डिवाइन वर्ल्ड मिशन द्वारा तीन दिवसीय निशुल्क योग शिविर का हुआ शुभारंभ
बीमार पड़ने के अन्य कारणों में जल, वायु और भोजन का ठीक तरीके से न लेना भी है अर्थात जल, वायु, भोजन और लाइफ फ़ोर्स एनर्जी (संजीवनी शक्ति) का असंतुलन किसी भी जीवित प्राणी के बीमार होने का मुख्य कारण होता है।
नोएडा।PNI News। आधुनिक व्यस्तता भरी ज़िंदगी की भाग-दौड़ ,पश्चिमी सभ्यता का अंधानुकरण और वैज्ञानिक प्रगति की चकाचौंध में आज का समाज अपनी सांस्कृतिक विरासत से बहुत दूर होता जा रहा है और उपरोक्त के कारण विभिन्न प्रकार के रोग, कठिनाइयों और दैनिक सांसारिक समस्याओं से घिरता जा रहा है। परिणाम स्वरूप टूटते रिश्ते बिखरते परिवार, अवसाद, असंतोष एवं विभिन्न प्रकार की बीमारियों से हम घिरते जा रहे है ।
इन सारी समस्याओं का हल हमारी सांस्कृतिक विरासत अध्यात्म में है परंतु दुःख की बात है की इसके जो भी सच्चे जानकर थे ,वो धीरे धीरे लुप्त होते गए और जो तथाकथित आध्यात्मिक ठेकेदार है वो इस जनकल्याण की विधा को एक व्यवसाय का स्वरूप दे चुके है।
गुरु डॉक्टर जी पी शाही पेशे से आधुनिक चिकित्सा विज्ञान से जुड़े हुए है और सरकारी चिकित्सा सेवा में हृदय रोग विशेषज्ञ थे एवं विश्व बैंक में विभिन्न पदों पर कार्यरत रहते हुए आध्यात्मिक जगत में सृष्टि के प्रथम गुरु भगवान दत्तात्रेय के आशीर्वाद के साथ-साथ परम पूज्य महावतार बाबाजी एवं पूज्य नित्यानंद बाबा जी की कृपा व अनुकम्पा से प्रसादस्वरूप अनेकानेक सिद्धियां भी प्राप्त की हैं। गुरु डॉक्टर जी पी शाही ने इस पुरातन आध्यात्मिक परम्परा का वैज्ञानिक अध्ययन एवं देश विदेश की विभिन्न प्रयोगशालाओं में शोध द्वारा प्रामाणिकता सिद्ध करते हुए इस विद्या को जन जन तक पूर्णतया अनकण्डिशनल एवं निशुल्क पहुँचाने के संकल्प लिया है और इस संकल्प को दिशा देने के उद्देश्य से विगत चार वर्ष पूर्व " डिवाइन वर्ल्ड मिशन " नाम की संस्था की नींव रखी। विगत चार वर्षों में "डिवाइन वर्ल्ड मिशन " के तत्वावधान में देश के विभिन्न शहरों में लगभग 80 से अधिक बेसिक एवं एडवाँस कोर्स के निःशुल्क शिविरों का सफलतापूर्वक आयोजन भी किया जा चुका है। गुरु डॉक्टर जी पी शाही के द्वारा समय समय पर बेसिक कोर्स के साथ-साथ अन्य गूढ़ साधनाएं जैसे दुर्गा सप्तशती की बीज मंत्रात्मक साधना, महामृत्युंजय मंत्र साधना, मृतसंजीवनी मंत्र साधना, माँ पीताम्बरा मंत्र साधना, महा लक्ष्मी साधना , रुद्राभिषेक साधना , श्रीविद्या आदि विशिष्ट साधना के साथ साथ Past Life regression, pitra ascention , planet correction आदि का प्रशिक्षण भी पात्र साधकों को निःशुल्क दिया जाता रहा है।
इस ब्रम्हाण्ड में विभिन्न प्रकार की अदृश्य ऊर्जा विद्यमान है उन्ही में से एक है संजीवनी शक्ति। अपने गुरु से ये विद्या प्राप्त कर और ४० वर्षों की अथक साधना के बाद अब ये विद्या सामान्य जन को सुलभ करा रहे है जिसके प्रतिदिन मात्र ३०-४० मिनट्स के अभ्यास से हम अपने जीवन में हर प्रकार के सुखद परिवर्तन आरम्भ कर सकते है और सतत अभ्यास से समस्त समस्याओं से मुक्त हो कर एक स्वस्थ एवं प्रसन्न जीवन जी सकते है जिसमें हर प्रकार के भौतिक और आध्यात्मिक सूखों की निरंतर वृद्धि होती रहेगी ।
वैज्ञानिकों के अनुसार हमें जितनी ऊर्जा की जरूरत होती है उसका 7% जल से, 7% भोजन से, 16% वायु से और 70 % ब्रह्माण्ड में मौजूद "लाइफ फ़ोर्स एनर्जी " जिसको प्राचीन भारत में संजीवनी ऊर्जा भी कहते हैं से प्राप्त हो रही यही “लाइफ फ़ोर्स एनर्जी (संजीवनी शक्ति)" हमें जीवित एवं स्वस्थ भी रखती है।
हमारे बीमार पड़ने का मुख्य कारण हमारे शरीर मे संजीवनी शक्ति का असंतुलन होना होता है । हम इस लाइफ फ़ोर्स एनर्जी को या तो पूर्ण तरीके से ग्रहण नहीं कर पाते हैं या पूर्ण तरीके से ग्रहण करना नहीं जानते। बीमार पड़ने के अन्य कारणों में जल , वायु और भोजन का ठीक तरीके से न लेना भी है अर्थात जल, वायु, भोजन और लाइफ फ़ोर्स एनर्जी ( संजीवनी शक्ति ) का असंतुलन किसी भी जीवित प्राणी के बीमार होने का मुख्य कारण होता है।
हमें स्वस्थ रहने के लिए जल, वायु, भोजन को संतुलित तरीके से लेने के साथ - साथ लाइफ फ़ोर्स एनर्जी (जीवन दायनी शक्ति या संजीवनी ऊर्जा) को ब्रह्माण्ड से ठीक तरीके से ग्रहण करना सीखना होगा ।
यह कार्यशाला आपको जल , वायु , भोजन को संतुलित तरीके से लेने के साथ-साथ लाइफ फ़ोर्स एनर्जी ( संजीवनी ऊर्जा ) को ब्रह्माण्ड से ठीक तरीके से कैसे ग्रहण किया जाये ,उसकी साधना सिखाने के लिए है ।लाइफ फ़ोर्स एनर्जी को जब आप प्रकृति से ठीक तरीके से ग्रहण करना सीख जाते हैं तो आप बीमार नहीं पड़ते और अगर किसी भी तरह का रोग आपको है तो वह भी धीरे -धीरे ठीक हो जाता है साथ ही साथ आपका चतुर्मुखी विकास भी होने लगता है ।
आपने सुना होगा की किसी ऋषि-मुनि ने किसी रोगी को बिना दवा दिए ठीक कर दिया ।यह आप भी कर सकते हैं ।लाइफ फ़ोर्स एनर्जी को जब आप ग्रहण करना सीख जाते हैं ( प्राचीन भारत एवं आध्यात्मिक जगत मे इस लाइफ फ़ोर्स एनर्जी को प्रकृति से ग्रहण करने की विद्या को संजीवनी साधना कहते थे ) तो पहले आप खुद को स्वस्थ रख पाते हैं। संजीवनी विद्या का लगातार अभ्यास करने पर आप के अंदर वह शक्ति आ जाती है की आप दूसरों को भी हील कर सकते हैं। साधना की इस अवस्था में आप रोगी का ऍमआरआई या किसी भी तरह का पैथोलॉजिकल जांच किये बिना उसके मर्ज का पता भी लगा सकते हैं। संजीवनी विद्या का साधक जब अपने ज्ञान के शीर्ष पर पहुँचता है तो आपके डीएनए को डिकोड करके आपके पास्ट लाइफ को भी देख सकता है और यह भी जान सकता है की कहीं आपके रोगों का सम्बन्ध आपके पूर्व जन्मों के किसी कर्म से तो नहीं है।
डॉ. जीपी शाही "संजीवनी विद्या" के शीर्ष ज्ञान के सोपान पर पहुँच चुके साधक हैं व ऊपर लिखे सभी स्तरों को प्रकृति से प्राप्त कर चुके हैं। पिछले ४० वर्षों से प्रकृति से लाइफ फ़ोर्स एनर्जी को ग्रहण करने की साधना (संजीवनी विद्या की साधना) कर रहे हैं व असाध्य से असाध्य रोगियों को देश विदेश में बिना आला लगाए निःशुल्क ठीक कर चुके हैं।
विज्ञानं के विद्यार्थी रहे डॉ. जीपी शाही ने विश्व के विभिन्न उच्च वैज्ञानिक केंद्रो व यूनिवर्सिटीज की सहायता से लाइफ फ़ोर्स एनर्जी (जीवनदायनी ऊर्जा या संजीवनी ऊर्जा) का सफलता पूर्वक क्लीनिकल ट्रायल भी किया और अमेरिकन व भारतीय वैज्ञानिकों की सहायता से वैज्ञानिक तौर पर यह साक्ष्य भी जुटाए की प्रकृति से लाइफ फ़ोर्स एनर्जी आपके अंदर आकर किस तरह कार्य करती है।
इस विद्या का प्रयोग पहले केवल भारतीय ऋषि मुनि ही करते थे और देखने वालों को यह एक चमत्कार के तौर पर लगता था और इसको वैज्ञानिक तौर पर कभी रिकॉर्ड नहीं किया गया।
डॉ. जीपी शाही ने इस प्राचीन विद्या का क्लीनिकल ट्रायल करके इसके रहस्यों पर से पर्दा हटाया एवं यह साबित किया की सभी जीवित प्राणियों को प्रकृति बिना किसी भेदभाव के लाइफ फ़ोर्स एनर्जी (संजीवनी ऊर्जा) दे रही है और कोई भी व्यक्ति चाहे उसकी पूजा पद्धति या संप्रदाय कुछ भी हो वो लाइफ फ़ोर्स एनर्जी (संजीवनी विद्या) को ग्रहण करना सीख कर व भोजन, जल, वायु का संतुलन बनाकर अपने को स्वस्थ रख सकता है।
डॉ जीपी शाही ने अपने जीवन के ४० कीमती वर्ष इस विद्या की पारंगता को प्राप्त करने व इसके क्लीनिकल ट्रायल के लिए इस वजह से दिए की वो देखते थे की गरीब मरीज पैसों के अभाव में इलाज नहीं करा पा रहा है और अमीर दवाई पर दवाई खाता जा रहा है। उनके मन में सवाल उठता था की पशु -पक्षी , पेड़ - पौधे आम तौर पर कैसे स्वस्थ रह लेते हैं। इसी उत्सुकता व आध्यात्मिक रुझान ने उन्हें संजीवनी विद्या से जोड़ा और अब उनकी सोच ऐसे साधकों को तैयार करने की है जो अमीर की दवाई छुड़ा दे और गरीब को प्रकृति की सहायता से ही स्वस्थ रहना सीखा दे। साथ ही साथ नए साधको के माध्यम से अगली पीढ़ी को भी यह ज्ञान ट्रांसफर हो जाये।
इसी कड़ी में दिल्ली एनसीआर में "संजीवनी विद्या " लाइफ फ़ोर्स एनर्जी को प्रकृति से ग्रहण करने की विद्या सीखने के लिये प्रथम कार्यशाला लगाई जा रही है। यह कार्यशाला पूर्णतया निःशुल्क है क्योंकि डॉ साहब प्रकृति से प्राप्त इस विद्या को सर्वसुलभ बनाने हेतु इच्छुक एवं पात्र ब्यक्तियो को अंकंडिशनल देना चाहते हैं।


