अवैध घोषित बैंक्वेट हॉलों में सार्वजनिक आयोजनों पर लगे रोक - शालिनी सिंह
नौएडा। सामाजिक संस्था नौएडा सिटीजन फोरम की कार्यकारी अध्यक्ष शालिनी सिंह ने आज आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में शहर से जुड़े जनहित के कई अहम मुद्दों को उठाते हुए प्रशासन से त्वरित और पारदर्शी कार्रवाई की मांग की।
नौएडा सिटीजन फोरम ने सैक्टर 150 नौएडा में जनवरी माह में हुए इंजीनियर युवक की मृत्यु के दर्दनाक हादसे का मुद्दा उठाया, जिसमें युवा सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज मेहता की मृत्यु हो गई थी।
शालिनी सिंह ने कहा कि यह घटना नौएडा जैसे हाईटेक शहर के लिए अत्यंत शर्मनाक बात है कि पुलिस प्रशासन की मौजूदगी में एक युवक ने दम तोड़ दिया। यह घटना प्रशासन और पुलिस की घोर लापरवाही का परिणाम है। जैसा कि मीडिया के माध्यम से लोगों को ज्ञात हुआ है कि इस मामले में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री जी द्वारा एसआईटी गठित कर 5 दिनों के भीतर रिपोर्ट पेश करने के आदेश जारी किए गए थे जिनकी अवेहलना करते हुए एस.आई.टी. ने लगभग 100 दिन लगा दिए इस रिपोर्ट को तैयार करने में, सवाल यह है कि क्या SIT के लिए मुख्यमंत्री के आदेश कोई मायने नहीं रखते ? एस.आई.टी. ने कई महीनों का इतना लंबा समय लेने के बावजूद ऐसी रिपोर्ट तैयार की जिसको देखकर लगता है कि इसे किसी दारोगा स्तर के अधिकारी ने एक या दो दिन में तैयार किया हो जिसमें छोटे स्तर के अधिकारियों पर सारा दोष मढ़कर मामले को रफा दफा कर दिया जा रहा है, किसी भी उच्च अधिकारी को दोषी नहीं माना गया। क्यों नहीं घटना की सूचना मिलने पर जिलाधिकारी मौके पर पहुंची जबकि आपदा प्रबंधन की प्रमुख भी वो ही हैं, यह बात भी रिपोर्ट में होनी चाहिए थी।
नौएडा सिटीजन फोरम ने मांग की थी कि एस.आई.टी. सार्वजनिक सूचना अखबारों में प्रकाशित कराए कि उक्त मामले में यदि कोई अपनी बात या बयान एस.आई.टी. के समक्ष देना चाहता है तो वो उपस्थित हो सकता है किंतु ऐसा कोई सार्वजनिक नोटिस या सूचना प्रकाशित नहीं कराई गई। फोरम ने मांग की थी कि जनप्रतिनिधियों ने इस मामले में पत्र लिखकर और वीडियो जारी कर प्राधिकरण या प्रशासन के विरुद्ध जो शिकायतें की हैं उनको भी एस.आई.टी. द्वारा अपनी रिपोर्ट में उनके बयान के तौर पर शामिल किया जाना चाहिए।
रिपोर्ट को सार्वजनिक किया जाये, इस बात को भी एस.आई.टी. ने नहीं माना। अतः एन.सी.एफ. जनहित में उत्तर प्रदेश के माननीय मुख्यमंत्री जी से अनुरोध करता है कि उक्त एस.आई.टी. के सदस्यों से जवाब तलब किया जाना चाहिए कि आपके द्वारा उन्हें जिस समय अवधि में जांच रिपोर्ट को तैयार करने का निर्देश दिया गया था, उसमें क्यों नहीं तैयार किया गया व जो लोग या सामाजिक संस्थाएं इस विषय में एस.आई.टी. के समक्ष तथ्यों को रखना चाहते थे उन्हें मौका क्यों नहीं दिया गया। लगभग तीन माह में रिपोर्ट को जारी किया गया है। जिसमें कुछ निचले स्तर के कर्मचारियों पर ही आरोप लगाया गया है, उच्च अधिकारियों की क्या कोई जिम्मेदारी नहीं बनती ? युवराज मेहता के पिता ने भी इस रिपोर्ट पर असंतोष जताया है। मीडिया में प्रकाशित जो रिपोर्ट देखने में आ रही है इससे जांच की पारदर्शिता और निष्पक्षता पर प्रश्नचिन्ह खड़े होते हैं।
जांच में देरी के कारणों का स्पष्ट खुलासा सार्वजनिक तौर पर करके जन भावनाओं एवं लोकतांत्रिक मर्यादा का पालन एस.आई.टी. को करना चाहिए। माननीय मुख्यमंत्री जी की "अपराध एवं भ्रष्टाचार" पर "जीरो टॉलरेंस नीति" का सम्मान करते हुए एस.आई. टी. के सदस्यों को उक्त प्रकरण में उच्च अधिकारियों की कार्यशैली एवं भूमिका की भी सही से जांच करनी चाहिए थी जोकि नहीं कि गई, केवल छोटे अधिकारियों पर दोष रोपित करके उच्च अधिकारियों को बचाया जाना रिपोर्ट में दिखाई देता है। फोरम व्यापक जनहित में मुख्यमंत्री महोदय से मांग करता है कि एस.आई. टी. की उक्त रिपोर्ट को रद्द करते हुए इस मामले में न्यायिक जांच "ज्यूडिशियल इंक्वायरी" करवाने का कष्ट करें ताकि युवराज मेहता के परिवार को सही न्याय मिल सके और इस घटना में जिम्मेदार कोई भी छोटा-बड़ा दोषी अधिकारी बच ना सके।
प्रेस कॉन्फ्रेंस का दूसरा बड़ा मुद्दा नौएडा में संचालित अवैध बैंक्वेट हॉल/ बारात घरों का रहा। शालिनी सिंह ने कहा कि नौएडा सिटीजन फोरम प्राधिकरण, पुलिस, प्रशासन से यह पुरजोर मांग करता है कि जिन बैंक्वेट हॉलों/ बारात घरों को नौएडा प्राधिकरण "अवैध घोषित" कर चुका है उनमें होने वाले "सार्वजनिक कार्यक्रमों" पर तत्काल रोक लगाई जानी चाहिए। नौएडा प्राधिकरण ने जिन बैंक्वेट हॉलों को नोटिस जारी करते हुए अवैध घोषित किया है और नौएडा प्राधिकरण की भूमि पर निर्मित बताया है तो फिर सरकारी जमीन पर खड़े किए गए बैंक्वेट हॉलों से होने वाली लाखों/करोड़ों की कमाई पर किसी निजी व्यक्ति का अधिकार कैसे हो सकता है, नौएडा प्राधिकरण की भूमि पर निर्मित कोई भी निर्माण "पब्लिक की संपत्ति" हुई जिसपर सरकार का अधिकार होना चाहिए नाकि किसी प्राइवेट कंपनी या लोगों का। अतः अवैध घोषित सभी बैंक्वेट हॉलों में "सार्वजनिक आयोजनों" पर तत्काल "रोक" लगाई जानी चाहिए व इन्हें ध्वस्त ना किए जाने तक सील किया जाना चाहिए। इस हेतु संबंधित थाना प्रभारी व प्राधिकरण इंचार्ज की जिम्मेदारी तय की जानी चाहिए और लापवाही पाये जाने पर सख्त कार्यवाही अमल में लाई जानी चाहिए ताकि सरकार की कार्यशैली एवं नेक नियति पर जनता का विश्वास कायम रहे।
शालिनी सिंह ने कहा कि यह भी बेहद जरूरी है कि स्थानीय पुलिस, प्रशासन व सतर्कता विभाग को यह भी खासतौर पर ध्यान रखना चाहिए कि कोई भी "सरकारी कार्यक्रम" या संवैधानिक पदों पर आसीन जनप्रतिनिधियों के कार्यक्रम नौएडा की किसी "अवैध" इमारत या बिल्डिंग या बैंक्वेट हॉल इत्यादि में ना आयोजित किया जाए। किसी भी विवादित भूमि, अवैध बिल्डिंगों इत्यादि में रूलिंग पार्टी या सरकार या जनप्रतिनिधियों का कार्यक्रम आयोजित करने से जनता के समक्ष वहां की सरकार और रूलिंग पार्टी की खराब तथा भ्रष्टाचार को समर्थन देने वाली छवि बनती है। अतः पुलिस प्रशासन को इस पर विशेष ध्यान रखना चाहिए।
प्रेस कॉन्फ्रेंस में अगला प्रमुख मुद्दा नौएडा में अवैध एवं अस्थाई डंपिंग ग्राउंड में लगातार लग रही आग का रहा। सैक्टर 145 में पिछले 10–12 दिनों से लगी भीषण आग का उल्लेख करते हुए शालिनी सिंह ने बताया कि पूर्व में सैक्टर 32 और 123 में भी ऐसी घटनाएं हो चुकी हैं। इन घटनाओं से पर्यावरण और जनस्वास्थ्य पर गंभीर दुष्प्रभाव पड़ रहा है।
सभी अवैध डंपिंग ग्राउंड को तत्काल बंद किया जाए, कचरा निस्तारण के लिए स्थायी एवं वैज्ञानिक व्यवस्था लागू की जाए तथा संबंधित जिम्मेदार अधिकारियों के विरुद्ध कठोर कार्यवाही की जाए।
नौएडा में खराब पेयजल की आपूर्ति पर भी शालिनी सिंह ने कड़ी नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि नौएडा के अनेकों सैक्टर, गांव एवं सोसाइटी कई सालों से स्वच्छ एवं पर्याप्त जल आपूर्ति से वंचित हैं, नौएडा के वर्ल्ड क्लास सिटी होने का दावा करने वाला नौएडा प्राधिकरण अभी तक स्वच्छ पीने के पानी जैसे नागरिकों के मूलभूत अधिकार को सही से मुहैया नहीं करवा पाया है जोकि प्राधिकरण के लिए अत्यंत शर्मनाक बात है।फोरम ने इसे नागरिकों के मूल अधिकारों से जुड़ा विषय बताते हुए कहा कि इस दिशा में गंभीरता से त्वरित कार्यवाही की जानी चाहिए।
सभी क्षेत्रों में नियमित एवं स्वच्छ जल आपूर्ति सुनिश्चित की जाए, जल गुणवत्ता की नियमित जांच कर रिपोर्ट सार्वजनिक की जाए। अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाए तथा लापरवाही पाए जाने पर संबंधित अधिकारी को नौकरी से बर्खास्त किया जाये।
नौएडा में नई सीवर लाइनें डाली जायें क्योंकि शहर को बसे हुए बहुत लम्बा समय बीत चुका है और अधिकत्तर सैक्टरों में बिछी हुई सीवर लाइनें खराब हो चुकीं हैं जिस कारण जगह जगह सीवर बंद रहते हैं जिससे दूषित पानी लोगों के घरों में घुस जाता है।
शालिनी सिंह ने कहा कि सरकारी अधिकारियों को पूरी जिम्मेदारी और क्षमता के साथ नौएडा के नागरिकों की समस्याओं को सुनना, समझना और उनका निस्तारण करना चाहिए, साथ ही जनहित के मुद्दों पर पारदर्शी, निष्पक्ष एवं समयबद्ध कार्यवाही भी सुनिश्चित की जाये क्योंकि “न्याय में देरी, न्याय से वंचित करने के समान है।”
नागरिकों का विश्वास प्रशासन और कानून-व्यवस्था में बना रहे इस पर सर्वोच्च प्राथमिकता पर सरकारी अधिकारियों एवं कर्मचारियों को काम करना चाहिए।
शालिनी सिंह ने कहा कि नौएडा सिटीजन फोरम यह विशेष ध्यान रखेगा कि नौएडा एवं यहां की जनता के प्रति उदासीन व ढ़ुलमुल रवैया रखने वाले लापरवाह अधिकारियों को चिन्हित कर उनकी शिकायत प्रदेश के मुख्यमंत्री जी तक सही से पहुंचाई जा सके और पथ भ्रष्ट अधिकारियों की रवानगी नौएडा से शीघ्र अति शीघ्र करवाई जा सके।
इस अवसर पर फोरम के महासचिव प्रशांत त्यागी,सचिव गरिमा त्रिपाठी, गिरीश कपूर, मधु मेहरा, छाया राय, पवन यादव, रेणु बाला शर्मा ज्योत्सना पमनानी एवं एडवोकेट कमल कौशिक आदि उपस्थित थे।


