विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस : तनाव से ठहराव की ओर, लोगों को मिले तनावमुक्त जीवन
महर्षि यूनिवर्सिटी में विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस पर सेमिनार, कॉर्पोरेट जगत और आम लोगों के मानसिक स्वास्थ्य पर हुई चर्चा
नोएडा। आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में काम का दबाव, जिम्मेदारियां और समय की कमी लोगों के तनाव को बढ़ा रही हैं। इसका असर मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य पर भी पड़ रहा है। ऐसे में लोगों को तनाव से राहत दिलाने और मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूक करने के उद्देश्य से स्पिरिचुअल रीजेनेरेशन मूवमेंट फाउंडेशन ऑफ इंडिया और महर्षि यूनिवर्सिटी ऑफ इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी, नोएडा ने ‘तनाव से ठहराव की ओर’ पहल की शुरुआत की है। इसके तहत कॉर्पोरेट जगत से जुड़े लोगों के साथ-साथ आम जीवन में व्यस्त और तनाव का सामना कर रहे लोगों को भावातीत ध्यान के बारे में जानकारी दी। इसका उद्देश्य लोगों को अपने व्यस्त जीवन में मानसिक शांति, भावनात्मक संतुलन और स्वस्थ दिनचर्या के महत्व को समझने के लिए प्रेरित करना रहा।

विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस के अवसर पर शनिवार को महर्षि यूनिवर्सिटी के सेक्टर-110 स्थित कैंपस में ‘तनाव से शांति की ओर’ : मानसिक स्वास्थ्य की यात्रा’ विषय पर सेमिनार आयोजित किया गया। इसमें मनोवैज्ञानिकों, डॉक्टरों, ध्यान शिक्षकों और कॉर्पोरेट क्षेत्र के विशेषज्ञों ने मानसिक स्वास्थ्य, तनाव के कारणों और उनसे निपटने के व्यावहारिक तरीकों पर चर्चा की।
मानसिक परेशानी होने पर मदद लेने में न करें संकोच
कनेक्टेड माइंड्स की वेल-बीइंग विशेषज्ञ ऋतु भारद्वाज ने मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े सामाजिक संकोच को दूर करने की जरूरत बताई। उन्होंने कहा कि मानसिक परेशानियों पर खुलकर बात करना जरूरी है, ताकि लोग बिना झिझक अपनी समस्या साझा कर सकें और जरूरत पड़ने पर मदद ले सकें।

टाइम्स ग्रुप के हर्षवर्धन शर्मा ने कामकाज के दौरान बढ़ते तनाव और उसके प्रभावों पर अपने विचार रखे। उन्होंने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि भावातीत ध्यान ने उनके जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने में मदद की। उन्होंने व्यस्त दिनचर्या के बीच मानसिक संतुलन बनाए रखने की जरूरत पर भी जोर दिया।
ऑल इंडिया इंस्टीट्यूट ऑफ आयुर्वेद के सहायक प्रोफेसर डॉ. भारत कृष्ण खुंटिया ने आयुर्वेद के नजरिये से स्वास्थ्य को समझाया। उन्होंने अच्छी नींद, संतुलित दिनचर्या और समग्र स्वास्थ्य के महत्व पर प्रकाश डाला। वहीं, भावातीत ध्यान की इंडिया हेड और भावातीत ध्यान शिक्षिका अदिति श्रीवास्तव ने भावातीत ध्यान को तनाव प्रबंधन के एक व्यावहारिक तरीके के रूप में प्रस्तुत किया और इस विषय पर हुए शोध का उल्लेख किया।
व्यस्त जीवन में भी जरूरी है मानसिक शांति
कार्यक्रम में सुश्री वान्या आर्या और डॉ. प्रद्युम्न पांडे विशिष्ट अतिथि के रूप में शामिल हुए। महर्षि यूनिवर्सिटी के कुलाधिपति अजय प्रकाश श्रीवास्तव ने भी कार्यक्रम में पहुंचकर लोगों को संबोधित किया और बताया कि कैसे 70 के दशक से महर्षि महेश योगी जी ने भवातीत ध्यान के ज़रिए लोगों को तनाव मुक्त जीवन जीने का संदेश दिया।
सेमिनार में विशेषज्ञों के साथ प्रश्नोत्तर सत्र भी आयोजित किया गया। इसमें प्रतिभागियों ने मानसिक स्वास्थ्य, तनाव और भावनात्मक संतुलन से जुड़े सवाल पूछे। श्री निश्चल महाजन ने ‘स्व’ से जुड़ी एक विशेष गतिविधि का संचालन किया, जिसके माध्यम से प्रतिभागियों को आत्मचिंतन का अवसर मिला।
आयोजकों के अनुसार, ‘तनाव से ठहराव की ओर’ पहल का उद्देश्य केवल कॉर्पोरेट जगत तक सीमित नहीं है। इसके माध्यम से उन सभी लोगों तक पहुंचने का प्रयास किया जाएगा, जो कामकाज, पारिवारिक जिम्मेदारियों या रोजमर्रा की भागदौड़ के कारण तनाव का सामना कर रहे हैं। इस पहल में कॉर्पोरेट संस्थानों के साथ मिलकर लोगों को मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूक करने और भावातीत ध्यान के बारे में जानकारी देने पर जोर रहेगा।
महर्षि महेश योगी की शिक्षाओं से प्रेरित इस आयोजन में आंतरिक शांति और जागरूकता के महत्व को भी समझाया गया। विशेषज्ञों ने कहा कि तनाव प्रबंधन के साथ स्वस्थ आदतें अपनाना जरूरी है। वहीं, मानसिक स्वास्थ्य संबंधी गंभीर समस्याओं में योग्य मनोवैज्ञानिक या चिकित्सक की मदद लेना भी आवश्यक है।
इस कार्यक्रम में यूनिवर्सिटी के नोएडा कैंपस की डीन एकेडेमिक्स तृप्ति अग्रवाल, समेत सभी विभागों के डीन, डिप्टी डीन, फैकल्टी और स्टाफ उपस्थित रहे, कार्यक्रम का संदेश स्पष्ट रहा कि मानसिक स्वास्थ्य की देखभाल के लिए अपनी व्यस्त दिनचर्या में भी समय निकालना जरूरी है। ‘तनाव से ठहराव की ओर’ पहल इसी सोच के साथ लोगों को तनाव के बीच संतुलन बनाने और बेहतर जीवन की दिशा में कदम बढ़ाने के लिए प्रेरित करेगी।


