप’ का हुआ आयोजन
इस कैंप में पीडियाट्रिक, गायनेकोलॉजी, फर्टिलिटी और गर्भावस्था की देखभाल से सम्बंधित एक्सपर्ट्स ने महिलाओं को कंसल्टेशन प्रदान किया। साथ ही फर्टिलिटी की जांच और सर्वाइकल कैंसर से जुड़ी सेवाओं पर स्पेशल ऑफ़र भी दिए गए, कैंप में 200 से ज़्यादा मरीज़ों ने हिस्सा लिया
ग्रेटर नोएडा: शारदाकेयर हेल्थसिटी ने ग्रेटर नोएडा में अपने हॉस्पिटल परिसर में माँ और बच्चे के लिए एक मुफ़्त हेल्थ चेक-अप कैंप आयोजित किया। इस कैंप में पीडियाट्रिक्स, नियोनेटोलॉजी, ऑब्सटेट्रिक्स, गायनेकोलॉजी और IVF के विशेषज्ञ शामिल हुए। इस पहल का उद्देश्य महिलाओं और बच्चों की प्रिवेंटिव हेल्थकेयर पर ध्यान देना था, साथ ही परिवारों को स्वास्थ्य से जुड़ी कई तरह की समस्याओं के लिए विशेषज्ञों से सलाह लेने का मौका भी देना था।
निःशुल्क मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य जांच कैम्प में निःशुल्क स्पेशलिस्ट कंसल्टेशन और जांच के साथ-साथ महिला एवं पुरुष प्रजनन क्षमता और सर्वाइकल कैंसर से संबंधित समस्याओं पर विशेष छूट प्रदान की गई। महिलाओं ने मासिक धर्म और हार्मोनल समस्याओं, गर्भावस्था संबंधी समस्याओं और स्त्री रोग संबंधी बीमारियों के लिए विशेषज्ञों से सलाह-मशविरा लिया। दंपतियों ने प्रजनन संबंधी चिंताओं पर चर्चा की और माता-पिता ने शिशु एवं नवजात शिशु के स्वास्थ्य के लिए पीडियाट्रिक विशेषज्ञों से कंसल्ट किया।
बच्चों की सेहत पर नज़र रखने की अहमियत के बारे में बात करते हुए, शारदाकेयर हेल्थसिटी के पीडियाट्रिक्स और नियोनेटोलॉजी विभाग के डायरेक्टर डॉ. (प्रो.) ब्रिगेडियर अशोक सक्सेना ने कहा, "बच्चे की सेहत के लिए सिर्फ़ बीमारी का इलाज ही काफ़ी नहीं होता है, बल्कि और भी बातों पर ध्यान देना ज़रूरी है। बच्चे के शारीरिक विकास, पोषण और टीकाकरण पर लगातार नज़र रखने से माता-पिता को शुरुआती स्टेज में ही किसी भी समस्या का पता चल सकता है। खाने-पीने में परेशानी, बार-बार संक्रमण, सांस लेने में परेशानी या विकास में देरी जैसी समस्याओं को नज़रअंदाज़ करने के बजाय पीडियाट्रिशियन से कंसल्ट करना चाहिए।"
महिलाओं की सामान्य गायनेकोलॉजिकल समस्याओं पर बात करते हुए शारदाकेयर हेल्थसिटी में ऑब्सटेट्रिक्स और गायनेकोलॉजी की डायरेक्टर डॉ. (प्रो.) रुचि श्रीवास्तव ने कहा, "लगातार पेल्विक पेन यानी पेट के निचले हिस्से में दर्द, असामान्य ब्लीडिंग या पीरियड्स के पैटर्न में बड़े बदलावों को सामान्य नहीं समझना चाहिए। कैंप के दौरान PCOS एक आम समस्या के तौर पर सामने आया। हमसे सलाह लेने वाली लगभग 40% महिलाओं में इस स्थिति के लक्षण दिखे। कई महिलाओं ने अनियमित पीरियड्स, हार्मोनल समस्याओं और गर्भधारण में कठिनाई के बारे में भी सलाह ली। महिलाओं की इस प्रतिक्रिया से यह बात साफ हुई कि जब ऐसे लक्षण लगातार बने रहें, तो महिलाओं को उन्हें अपनी दिनचर्या का सामान्य हिस्सा मानने के बजाय डॉक्टर से जांच करवानी चाहिए।"
इस कैंप में इस बात पर भी ज़ोर दिया गया कि जब किसी दंपत्ति को गर्भधारण करने में परेशानी हो तो दोनों लोगों की जांच करानी चाहिए। शारदाकेयर हेल्थसिटी में इन विट्रो फर्टिलाइज़ेशन (IVF) के डायरेक्टर डॉ. तरंग यादव ने कहा, "इनफर्टिलिटी (बांझपन) की समस्या महिलाओं, पुरुषों या दोनों से जुड़े कारणों की वजह से हो सकती है। कैंप के दौरान हमसे सलाह लेने वाले करीब 30% दंपत्ति ने गर्भधारण में हो रही परेशानी के बारे में पूछा। इससे पता चलता है कि गर्भधारण से जुड़ी समस्याएं सलाह लेने की एक बड़ी वजह हैं। कई मरीज PCOS, पीरियड्स से जुड़ी समस्याओं और हार्मोनल गड़बड़ी की शिकायत लेकर भी आए। इन बातचीत से यह साफ हुआ कि गर्भधारण में परेशानी का सही कारण जानने और आगे का सही इलाज तय करने के लिए पति-पत्नी दोनों की जांच करना जरूरी है।"
शारदाकेयर हेल्थसिटी में ऑब्सटेट्रिक्स और गायनेकोलॉजी की सीनियर कंसल्टेंट डॉ. (प्रो.) नीरजा गोयल ने महिलाओं के जीवन के अलग-अलग पड़ावों पर उनकी सेहत से जुड़ी ज़रूरतों पर बात करते हुए कहा, "महिलाएं अक्सर परिवार और काम की ज़िम्मेदारियों को संभालने के चक्कर में अपनी सेहत की समस्याओं पर ज्यादा ध्यान नहीं देती हैं। पीरियड्स से जुड़ी लगातार समस्याएं, फर्टिलिटी से जुड़ी चिंताएं, हार्मोनल बदलाव और मेनोपॉज़ से जुड़े लक्षणों पर सही मेडिकल ध्यान दिया जाना चाहिए। रेगुलर कंसल्टेशन से महिलाओं को अपनी सेहत की ज़रूरतों को समझने और समस्याओं के गंभीर होने से पहले ही उनका समाधान करने में मदद मिल सकती है।"
कैंप का एक और महत्वपूर्ण हिस्सा गर्भावस्था के दौरान देखभाल से सम्बंधित सलाह थी। शारदाकेयर हेल्थसिटी में ऑब्सटेट्रिक्स और गायनेकोलॉजी की सीनियर कंसल्टेंट डॉ. खुशबू सक्सेना ने कहा, "माँ और बच्चे की सेहत पर नज़र रखने के लिए गर्भावस्था के दौरान नियमित जाँच ज़रूरी है, खासकर तब जब महिला को पहले से कोई बीमारी हो या कोई और खतरा हो। गर्भावस्था से पहले की काउंसलिंग से भी गर्भावस्था से जुड़ी चिंताओं का पता लगाने और सही योजना और देखभाल में मदद मिल सकती है।"
इस बारे में शारदाकेयर हेल्थसिटी की कंसल्टेंट (ऑब्स्टेट्रिक्स और गायनेकोलॉजी) डॉ. लिपि शर्मा ने कहा, "पीरियड्स का अनियमित होना, बहुत ज़्यादा ब्लीडिंग या मासिक धर्म और हार्मोन से जुड़े दूसरे लक्षण महिला की जीवन की गुणवत्ता पर असर डाल सकते हैं। अगर ये लक्षण बने रहते हैं, तो इन्हें नज़रअंदाज़ नहीं करना चाहिए। इसी तरह जिन दम्पत्तियों को गर्भधारण करने में परेशानी हो रही है, उन्हें जांच में देरी करने के बजाय डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए।"
‘फ़्री मदर एंड चाइल्ड हेल्थ चेक-अप कैंप’ शारदाकेयर हेल्थसिटी की कम्युनिटी आउटरीच पहल का हिस्सा था। कैंप का उद्देश्य लोगों को विशेषज्ञ डॉक्टरों से सलाह लेने की सुविधा देना और बीमारियों से बचाव के प्रति जागरूक करना था। ऐसी पहलों के माध्यम से हॉस्पिटल महिलाओं, बच्चों और परिवारों की स्वास्थ्य संबंधी जरूरतों को समझने और उन्हें सही स्वास्थ्य सलाह उपलब्ध कराने के लिए लगातार समुदाय के साथ जुड़ रहा है।


