पिछले बारह वर्षों से पंजाबियों की अवहेलना की जा रही है और इस सच्चाई को कोई छुपा नहीं सकता— संजीव पुरी
नोएडा। भारतीय जनता पार्टी के सत्ता तक का सफर आसान नहीं था इस सफर को आसान करने के लिए पंजाबी मूल के लोगों का बहुत बड़ा योगदान रहा है। जिसमें केदारनाथ साहनी, मदन लाल खुराना, विजय कुमार मल्होत्रा,अरुण जेटली और ओपी कोहली जैसे दिग्गज नेताओं ने पार्टी की कमान संभाली और पार्टी को सत्ता में लाए है और जब तक ये नेता रहे, तब तक पंजाबी मूल के लोगों का दबदबा पार्टी में रहा। इस बात को कोई भी नकार नहीं सकता परन्तु अब पिछले बारह वर्षों से पंजाबियों की अवहेलना की जा रही है और इस सच्चाई को कोई छुपा नहीं सकता।
ये पार्टी में स्पष्ट दिख रहा है और पंजाबी मूल के लोग पार्टी के इस व्यवहार को देख रहे हैं और महसूस कर रहे हैं ये सब देख करके पंजाबी मूल के लोगों को अतीत की याद आ जाता है किस तरह से मदनलाल खुराना जी को मुख्यमंत्री पद से हटाया गया,किस तरह से मनोहर लाल खट्टर जी जिनकी एक ईमानदार छवि थी उनको हरियाणा के मुख्यमंत्री पद से हटाया गया और दिल्ली में पंजाबी मूल के व्यक्ति को मुख्यमंत्री न बनाना परंतु अब उत्तर प्रदेश में किस तरह से संगठन में पंजाबी मूल के कार्यकर्ताओं का सफाया किया जा रहा है। उत्तर प्रदेश में हमेशा यह इतिहास रहा है की कम से कम 5 से 6 जिलाध्यक्ष पंजाबी मूल के बनते ही थे और संगठन में भी पंजाबी मूल के लोगों को सम्मानजनक स्थान मिला करता था परंतु इस बार संगठन में न तो पंजाबी मूल के किसी व्यक्ति को जिला अध्यक्ष बनाया गया और न ही संगठन में कोई स्थान दिया गया।
इस बिंदु को भाजपा हाईकमान को विचार करना चाहिए कि वो उस पंजाबी समाज को अनदेखा कर रहे हैं जिस समाज ने पार्टी का साथ उस समय दिया जिस समय दूसरे लोग भाजपा का झंडा उठाने से कतराते थे, वैसे तो स्वाभाविक ही है राजनीतिक दृष्टि से सभी समाज के नेता जो पार्टी में है वह अपने समाज के लोगों को संगठन में सम्मानजनक (उचित) स्थान दिलवाने की कोशिश करते हैं परंतु हमारे समाज के केन्द्र में तरुण चुग, मनोहर लाल ठक्कर और हरदीप सिंह पुरी और उत्तर प्रदेश में हमारे समाज के सतीश महाना जी और सुरेश खन्ना जी जैसे दिग्गज नेताओं के रहते हुए भी पंजाबी समाज को न तो एनसीआर में और ना ही उत्तर प्रदेश में कोई भी समानजनक स्थान नहीं मिल रहा बल्कि पंजाबी समाज के लोगों की अवहेलना हो रही है, हमारे दिग्गज नेताओं को चाहिए कि
कम से कम एनसीआर में और उत्तर प्रदेश में पंजाबी मूल के व्यक्तियों को जहां पंजाबियों का प्रभाव है, वहां एमएलए, एमपी की टिकट दिलवाई जाए, या संगठन में उचित स्थान दिलवाया जाए और अब तक हमारे नेताओं के द्वारा यह नहीं सोचा जा रहा कि इनके बाद हमारे पंजाबी नेता कौन होगा, इन लोगों को चाहिए कि अपने विकल्प के लिए आगे किसी और पंजाबी मूल के व्यक्ति को जो पंजाबी मूल का व्यक्ति राजनीति कर रहा है, उनको लाया जाए और उन लोगों को प्रमोट किया जाए जिससे हमें भविष्य में किसी प्रकार की दिक्कत न हो।
उत्तर प्रदेश में 65 से 70 शहरी सीटें हैं। जिनमें कम से कम 15 सीटों में पंजाबी मूल के लोगों का प्रभाव है। वहां संगठन को चाहिए कि पंजाबी मूल के लोगों का जहां भी प्रभाव है वहां पर पंजाबी मूल के लोग जिलाध्यक्ष , एमएलए या एमपी बनाए जाएं।
पंजाबी मूल के लोगों के लिए, यह विचारणीय विषय है। जिस पार्टी को पंजाबियों ने खून पसीने से सत्ता तक ले कर आए, उस पार्टी में ही पंजाबियों कि इस तरह से अवहेलना की जाए, यह पंजाबियों के लिए असहनीय है। क्योंकि अब पंजाबी मूल के लोगों में राजनीतिक समझ आ चुकी है,वह जानता है, राजनीतिक दृष्टि से क्या सही है और क्या गलत।
पंजाबी मूल के लोग भाजपा को सत्ता में लाने के लिए जनसंघ के जमाने से प्रयास कर रहे थे और उस समय से पंजाबी मूल के लोग भाजपा की सेवा कर रहे हैं, परंतु आज परिणाम यह मिल रहा है कि चुन चुन कर पंजाबी मूल के लोगों को पार्टी से बाहर निकाला जा रहा है।
भाजपा में पंजाबी मूल के व्यक्ति को आगे जानबूझकर नहीं लाया जा रहा और अगर खानापूर्ति के लिए पंजाबियों को लेना भी पड़ रहा है तो उन लोगों को लिया जा रहा है जिनमें नेतृत्व की क्षमता ही नहीं है वह कार्यकर्ता तो हैं परंतु नेता नहीं हैं और जो नेता हैं उनको बर्फ में लगा दिया गया है और जिन पंजाबी मूल के व्यक्तित्व को छोटा मोटा पद दिया भी जा रहा है तब जानबूझकर उनकी संगठन में बेजती की जाती है और उनका मनोबल तोड़ने का पूर्ण प्रयास किया जाता है। क्योंकि पार्टी को गलतफहमी है कि पंजाबी मूल के व्यक्तियों के साथ जैसा भी व्यवहार कर लो ये वोट तो भाजपा को ही देंगे अगर भाजपा इस तरह से सोच रही है तो आने वाले चुनावों में भाजपा को प्रणाम भुगतना होगा।
साभार: संजीव पुरी वरिष्ठ भाजपा नेता ,नोएडा एवं डिप्टी चेयरमैन पंजाबी विकास मंच


