कुत्तों के हमलों पर अंकुश लगाने के लिए प्रशासन जवाबदेही तय करे : अधिवक्ता रणपाल अवाना
नोएडा। शहर एवं आसपास के क्षेत्रों में आवारा कुत्तों के हमलों से नागरिकों, विशेषकर बच्चों और बुजुर्गों की सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता व्यक्त करते हुए अधिवक्ता रणपाल अवाना ने संबंधित प्रशासन एवं स्थानीय निकायों से प्रभावी और समयबद्ध कार्रवाई की मांग की है।
उन्होंने कहा कि सार्वजनिक स्थानों पर नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना प्रशासन की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है। आवारा कुत्तों के प्रबंधन, नसबंदी, एंटी-रेबीज टीकाकरण तथा शिकायतों पर त्वरित कार्रवाई के लिए संबंधित विभागों को अपनी जिम्मेदारियों का प्रभावी ढंग से निर्वहन करना चाहिए।
अधिवक्ता अवाना ने कहा कि संविधान के अनुच्छेद 21 के अंतर्गत जीवन एवं व्यक्तिगत स्वतंत्रता का संरक्षण अत्यंत महत्वपूर्ण है। पशु जन्म नियंत्रण नियम, 2023 (Animal Birth Control Rules, 2023) के अनुरूप आवारा कुत्तों के प्रबंधन की व्यवस्था को प्रभावी बनाया जाना चाहिए। सुप्रीम कोर्ट ने भी 19 मई 2026 के अपने निर्णय में स्पष्ट किया है कि अनुच्छेद 21 के अंतर्गत नागरिकों को सार्वजनिक स्थानों पर बिना भय के आवागमन का अधिकार है, तथा पशु जन्म नियंत्रण नियमों के कमज़ोर और असमान क्रियान्वयन को इस समस्या का प्रमुख कारण माना है।
न्यायालय ने स्कूल, अस्पताल, बस अड्डे, रेलवे स्टेशन जैसे संस्थागत एवं सार्वजनिक परिसरों से आवारा कुत्तों को हटाने संबंधी अपने निर्देशों को भी यथावत रखा है। उन्होंने प्रशासन से मांग की कि प्रभावित क्षेत्रों की पहचान कर नियमित निगरानी की जाए, कुत्तों के काटने की घटनाओं की शिकायतों पर तत्काल कार्रवाई हो, अस्पतालों में रेबीज से बचाव के लिए आवश्यक उपचार उपलब्ध कराया जाए तथा लापरवाही पाए जाने पर नियमानुसार जवाबदेही निर्धारित की जाए। उन्होंने कहा कि इस विषय पर कार्रवाई का उद्देश्य किसी के प्रति दुर्भावना रखना नहीं, बल्कि नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना और पशु कल्याण से संबंधित कानूनों का पालन करते हुए समस्या का स्थायी समाधान करना होना चाहिए।


