देशभर में महिला गिग वर्कर्स के नेतृत्व में राष्ट्रव्यापी विरोध प्रदर्शन
गिग और प्लेटफॉर्म वर्कर्स ने डिजिटल कंपनियों द्वारा किए जा रहे शोषण को उजागर किया
Gig & Platform Service Workers Union (GIPSWU) ने 03 फरवरी 2026 को एक राष्ट्रव्यापी विरोध प्रदर्शन की घोषणा की, जिसमें दिल्ली, राजस्थान, कर्नाटक, महाराष्ट्र सहित अन्य राज्यों में प्रदर्शन आयोजित किए गए। देशभर में महिला गिग वर्कर्स के नेतृत्व में यह विरोध प्रदर्शन नई दिल्ली, जयपुर, बेंगलुरु और मुंबई जैसे महानगरों के साथ-साथ देश के कई जिलों में भी आयोजित किया गया।
विरोध प्रदर्शन के पश्चात, गिग और प्लेटफॉर्म वर्कर्स ने भारत के माननीय प्रधानमंत्री एवं विभिन्न राज्यों के मुख्यमंत्रियों के कार्यालय में एक मांग-पत्र (Memorandum of Demands) प्रस्तुत किया, जिसमें गिग और प्लेटफॉर्म कार्य को नियंत्रित करने हेतु एक व्यापक, प्रवर्तनीय और श्रमिक-केन्द्रित कानूनी ढांचे के अभाव के कारण श्रमिकों को हो रही निरंतर समस्याओं के समाधान के लिए सरकार से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की गई।
ज़ोमैटो, स्विगी, अर्बन कंपनी, अमेजॉन, ज़ेप्टो, ब्लिंकिट, इंस्टामार्ट सहित अन्य डिजिटल प्लेटफॉर्म से जुड़े सैकड़ों गिग और प्लेटफॉर्म सेवा कर्मियों ने जंतर-मंतर रोड, नई दिल्ली में आयोजित विरोध प्रदर्शन में भाग लिया। श्रमिकों ने अपने वैध श्रम और मानवाधिकारों की मान्यता की सामूहिक मांग की, जो अनियंत्रित एल्गोरिदमिक नियंत्रण, मनमाने दंड और सामाजिक सुरक्षा के अभाव के कारण लगातार उल्लंघन का शिकार हो रहे हैं।
सुश्री सीमा सिंह, अध्यक्ष, GIPSWU, ने कहा कि अर्बन कंपनी से जुड़ाव के दौरान उन्होंने स्वयं शोषण का सामना किया। जब उन्होंने इन प्रथाओं के विरुद्ध शिकायत उठाई, तो कंपनी ने कथित रूप से उन्हें पुलिस कार्रवाई की धमकी दी और कानूनी नोटिस जारी किए। उन्होंने जोर देकर कहा कि पिछले छह वर्षों से यूनियन गिग और प्लेटफॉर्म वर्कर्स को श्रमिक के रूप में मान्यता दिलाने के लिए संघर्ष कर रही है तथा एक पृथक और व्यापक कानून की निरंतर मांग कर रही है। उन्होंने आगे कहा कि गिग और प्लेटफॉर्म वर्कर के लिए एक उचित और विशिष्ट कानून के बिना शोषण को रोका नहीं जा सकता।
अंजलि, एक गिग वर्कर, ने साझा किया कि ड्यूटी के दौरान एक ग्राहक ने उनके साथ दुर्व्यवहार किया और उन पर हमला किया। जब उन्होंने इस घटना की शिकायत दर्ज कराई, तो कंपनी ने उनकी शिकायत पर कार्रवाई करने के बजाय कथित रूप से उनकी आईडी ब्लॉक कर दी, जिससे उनकी आजीविका छिन गई। वह लगातार अपनी आवाज़ उठा रही हैं ताकि अन्य श्रमिकों को ऐसी परिस्थितियों का सामना न करना पड़े।
पूजा, एक अन्य वर्कर , ने कहा कि डबल कैंसिलेशन पेनल्टी प्लेटफॉर्म कंपनियों द्वारा अपनाई जा रही सबसे खराब अनुचित श्रम प्रथाओं में से एक है। उन्होंने बताया कि जब कोई श्रमिक अपरिहार्य परिस्थितियों के कारण एक कार्य रद्द करता है, तो कंपनियां सज़ा के तौर पर दो कार्य रद्द कर देती हैं, जिससे आय का अनुचित नुकसान और रेटिंग में गिरावट होती है। उन्होंने आगे कहा कि गिग अर्थव्यवस्था में कार्यरत कंपनियां मौजूदा श्रम कानूनों के तहत पर्याप्त रूप से कवर नहीं हैं, जिससे वे श्रमिकों का खुलेआम शोषण कर रही हैं।
सोनिया, एक वर्कर, ने बताया कि प्लेटफॉर्म कंपनियां ऑटो-असाइनमेंट सिस्टम और बंडल बुकिंग के माध्यम से जबरन काम सौंपती हैं, जिससे श्रमिकों को अनिच्छा या असमर्थता के बावजूद कार्य स्वीकार करने के लिए मजबूर किया जाता है। उन्होंने यह भी बताया कि कार्य के दौरान श्रमिकों को शौचालय जैसी बुनियादी सुविधाओं तक पर्याप्त पहुंच नहीं मिलती।
ममता, एक गिग वर्कर, ने बताया कि उन्हें कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न का सामना करना पड़ा। कंपनी में औपचारिक शिकायत दर्ज कराने के बावजूद अब तक कोई कार्रवाई नहीं की गई, जिससे वह डर और असुरक्षा के माहौल में काम करने को मजबूर हैं तथा उनकी आजीविका की रक्षा के लिए कोई पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था मौजूद नहीं है।
निर्मल गोराना, राष्ट्रीय समन्वयक, GIPSWU, ने गंभीर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि आर्थिक सर्वेक्षण के अनुसार लगभग 48 लाख गिग वर्कर्स ₹15,000 प्रतिमाह से कम कमाते हैं, जिससे उनकी जीवन स्थितियाँ असुरक्षित और अस्थिर हो गई हैं। उन्होंने कहा कि यह चिंताजनक स्थिति भारत सरकार के तत्काल और गंभीर हस्तक्षेप की मांग करती है। उन्होंने आगे कहा कि यद्यपि पहले 10-मिनट डिलीवरी मॉडल को बंद किए जाने की बात कही गई थी, कंपनियों ने अब 15-मिनट की इंस्टेंट डिलीवरी प्रणाली शुरू कर दी है, जिससे श्रमिकों की सुरक्षा से लगातार समझौता हो रहा है। श्रमिकों को केंद्रीय बजट 2026 से विशेष रूप से वित्तीय सुरक्षा की बड़ी उम्मीदें थीं, लेकिन गिग और प्लेटफॉर्म वर्कर्स के लिए कोई विशिष्ट प्रावधान our …..fund घोषित नहीं किया गया, जिससे व्यापक निराशा फैली है। उन्होंने मांग की कि सभी गिग और प्लेटफॉर्म वर्कर के लिए न्यूनतम बुनियादी वित्तीय सहायता कानूनी रूप से सुनिश्चित की जाए। उन्होंने यह भी कहा कि अधिकांश गिग वर्कर्स प्रवासी श्रमिक हैं और महिला श्रमिकों में से अधिकांश एकल महिलाएं हैं। उन्होंने रेखांकित किया कि ये श्रमिक जबरन श्रम जैसी परिस्थितियों का सामना कर रहे हैं, जबकि सरकार और कंपनियां दोनों उनके कल्याण के प्रति लापरवाह और उदासीन बनी हुई हैं।
कवलप्रीत कौर, श्रम अधिकार अधिवक्ता, ने कहा कि श्रम कानूनों के तहत गिग वर्कर्स को औपचारिक मान्यता मिलने के बावजूद, न्यूनतम मजदूरी तथा निष्पक्ष और सम्मानजनक कार्य परिस्थितियों से जुड़े उनके कानूनी अधिकार बड़े पैमाने पर लागू नहीं किए गए हैं। उन्होंने कहा कि गिग उद्योग में कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न अधिनियम (Sexual Harassment at Workplace) का कार्यान्वयन पूरी तरह विफल रहा है।
सोयब, एक ज़ोमैटो डिलीवरी वर्कर, ने कहा कि उनकी आईडी को झूठे आरोपों के आधार पर गलत तरीके से ब्लॉक कर दिया गया। सेवा के दौरान एक रेस्टोरेंट मालिक ने उन पर चोरी का झूठा आरोप लगाया। वीडियो साक्ष्य होने और बाद में रेस्टोरेंट मालिक द्वारा यह स्वीकार किए जाने के बावजूद कि सोयाब चोरी में शामिल नहीं थे, कंपनी ने कोई सुधारात्मक कदम नहीं उठाया। उन्होंने कंपनी को लिखित अभ्यावेदन दिया और बाद में श्रम विभाग से संपर्क किया, लेकिन अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है।
नीलम, एक गिग वर्कर, ने कहा कि प्लेटफॉर्म कंपनियां श्रमिकों की लोकेशन 24 घंटे ट्रैक करती हैं, यहां तक कि तब भी जब वे ड्यूटी पर नहीं होते, जो निजता का गंभीर उल्लंघन है। जब श्रमिक इस पर आपत्ति जताते हैं, तो कथित रूप से उनकी आईडी ब्लॉक करने की धमकी दी जाती है। उन्होंने कहा कि कई श्रमिक प्रतिशोध के डर से मीडिया के पास जाने या सार्वजनिक रूप से बोलने से डरते हैं।
शहनाज़ रफीक, ट्रेड यूनियन लीडर, AITUC, ने कहा कि महिला श्रमिकों को धमकाना और उन्हें ट्रेड यूनियन बनाने से रोकना उनके मौलिक और संवैधानिक अधिकारों का स्पष्ट उल्लंघन है। उन्होंने कहा कि महिला गिग वर्कर्स केवल अपनी बुनियादी आवश्यकताओं और सुरक्षा की मांग कर रही हैं, लेकिन वे दिन के समय भी सुरक्षित नहीं हैं, रात की तो बात ही छोड़िए।
आरिफ, एक गिग वर्कर, ने कहा कि उनकी आईडी अमेज़न कंपनी द्वारा मनमाने ढंग से ब्लॉक कर दी गई। सेवा के दौरान उनका एक दुर्घटना में एक्सीडेंट हो गया और उन्होंने मुआवजे की मांग की, लेकिन कंपनी ने उनके इलाज के लिए कोई मुआवजा प्रदान नहीं किया।
बेबी देवी, एक गिग वर्कर की पत्नी, ने कहा कि उनके पति की ब्लिंकिट से जुड़ी डिलीवरी सेवाओं के दौरान एक दुर्घटना में मृत्यु हो गई। हालांकि, उन्हें न तो ब्लिंकिट द्वारा और न ही सरकार द्वारा कोई मुआवजा प्रदान किया गया।
Gig & Platform Service Workers Union (GIPSWU) ने एक बार फिर एक पृथक, प्रवर्तनीय कानून के तत्काल निर्माण, सामाजिक सुरक्षा संरक्षण, निष्पक्ष मजदूरी, पारदर्शी शिकायत निवारण तंत्र तथा शोषणकारी एल्गोरिदमिक प्रथाओं को समाप्त करने की अपनी मांग को दोहराया।


