फेलिक्स हॉस्पिटल के डॉक्टरों ने प्लेटलेट्स की कमी के बावजूद सुरक्षित डिलीवरी कराई
गंभीर थ्रॉम्बोसाइटोपीनिया, यूट्रस और पेट की दीवार में चिपकाव से जूझ रही थी महिला
नोएडा। फेलिक्स हॉस्पिटल के डॉक्टरों ने प्लेटलेट्स की कमी और पहले से दो सिजेरियन ऑपरेशन की जटिलता के बावजूद सफल ऑपरेशन कर मां और नवजात बच्ची की जान बचाई है। डॉ सीमा चपराना ने बताया कि मध्य प्रदेश निवासी 39 सप्ताह की गर्भवती महिला पिछले शनिवार को रूटीन जांच के लिए नोएडा स्थित अस्पताल आई थी। प्लेटलेट काउंट मात्र 33 हजार होने से गंभीर थ्रॉम्बोसाइटोपीनिया था। जिससे डिलीवरी के दौरान अत्यधिक रक्तस्राव के खतरे की आशंका थी।
सामान्य सिजेरियन ऑपरेशन के लिए यह संख्या 1 लाख होनी चाहिए। इतनी कम प्लेटलेट्स के साथ सर्जरी करना खतरनाक माना जाता है। लेकिन समय की मांग और शिशु की स्थिति को देखते हुए डॉक्टरों ने तुरंत प्लेटलेट्स की व्यवस्था शुरू की। डॉक्टरों ने पहले दो जंबो प्लेटलेट यूनिट्स चढ़ाए। जिससे काउंट 47 बजट हुआ। फिर दो और यूनिट देने पर यह बढ़कर 89 हजार पहुंचा। यह संख्या अब भी न्यूनतम मानक से कम थी, लेकिन ऑपरेशन में देर करना शिशु और मां दोनों के लिए जोखिम भरा हो सकता था। ऐसे में डॉक्टरों ने बेहोशी की दवा (एनेस्थीसिया) देकर सावधानीपूर्वक ऑपरेशन शुरू किया। ऑपरेशन के दौरान गंभीर चुनौती का सामना करना पड़ा।
महिला का गर्भाशय पेट की दीवार से पूरी तरह चिपका हुआ था। जिसे मेडिकल भाषा में गर्भाशय आसंजन कहा जाता है। यह स्थिति आमतौर पर पहले किए गए सिजेरियन ऑपरेशन के कारण बनती है और सर्जरी को अत्यंत जटिल बना देती है। बावजूद लेयर को साइड कर एक विंडो बनाई और बहुत सावधानी से अंदर की ओर बढ़े। अंदर पहुंचते ही उन्हें ब्लैडर और यूट्रस के बीच भी चिपकाव मिला। जिससे ऑपरेशन और भी संवेदनशील हो गया।
बावजूद गर्भाशय की ऊपरी परत पर चीरा लगाकर शिशु को बाहर निकाला। इस दौरान देखा गया कि शिशु ने गर्भ में ही मल त्याग किया हुआ था, लाल। जो एक गंभीर स्थिति होती है और नवजात के फेफड़ों पर असर डाल सकती है। लेकिन सौभाग्य से बच्ची स्वस्थ निकली और उसका वजन 3.3 किलोग्राम पाया गया। इसके बाद डॉक्टरों ने गर्भाशय को सावधानी से बंद किया।
इस पूरे जटिल ऑपरेशन के दौरान कोई गंभीर रक्तस्राव नहीं हुआ। मरीज के प्लेटलेट्स बहुत कम थे। यूट्रस पूरी तरह पेट की दीवार से चिपका था और पहले से दो सिजेरियन हो चुके थे। इसलिए यह केस बेहद चुनौतीपूर्ण था। लेकिन टीम ने सोच-समझकर उठाया और मां- बच्चे दोनों को सुरक्षित बचाया। वर्तमान में मां और नवजात बच्ची डॉक्टरों की निगरानी में हैं और धीरे-धीरे स्वस्थ हो रही हैं।


