सामग्री और उपकरणों में नवीनतम प्रवृत्तियां पर 7वें अंर्तराष्ट्रीय सम्मेलन का हुआ आयोजन

सामग्री और उपकरणों में नवीनतम प्रवृत्तियां पर 7वें अंर्तराष्ट्रीय सम्मेलन का हुआ आयोजन

शिक्षाविदों, वैज्ञानिकों, शोधकर्ताओं और उद्योग पेशेवरों को एक मंच पर लाकर और सामग्री और उपकरणों में नवीनतम प्रवृत्तिया की जानकारी प्रदान करनें और समकालीन वैश्विक चुनौतियों से निपटने के लिए स्थायी सहयोग को बढ़ावा देने हेतु एमिटी विश्वविद्यालय के एमिटी इंस्टीटयूट ऑफ एप्लाइड सांइसेस द्वारा 7वें अंर्तराष्ट्रीय सम्मेलन ‘‘ आईसीआरटीएमडी 2026’’ का आयोजन किया गया। इस दो दिवसीय सम्मेलन का शुभारंभ डीआरडीओं के मानव संसाधन और संसाधन प्रबंधन के महानिदेशक डा मयंक द्विवेदी, एमिटी शिक्षण समूह के संस्थापक अध्यक्ष डा अशोक कुमार चौहान, भारत सरकार की विज्ञान एंव प्रौद्योगिकी विभाग के अनुसंधान और विकास अवसंरचना विभाग की प्रमुख डा प्रतिष्ठा पांडे, एमिटी विश्वविद्यालय की वाइस चांसलर डा बलविंदर शुक्ला, एमिटी साइंस टेक्नोलॉजी एंड इनोवेशन फांउडेशन के अध्यक्ष डा डब्लू सेल्वामूर्ती और एमिटी विश्वविद्यालय की विज्ञान और प्रौद्योगिकी की डीन डा सुनिता रतन द्वारा किया गया।

 डीआरडीओं के मानव संसाधन और संसाधन प्रबंधन के महानिदेशक डा मयंक द्विवेदी, ने सम्मेलन का शुभारंभ करते हुए कहा कि सामग्री या मैटेरियल सबसे अधिक महत्वूपर्ण है क्योकी किसी भी विचार को मूर्त रूप देने या उत्पाद में परिवर्तीत करने के लिए सामग्री का होना आवश्यक है। ऑपरेशन सिंदुर में डीआरडीओ की भारतीय तकनीकों का उपयोग किया गया जिसमें आकाश और ब्रहमोस मिसाइल सहित ड्रोन भी शामिल थे जिसने सारे विश्व में हमारी शक्ति को दिखा दिया। साइबर सुरक्षा, सैटेलाइट इमेजिंग और कम लागत वाली तकनीकी का असरदार तरीके से इस्तेमाल किया गया। डीआरडीओ शिक्षण संस्थानों के साथ मिलकर काम करता है, और 2,500 लीडिंग इंडस्ट्रीज़ डीआरडीओ के साथ काम कर रही हैं, जो समावेशी विकास में योगदान दे रही हैं।

आज एआई हर क्षेत्र में बहुत ज़रूरी भूमिका निभा रहा है और एआई के इस्तेमाल के बिना मटेरियल विकसित नहीं किए जा सकते। अगर हम सब मिलकर काम करें, तो हम 2047 से पहले विकसित भारत का लक्ष्य हासिल कर सकते हैं।एमिटी शिक्षण समूह के संस्थापक अध्यक्ष डा अशोक कुमार चौहान ने संबोधित करते हुए कहा कि विज्ञान, अनुसंधान और नवाचार किसी भी देश के विकास का आधार होते हैं, और इन्हीं क्षेत्रों पर ध्यान केन्द्रीत करके कोई भी देश वैश्विक महाशक्ति बन सकता है। छात्र भविष्य के नेता हैं, जिन पर भारत को दुनिया का सबसे विकसित देश बनाने की बहुत बड़ी ज़िम्मेदारी है। एमिटी देश के युवाओं को आगे बढ़ाने और उन्हें भविष्य के लिए तैयार करने के लिए समर्पित है, ताकि वे विकसित भारत 2047 में बड़ा योगदान दे सकें।

भारत सरकार की विज्ञान एंव प्रौद्योगिकी विभाग के अनुसंधान और विकास अवसंरचना विभाग की प्रमुख डा प्रतिष्ठा पांडे ने कहा कि यह सम्मेलन युवा शोधार्थियों के लिए बहुत ज़रूरी है क्योंकि उन्हें सामग्री और नई तकनीक में हाल के उन्नती के बारे में जानकारी मिलेगी। भारत का रिसर्च आउटपुट बढ़ा है, और यह रिसर्च पब्लिकेशन में नंबर 3 पर आ गया है। ग्लोबल इनोवेशन इंडेक्स आज 35वें स्थान पर है, और विज्ञान और प्रौद्योगिकी डोमेन में अलग-अलग क्षेत्रों में महिलाओं की भागीदारी बढ़ी है। सरकार ने अनुसंधान इकोसिस्टम को बड़ा बढ़ावा देने का आदेश दिया है और डीएसटी ने इस मकसद को हासिल करने के लिए एफआईएसटी, पीयूआरएसई, साथी, और दूसरे कई प्रोग्राम शुरू किए हैं। ये प्रोग्राम रिसर्च इंफ्रास्ट्रक्चर बनाने और यूनिवर्सिटीज़ और संगठनों को फंडिंग देने में मदद करते हैं। इसके अलावा, साइंटिफिक कम्युनिटीज़ के लिए 38 सुपरकंप्यूटर लगाए गए हैं ताकि उन्हें सभी तरह की वित्तीय और इंफ्रास्ट्रक्चर सहायता मिल सके।

एमिटी विश्वविद्यालय की वाइस चांसलर डा बलविंदर शुक्ला ने कहा कि  एमिटी विश्वविद्यालय भविष्य के युवा नेतृत्वतकर्ताओ को सीखने के मौके देकर उनका विकास करने के लिए प्रतिबद्ध है, जो उनके करियर में आगे बढ़ने में मददगार होंगे। यह सम्मेलन छात्रों में जिज्ञासा जगाएगी, नए विचारों को प्रेरित करेगी, और भविष्य के अवसरों के दरवाज़े खोलेगी।

एमिटी विश्वविद्यालय की विज्ञान और प्रौद्योगिकी की डीन डा सुनिता रतन ने कहा कि इस दो दिविसीय सम्मेलन में आईआईटी, सीएसआईआर, डीआरडीओ, बीआरआरसी, सीएसआईआर, डीएसटी सहित दिल्ली यूनिवर्सिटी, जामिया मिलिया इस्लामिया, बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी, रमन रिसर्च इंस्टीट्यूट, एनआईटी और कई सेंट्रल विश्वविद्यालय जैसे प्रमुख राष्ट्रीय संस्थानों के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। इसके अलावा, जापान, दक्षिण कोरिया, यूनाइटेड किंगडम, चीन, जर्मनी, रूस, मलेशिया, वगैरह सहित दस से ज़ज्यादा देशों के इंटरनेशनर्ल की भागीदारी ने इस कॉन्फ्रेंस को अपने दायरे और असर के मामले में सच में ग्लोबल बना दिया है।

इस अवसर पर एमिटी विश्वविद्यालय के एडिशनल प्रो वाइस चांसलर डा चंद्रदीप टंडन ने भी अपने विचार रखे। इस दो दिवसीय सम्मेलन में ‘‘फिजिकल एंड केमिकल साइंसेज’’, मैथमेटिकल साइंस एंड स्टैटिस्टिक्स पर तकनीकी सत्र, और हाइड्रोजन को फ्यूल के तौर पर इस्तेमाल करने की दिशा में - जेनरेशन, स्टोरेज और यूटिलाइजेशन, स्पिनट्रॉनिक्स और स्पिन-ऑर्बिट्रॉनिक्स जैसे विषयों पर सत्रों का आयोजन किया जायेगा।