नोएडा प्राधिकरण एक कंपनी की तरह काम कर रही है - संजीव पुरी
नोएडा प्राधिकरण, जिसकी स्थापना 17 अप्रैल, 1976 में हुई। नोएडा में जो लोग दिल्ली से और अन्य प्रदेशों से बसने के लिए आए उनको उस समय नोएडा प्राधिकरण ने उद्योग, आवास और रोजगार दिया। प्राधिकरण के द्वारा औद्योगिक और आवासीय स्कीमें भी आईं जो कि लॉटरी के द्वारा निकाली जाती थी जिससे बहुत से आम व्यक्ति खास (करोड़पति) बने। परन्तु अब पिछले 7-8 वर्षों से नोएडा प्राधिकरण एक कंपनी की तरह काम कर रही है जिसका उद्देश्य सिर्फ और सिर्फ कंपनी को लाभ पहुंचाना है, अब उनको आम आदमी से किसी भी प्रकार का सारोकार नहीं है ये कहना है पंजाबी विकास मंच डिप्टी चेयरमैन एवं पूर्व आरडब्ल्यूए अध्यक्ष सेक्टर-56, नोएडा संजीव पुरी का
सबसे पहले प्राधिकरण ने वन टाइम लीज रेंट जो कि पहले एक मुश्त ग्यारह वर्ष का इकट्ठा जमा करवाया जाता था और अब इसको प्राधिकरण ने बढ़ा करके पन्द्रह वर्ष कर दिया मतलब जो व्यक्ति पंद्रह वर्ष का इकट्ठा लीज रेंट जमा कराएगा उसी का वनटाइम लीज रेंट माना जाएगा।
कंपनी इससे भी फायदे में नहीं आई तो प्राधिकरण ने प्लॉट आवंटन वाली स्कीम को नीलामी के द्वारा प्लाट देने शुरू कर दिये, प्लॉट नीलामी की स्कीम आने के बाद मध्यम वर्ग की पहुंच से बाहर नोएडा के प्लॉट हो गये।
नोएडा प्राधिकरण के द्वारा सेक्टरों में वेंडर जोन बनाना।
मध्यमवर्गीय घरों में धारा 10 का नोटिस चिपकाना।
मध्यम वर्गीय को इतना शोषित करने के बाद भी प्राधिकरण संतुष्ट नहीं हुई।
अब जबकि उत्तर प्रदेश में यह नियम है कि 18 m रोड या उससे ज्यादा पर मिक्सलैंड यूज कर सकते हैं। उसके बाद भी नोएडा प्राधिकरण के द्वारा पहले 24 m रोड या उससे ऊपर रोड पर रिहायशी सेक्टर के सर्कल रेट और उस सेक्टर के कमर्शियल के सर्कल रेट के अंतराल का 10% कन्वर्जन चार्ज लगता था मिक्सलैंड यूज के लिए। जो कि अब बढ़ाकर औद्योगिक में 25% और रिहायशी में 50% कन्वर्जन चार्ज लगेगा।
परन्तु हाल फिलहाल में किसानों का डेलीगेशन नोएडा प्राधिकरण में अधिकारियों से मिलकर आए। मिलने के बाद अधिकारियों ने उनको आश्वासन और लिखित पत्र दे दिया कि आपके 5% वाले जो भी प्लॉट हैं, उस पर पहले के नियम ही लागू रहेंगे यह अच्छी बात है।
अभी तक यह समझ नहीं आया कि शहर का जो नेतृत्व कर रहे हैं, जैसे फोनरवा के अध्यक्ष, एनईए के अध्यक्ष, डीडीआरडब्ल्यूए के अध्यक्ष क्यों नहीं अब तक नोएडा प्राधिकरण के अधिकारियों से मिले। क्या ये लोग किसान नेताओं की तरह सकारात्मक परिणाम नहीं निकाल सकते थे??ये लोग हमारा नेतृत्व कर रहे है। क्योंकि ये लोग शहरवासियों का नेतृत्व कर रहे हैं इसलिए नोडियन सभी नेताओं से पूछना चाहते है।
हमारे एमएलए और एम पी को नोडियन रिकार्ड तोड़ वोट से जीतवाते हैं। क्या वह इस चीज़ को नहीं देख रहे? क्या ये सही हो रहा है? क्या हम लोगों को शोषित होते देख कर हमारे प्रतिनिधियों ने आँखें बंद की हुई हैं?
नोएडा प्राधिकरण के द्वारा हम लोगों को शोषित किया जा रहा है।
नोएडा के लोग सबसे ज्यादा परेशान इसलिए हैं कि नोएडा के लोग शुरू से ही भाजपा को वोट देते आए हैं और भाजपा के प्रतिनिधियों को बंपर वोटों से जितवाते हैं परन्तु फिर भी, ऐसा क्यों लगता है कि जब से भाजपा आई है, उसके बाद से ही वन टाइम लीज रैंट को 11 से 15 साल का करना, धारा 10 को लगाना, वेंडर जोन को सेक्टरो में स्थापित करना, प्लॉटों को आवंटन प्रक्रिया के बजाये नीलामी के द्वारा लाना और अब मिक्सलैंड यूज चेंज पर कन्वर्जन चार्जेस 10% प्रतिशत से 50% करना हम लोगों को हर तरफ से मार पड़ रही है ऐसा क्यों?


