BIT नोएडा में अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन 'ICIEM 2026' का हुआ आयोजन 

BIT नोएडा में अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन 'ICIEM 2026' का हुआ आयोजन 

नोएडा। बीआईटी परिसर में कृत्रिम बुद्धिमत्ता और सस्टेनेबल डिजिटल फ्यूचर के लिए के लिए हरित नवाचार पर केंद्रित चतुर्थ अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन 'आईसीआईईएम् - 2026' का आयोजन किया गया. अपने थीम प्रस्तुतीकरण में अधिवेशन के मुख्य सचिव प्रो. (डॉ.) एस. एल. गुप्ता ने कहा कि तकनीक का उद्देश्य केवल प्रगति नहीं, बल्कि जिम्मेदारी, समावेशन और सतत भविष्य का निर्माण भी होना चाहिए। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि मशीनें डेटा को संसाधित कर सकती हैं, लेकिन वास्तविक समझ, संवेदनशीलता और दूरदृष्टि मानव बुद्धि से ही आती है।

 सम्मेलन में देशभर के प्रतिष्ठित संस्थानों से उल्लेखनीय भागीदारी दर्ज की गई। 260 से अधिक शोध सारांश तथा 150 पूर्ण शोधपत्र प्राप्त हुए, जो इस सम्मेलन की शैक्षणिक गंभीरता और व्यापकता को दर्शाते हैं। अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन के अध्यक्ष प्रो. विकास त्रिपाठी ने स्वागत उद्बोधन दिया। उन्होंने  कहा की इस कार्यक्रम का उद्देश्य न केवल नवाचारों पर बात करना है अपितु उनके मानवीय एवं नैतिक आधारों पर विचार करना भी है।  कार्यक्रम के  मुख्य अतिथि स्टेट इंस्टीट्यूशनल बिज़नेस हेड, दिल्ली एवं हरियाणा राज्य कार्यालय, इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन श्री कपिल भट ने कहा कि आज का युवा बड़ी मात्रा में एआई का उपयोग कर रहा है और हमें उनसे सीखने की आवश्यकता है। हालांकि, एआई बहुत अधिक ऊर्जा की खपत करेगा, इसलिए हमें इसका नैतिक और जिम्मेदार उपयोग सुनिश्चित करना होगा। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि इंडियन ऑयल ने 2046 तक नेट ज़ीरो हासिल करने का संकल्प लिया है और यह लक्ष्य प्राप्त करने वाली भारत की पहली ऑयल कंपनी बनने की दिशा में कार्य कर रही है।

विशिष्ट अतिथि फ्यूचर्ड इनोवेशन स्टूडियो के अध्यक्ष  डॉ. ऋषि मोहन भटनागर ने कहा कि एआई का नैतिक होना अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने एआई को ऐसे शिक्षक के रूप में बताया, जिसे अपनी त्रुटियों को सुधारने के लिए एक वरिष्ठ शिक्षक की आवश्यकता होती है। उन्होंने यह भी कहा कि विकसित देश सूर्य से प्राप्त निःशुल्क ऊर्जा का लाभ उठाने के लिए अंतरिक्ष में डेटा सेंटर स्थापित करने की योजना बना रहे हैं। 
ईएक्सएल की वाइस प्रेसिडेंट सुश्री सीपिका सिंघल ने कहा कि एआई का नैतिक उपयोग अत्यंत महत्वपूर्ण है, क्योंकि आज हमारे पास अस्वीकृति को स्वीकार करने की क्षमता कम होती जा रही है। एआई हमें अस्वीकार नहीं करता, और हमारी गलतियों पर निगरानी रखने वाला भी कोई नहीं होता। बिमटेक के प्रोफेसर ऑफ प्रैक्टिस एवं लक्ज़री उद्योग के विशेषज्ञ डॉ. ज्योति शंकर दास ने कहा कि कोई भी कृत्रिम बुद्धिमता कभी भी शिक्षकों का विकल्प नहीं हो सकता।

सम्मेलन के संयुक्त सचिवों डॉ. अरुण मित्तल, डॉ. स्वाति प्रसाद और डॉ. निकेत मेहता ने आयोजन को सफल बनाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया। सम्मेलन स्मारिका का डिज़ाइन संयुक्त सचिवों के साथ-साथ छात्र-छात्राओं मेधावी और रोहित राज द्वारा तैयार किया गया।

1इस अवसर पर आठ सत्रों के अंतर्गत शोध पत्रों का प्रस्तुतीकरण किया गया जिनमें सत्रों के अध्यक्ष एवं सह अध्यक्ष की भूमिका प्रोफेसर नवल किशोर, डॉ. रवि कुमार गुप्ता, डॉ. संजय राजपूत, सोमेश नाथ, सुश्री रुचिका ठाकुर, डॉ. प्रिया गुप्ता, डॉ. अभिषेक सिंह, सत्यजीत आजादी, डॉ. संदीप जैन, डॉ. दुर्गेश अग्निहोत्री, डॉ. रुचि अग्रवाल, डॉ. अनीता विनायक, डॉ. मोनिका सूरी, सुश्री श्रुति सिंह, सुश्री शिल्पा सिंह ने निभाई आयोजन की सफलता में सहयोग देने हेतु डॉ. मोनिका बिष्ट, पवन चांडक, अमित निंद्राजोग, विक्रम भाटिया, रणधीर साहदेव, प्राची और सुभाष जोशी को विशेष धन्यवाद ज्ञापित किया गया।

वंश कुमार राजपूत, कार्यक्रम का सञ्चालन वंश राजपूत एवं श्रेया सिन्हा, अभिनव एवं श्रेयांश ने किया वहीं कार्यक्रम के अंत में संस्थान की प्राध्यापिका डॉ. स्वाति प्रसाद ने धन्यवाद प्रस्तुत किया।