पॉश एक्ट के नाम पर हो रही खानापूर्ति, कागज़ों तक सीमित है अनुपालन : अधिवक्ता रणपाल अवाना

पॉश एक्ट के नाम पर हो रही खानापूर्ति, कागज़ों तक सीमित है अनुपालन : अधिवक्ता रणपाल अवाना

नोएडा। कार्यस्थल पर महिलाओं का लैंगिक उत्पीड़न (निवारण, प्रतिषेध और प्रतितोष) अधिनियम, 2013 (POSH Act) के अनुपालन को लेकर गंभीर चिंता व्यक्त करते हुए कानूनी विकास मंच के अध्यक्ष एवं अधिवक्ता रणपाल अवाना ने कहा है कि नोएडा एवं आसपास के क्षेत्रों में अनेक संस्थानों द्वारा इस कानून का पालन केवल औपचारिकता बनकर रह गया है। उन्होंने कहा कि कई कंपनियों और संस्थानों में केवल रजिस्टर में कर्मचारियों के हस्ताक्षर कराकर तथा जिलाधिकारी कार्यालय में वार्षिक रिपोर्ट जमा कराकर अनुपालन पूरा मान लिया जा रहा है, जबकि वास्तविकता में कर्मचारियों के लिए न तो नियमित प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं और न ही जागरूकता शिविर। परिणामस्वरूप अनेक महिला कर्मचारियों को यह जानकारी ही नहीं होती कि उत्पीड़न की स्थिति में शिकायत कहाँ और कैसे की जाए।

अधिवक्ता अवाना ने बताया कि अधिनियम की धारा 4 के अंतर्गत 10 या अधिक कर्मचारियों वाले प्रत्येक कार्यस्थल पर आंतरिक समिति (Internal Committee) का गठन अनिवार्य है। धारा 19 के अंतर्गत नियोक्ता का दायित्व है कि वह कर्मचारियों को अधिनियम के प्रावधानों के प्रति जागरूक करने हेतु नियमित अंतराल पर कार्यशालाएं एवं जागरूकता कार्यक्रम आयोजित करे, आंतरिक समिति के सदस्यों के लिए उन्मुखीकरण कार्यक्रम चलाए तथा कार्यस्थल पर लैंगिक उत्पीड़न के दंडात्मक परिणामों और समिति के गठन की सूचना प्रमुख स्थान पर प्रदर्शित करे।

अधिनियम के उल्लंघन पर धारा 26 के अंतर्गत ₹50,000 तक का जुर्माना तथा पुनरावृत्ति की दशा में दोगुना दंड एवं व्यवसाय का लाइसेंस/पंजीकरण रद्द किए जाने तक का प्रावधान है।
उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट भी समय-समय पर पॉश एक्ट के प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर चिंता व्यक्त कर चुका है और सभी संस्थानों में आंतरिक समितियों के समुचित गठन एवं कार्य सुनिश्चित करने के निर्देश दे चुका है। उन्होंने जिला प्रशासन से मांग की कि:
• संस्थानों द्वारा जमा की जा रही वार्षिक रिपोर्टों की वास्तविक जांच की जाए, केवल कागज़ी रिपोर्ट को अनुपालन न माना जाए;
• प्रशिक्षण एवं जागरूकता कार्यक्रमों के आयोजन के प्रमाण (तिथि, उपस्थिति, प्रशिक्षक का विवरण) मांगे जाएं तथा औचक निरीक्षण किए जाएं;
• स्थानीय समिति (Local Committee) को सक्रिय कर असंगठित क्षेत्र की महिलाओं तक भी जानकारी पहुँचाई जाए;
• अनुपालन न करने वाले संस्थानों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जाए।
अधिवक्ता अवाना ने कहा कि पॉश एक्ट का उद्देश्य महिलाओं को सुरक्षित, सम्मानजनक एवं भयमुक्त कार्य वातावरण उपलब्ध कराना है, और यह उद्देश्य तभी पूरा होगा जब इसका पालन रजिस्टर से निकलकर ज़मीन पर दिखाई दे।