राष्ट्रीय पोषण माह : आंगनबाड़ी केन्द्रों और स्कूलों में बनायी जा रहीं पोषण वाटिका

राष्ट्रीय पोषण माह : आंगनबाड़ी केन्द्रों और स्कूलों में बनायी जा रहीं पोषण वाटिका

पोषण वाटिका में उगाई जाएंगी हरीसब्जी और औषधि युक्त पौधे और फल 

नोएडा। जनपद में राष्ट्रीय पोषण माह मनाया जा रहा है। एक सितम्बर से शुरू हुआ यह कार्यक्रम 30 सितम्बर तक चलेगा। पोषण माह में गर्भवती, धात्री महिला और बच्चों को व्यवहार परिवर्तन और सुलभ साधनों से अधिक से अधिक कैसे पोषित किया जाए, इस विशेष ध्यान दिया जा रहा है। शासन स्तर पर इसके लिए विशेष दिवस तय कर गतिविधियां संचालित करने के निर्देश दिये गये हैं। इसी क्रम में जनपद में बृहस्पतिवार (आठ सितम्बर) को आंगनबाड़ी केन्द्रों, स्कूलों और उपलब्ध भूमि पर पोषण वाटिका की स्थापना की गयी। यह जानकारी जिला कार्यक्रम अधिकारी पूनम तिवारी ने दी।

जिला कार्यक्रम अधिकारी ने बताया- जनपद में करीब 40 पोषण वाटिका स्थापित की जा रही हैं। इन वाटिकाओं में हरी सब्जी, फलदार व औषधि युक्त पौधे उगाये जाएंगे। उन्होंने कहा पोषण के लिए हरी साग सब्जी, फल अति महत्वपूर्ण हैं। इन वाटिकाओं में तैयार सब्जी, फल आदि कुपोषित और जरूरतमंद लोगों को उपलब्ध कराएं जाएंगे। पूनम तिवारी ने कहा- गर्भावस्था से ही सही पोषण का ख्याल रखना जरूरी है। यदि मां सुपोषित होगी तो बच्चा भी सुपोषित होगा। गर्भवती यदि रोजाना पोषक तत्व नहीं लेगी तो उसका असर गर्भ में पल रहे बच्चे पर पड़ना स्वाभाविक है। उन्होंने कहा अपने भोजन में पोषक तत्वों की आवश्यकता होती है जो हरी साग सब्जियों और फल से किये जा सकते हैं।

पूनम तिवारी ने बताया 30 सितम्बर तक चलने वाले पोषण माह में आंगनबाड़ी केन्द्रों पर विभिन्न गतिविधियां संचालित की जा रही हैं। सात सितम्बर को ग्राम्य स्वास्थ्य पोषण दिवस पर गंभीर तीव्र अतिकुपोषित (सैम) मध्यम गंभीर कुपोषित (मैम) बच्चों के चिन्हांकन एवं प्रबंधन और परामर्श सत्र का आयोजन आंगनबाड़ी केन्द्रों पर किया गया। आठ सितम्बर को पोषण वाटिकाओं के निर्माण की शुरुआत हुई। नौ सितम्बर को आंगनबाड़ी केन्द्रों पर महिलाओं एवं किशोरी बालिकाओं के लिए सत्र और योग द्वारा स्वास्थ्य लाभ विषय पर जन जागरूकता कार्यक्रमों का आयोजन किया जाएगा।

पोषण माह के तहत सभी आंगनबाड़ी केंद्रों पर वजन दिवस मनाया गया। इस दौरान बच्चों का वजन और ऊंचाई मापी गयी और इसके महत्व के विषय अभिभावकों को जानकारी दी गई। बाल विकास परियोजना अधिकारियों की निगरानी में आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं ने वजन करने के बाद कुपोषित बच्चों को पोषक आहार देने के विषय में अभिभावकों को जानकारी दी। कुपोषित बच्चों को नियमित पोषाहार देने की सलाह देते हुए बाल विकास सेवा एवं पुष्टाहार विभाग की ओर से दिए जाने पोषाहार के बारे में भी बताया। जिले के सभी ब्लाक में पंजीकृत बच्चों के वजन व ऊंचाई नापकर कुपोषित एवं अति कुपोषित बच्चों की पहचान भी की गई। साथ ही अति कुपोषित बच्चों को जिले के पोषण पुनर्वास केंद्र में संदर्भन के विषय में भी अभिभावकों को जागरूक किया गया।