एमिटी में विशेषज्ञों ने विघटनकारी नवाचारों में एक प्रभावशाली विज्ञान के रूप में एआई पर अपने विचार रखे

एमिटी में विशेषज्ञों ने विघटनकारी नवाचारों में एक प्रभावशाली विज्ञान के रूप में एआई पर अपने विचार रखे

नोएडा। एमिटी विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं और वैज्ञानिकों द्वारा किये जा रहे महत्वपूर्ण शोध कार्यो पर विशेषज्ञो से मार्गदर्शन प्रदान करने के लिए एमिटी साइंस टेक्नोलॉजी एंड इनोवेशन फांउडेशन द्वारा ‘‘अग्रणी वैज्ञानिक उपलब्धियों पर विचार विमर्श 2024 के द्वितीय ज्ञानवर्धक सत्र का आयोजन किया गया।

इस अवसर पर और एमिटी संेटर फॉर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के निदेशक डा एम के दत्ता ने अपने शोध कार्यो को प्रस्तुत किया जिसपर डीआरडीओं के सिस्टम एनालिसिस गु्रप के पूर्व निदेशक डा पी के सक्सेना, बॉटलैब डायनमिक्स की प्रबंध निदेशक और सह-संस्थापक डा सरिता अहलावत, आईआईटी दिल्ली के स्कूल ऑफ आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के इलेक्ट्रिकल इंजिनियरिंग विभाग के डा संदीप कुमार ने अपने विचार रखे। एमिटी शिक्षण समूह के संस्थापक अध्यक्ष डा अशोक कुमार चौहान और एमिटी साइंस टेक्नोलॉजी एंड इनोवेशन फांउडेशन के अध्यक्ष डा डब्लू सेंल्वामूर्ती ने अतिथियों का स्वागत किया।

एमिटी सेंटर फॉर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के निदेशक डॉ. एम.के. दत्ता ने “विघटनकारी नवाचारों में एक प्रभावशाली विज्ञान के रूप में कृत्रिम बुद्धिमत्ता” पर अपना व्याख्यान देते हुए कहा, कि नव स्थापित एमिटी सेंटर फॉर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस दुनिया की सबसे शक्तिशाली एआई प्रणाली, एनवीआईडीआईए डीजीएक्स2 ए100 से सुसज्जित है।

एमिटी सेंटर ऑफ आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस में, एआई-सेंसविजन दृष्टिबाधित लोगों के लिए कम लागत वाली आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस-आधारित मजबूत और वास्तविक समय सहायता, डीपरेस्पनेट श्वसन ध्वनियों के वर्गीकरण के लिए एक डीप न्यूरल नेटवर्क, एक्रिलामाइड (आलू में कैंसर पैदा करने वाला विषाक्त पदार्थ) की पहचान के लिए एआई और कंप्यूटर विज़न आधारित तकनीक, कंप्यूटर विज़न और एआई का उपयोग करके मस्तिष्क पर मोबाइल ईएमएफ विकिरण प्रभाव, हृदय स्वास्थ्य निगरानी के लिए एआई-आधारित डिवाइस और कई अन्य नवाचार विकसित किए गए हैं।

 डीआरडीओं के सिस्टम एनालिसिस गु्रप के पूर्व निदेशक डा पी के सक्सेना ने अपने विचारों को साझा करते हुए कहा, डीप लर्निंग में, मशीन को डेटा प्रदान किया जाता है, और सब कुछ डेटा-संचालित होता है, हालांकि, स्वास्थ्य सेवा के लिए एआई समाधान विकसित करते समय, चिकित्सा पेशेवरों का सहयोग और सत्यापन महत्वपूर्ण होता है ताकि वे इसे केवल तकनीकी के बजाय चिकित्सा दृष्टिकोण से विश्लेषण कर सकें।

ड्रोन तकनीक में एआई के उपयोग पर प्रकाश डालते हुए, बॉटलैब डायनेमिक्स की प्रबंध निदेशक और सह-संस्थापक, डॉ. सरिता अहलावत ने कहा, कि ड्रोन तकनीक में एआई का उपयोग अत्यधिक प्रभावी और प्रभावकारी है। एआई का उपयोग करने वाले ड्रोन स्वचालित रूप से लक्ष्यों की पहचान कर सकते हैं और उन्हें निशाना बना सकते हैं, स्थितिजन्य जागरूकता में सुधार कर सकते हैं और अतिरिक्त क्षति को कम कर सकते हैं। एआई सैन्य ड्रोन वास्तविक समय में युद्ध के मैदान की बदलती परिस्थितियों के अनुकूल, स्वतंत्र रूप से मिशनों को निष्पादित करने की योजना बनाते हैं, और ड्रोन तकनीक में एआई की प्राथमिक भूमिकाओं में से एक स्वायत्त उड़ान है।

एआई आधारित प्रौद्योगिकियों में चुनौतियों के बारे में बोलते हुए, आईआईटी, दिल्ली के स्कूल ऑफ आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग विभाग के डॉ. संदीप कुमार ने कहा कि एआई आधारित समाधान प्रदान करने में सबसे बड़ी चुनौती यह है कि पर्याप्त डेटा उपलब्ध नहीं है या कभी-कभी जो डेटा उपलब्ध होता है वह गलत या कम होता है, जिससे भ्रामक प्रक्रियाएं और गलत समाधान हो सकते हैं। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि डेटा के संदर्भ में सभी प्रमुख योगदान विभिन्न कंपनियों से आते हैं, जो एक समान नहीं हो सकते हैं और एक-दूसरे से भिन्न हो सकते हैं। इसलिए, हमें यह सुनिश्चित करने के लिए डेटा को कई बार जांचना चाहिए कि कोई विसंगतियां न हों।

एमिटी शिक्षण समूह के संस्थापक अध्यक्ष डा अशोक कुमार चौहान ने कहा कि किसी भी शोध में हो रही प्रगति का विशेषज्ञों द्वारा विश्लेषण और मार्गदर्शन उस शोध को आगे बढने में सहायता करता है। एमिटी मे ंहम छात्रों, शोधार्थियों और वैज्ञानिकों को शोध करने के लिए प्रेरित करते है जिससे उसका लाभ देश के आमजन का प्राप्त हो सके।

एमिटी साइंस टेक्नोलॉजी एंड इनोवेशन फांउडेशन के अध्यक्ष डा डब्लू सेंल्वामूर्ती  ने कहा कि इस कार्यक्रम का आयोजन करने का मुख्य उद्देश्य डा एम के दत्ता द्वारा किये गये एआई आधारित शोधो पर बाहरी विशेषज्ञों के विचार प्राप्त करना है और यह जानना है कि समाज को लाभ पहुंचाने के लिए उस शोध को मूर्त रूप में कैसे आगे बढ़ाया जा सकता है।