कथा के चौथे दिन उमड़ पड़ी मातृ शक्तियों की भीड़ कागभुशुण्डि की कथा सुन हुई मंत्र मुग्ध

कथा के चौथे दिन उमड़ पड़ी मातृ शक्तियों की भीड़ कागभुशुण्डि की कथा सुन हुई मंत्र मुग्ध

संवाददाता - त्रिभुवन गुप्ता

गाजीपुर - मरदह क्षेत्र के बोगना गांव में श्री राम कथा के चौथे दिन के मुख्य यजमान विवेक सिंह गोलू और उनकी धर्मपत्नी शालू सिंह ने आचार्य जी का माल्यार्पण कर और दीप प्रज्वलित कर कथा का आयोजन किया।

श्रीराम कथा के चौथे दिन सर्वप्रथम श्रीराम की कथा भगवान श्री शंकर ने माता पार्वती जी को सुनाई थी। कथा वाचक अजीत आचार्य जी ने बताया कि उस कथा को एक कौवे ने भी सुन लिया। उसी कौवे का पुनर्जन्म कागभुशुण्डि के रूप में हुआ। काकभुशुण्डि को पूर्व जन्म में भगवान शंकर के मुख से सुनी वह रामकथा पूरी की पूरी याद थी। उन्होंने यह कथा अपने शिष्यों को सुनाई। इस प्रकार रामकथा का प्रचार-प्रसार हुआ। भगवान शंकर के मुख से निकली श्रीराम की यह पवित्र कथा 'अध्यात्म रामायण' के नाम से विख्यात है।लोमश ऋषि के शाप के चलते काकभुशुण्डि कौवा बन गए थे। लोमश ऋषि ने शाप से मु‍क्त होने के लिए उन्हें राम मंत्र और इच्छामृत्यु का वरदान दिया। कौवे के रूप में ही उन्होंने अपना संपूर्ण जीवन व्यतीत किया। वाल्मीकि से पहले ही काकभुशुण्डि ने रामायण गिद्धराज गरूड़ को सुना दी। इस कथा को सुनने के लिए मातृ शक्तियों को भीड़ उमड़ पड़ी।

 इस मौके पर कथा में मुख्य रूप से मौजूद पूर्व प्रधान शेषनाथ गुप्ता, आशीष कुमार,सतीश गुप्ता,रामकृत,दुर्गेश,सत्यम चौहान,प्रभाकर चौहान,निलेश, मनीष,बृजभान,रामजन्म चौहान,रिंकू, टोनू,,बब्बन सिंह,खुशी सिंह,विराट सिंह,अंगद,सूरज सिंह,विक्रांता चौहान कल्लू, सहित अन्य लोग भी शामिल रहे। श्री राम कथा में आए सभी आगंतुकों को प्रवीण कुमार पांडेय ने आभार व्यक्त किए।