संत ईश्वर सम्मान की 10 वर्षों की गौरवशाली यात्रा, भारत के महान समाज सेवियों को किया सम्मानित
संत ईश्वर फाउंडेशन ने 5 अक्टूबर 2025 को नई दिल्ली स्थित भारत रत्न सी. सुब्रमण्यम ऑडिटोरियम में प्रतिष्ठित संत ईश्वर सम्मान का 10वां संस्करण भव्य रूप से आयोजित किया। “सेवा के दस वर्ष” पूरे करने के इस विशेष अवसर पर, फाउंडेशन ने 18 महान व्यक्तियों और संस्थाओं को सम्मानित किया तथा तीन श्रेणियों में कुल ₹32 लाख की अनुदान राशि प्रदान की।
2015 में आरंभ हुए इस वार्षिक सम्मान के माध्यम से अब तक 153 समाजसेवियों को ₹3 करोड़ से अधिक की सहायता राशि प्रदान की जा चुकी है। यह सम्मान उन जमीनी स्तर पर कार्य करने वाले निःस्वार्थ कर्मयोगियों को समर्पित है, जिन्होंने जनजातीय विकास, ग्रामीण उत्थान, महिला एवं बाल कल्याण जैसे क्षेत्रों में उल्लेखनीय योगदान दिया है।

इस अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरकार्यवाह श्री दत्तात्रेय होसबाले उपस्थित थे. तो वहीं विशिष्ट अतिथि के रूप में श्री शिवराज सिंह चौहान, माननीय केंद्रीय मंत्री, ग्रामीण विकास एवं कृषि और किसान कल्याण मंत्रालय; तथा श्री भूपेंद्र यादव, माननीय केंद्रीय मंत्री, पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय शामिल थे। समारोह में देशभर से आए सामाजिक कार्यकर्ता, शिक्षाविद्, मंत्रालयों के अधिकारी एवं नागरिक समाज के प्रतिनिधि भी मौजूद रहे।
कार्यक्रम का शुभारंभ एक भावनात्मक सांस्कृतिक प्रस्तुति से हुआ, जिसमें मल्लखंभ, गणपति बप्पा और महादेव को समर्पित नृत्य, महिला सशक्तिकरण पर आधारित कथक, राष्ट्रभक्ति पर केंद्रित प्रस्तुतियाँ और ‘ऑपरेशन सिंदूर’ नामक प्रभावशाली नृत्य-नाट्य शामिल रहे। इस अवसर पर फाउंडेशन की दस वर्ष की प्रेरणादायक यात्रा को दर्शाने वाली कॉफी टेबल बुक का भी विमोचन किया गया।
इस अवसर पर फाउंडेशन के संस्थापक एवं अध्यक्ष श्री कपिल खन्ना ने कहा,” दस वर्ष पहले हमने एक छोटे से संकल्प के साथ संस्था की शुरुआत की थी—उन मूक समाजसेवियों को सम्मान देने के लिए, जो बिना नाम और प्रसिद्धि के समाज के लिए कार्य करते हैं। आज इन महान व्यक्तियों को सम्मानित करते हुए हमें स्वयं गर्व की अनुभूति होती है। इस यात्रा में हमारा परिवार लगातार बढ़ा है। इस वर्ष हमने समाज को एक विशेष संदेश देने के लिए अपना निमंत्रण कार्ड पॉकेट साइज में रखा, ताकि हम पर्यावरण की रक्षा करते हुए कागज़ की अनावश्यक बर्बादी रोक सकें।”
विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित माननीय मंत्री श्री भूपेंद्र यादव ने अपने संबोधन में कहा, “स्वदेशी भारत और आत्मनिर्भर भारत का अर्थ है—समाज का प्रत्येक व्यक्ति आत्मनिर्भर बने और सामूहिक रूप से प्रगति करे। आज जारी की गई कॉफी टेबल बुक का उपशीर्षक ‘बिल्डिंग द बेटर भारत’ तभी सार्थक होता है जब हम उन लोगों को पहचानें और सम्मानित करें जो निःस्वार्थ भाव से समाज के लिए कार्य करते हैं। यही कार्य संत ईश्वर फाउंडेशन पिछले दस वर्षों से कर रहा है, जो अत्यंत सराहनीय है।”
कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित केंद्रीय मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने वक्तव्य में कहा,” जीवन का वास्तविक अर्थ दूसरों के लिए उपयोगी बनने में है। यही संदेश इस भूमि ने हजारों वर्ष पहले दिया था – ‘आत्मवत् सर्वभूतेषु’। आज हमने उन महान आत्माओं को नमन किया, जिन्होंने मानवता की सच्ची सेवा को अपने जीवन का लक्ष्य बनाया।”
समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सरकार्यवाह श्री दत्तात्रेय होसबाले ने अपने बीज वक्तव्य में कहा,”जो समाज में ‘नर सेवा नारायण सेवा’ की भावना को अपनाकर निःस्वार्थ रूप से कार्य कर रहे हैं, ऐसे महान व्यक्तित्वों को पिछले दस वर्षों से संत ईश्वर फाउंडेशन द्वारा सम्मानित किया जा रहा है। मैं इन सभी के कार्यों की हृदय से सराहना करता हूँ।”
इस वर्ष के सम्मान तीन प्रमुख श्रेणियों में दिए गए—विशिष्ट सेवा सम्मान, सेवा सम्मान, और विशेष सेवा सम्मान, जिनमें चार प्रमुख कार्यक्षेत्र शामिल थे: जनजातीय विकास, ग्रामीण विकास, महिला एवं बाल विकास, और भारतीय विचारों पर आधारित विशेष योगदान।
विशिष्ट सेवा सम्मान के अंतर्गत चार व्यक्तियों/संस्थाओं को ₹5 लाख की अनुदान राशि प्रदान की गई —
•गोवर्धन पांडा (कोरापुट, ओडिशा) – आदिवासी समुदायों के उत्थान हेतु
•देवेन्द्रप्पा (यादगीर, कर्नाटक) – ग्रामीण विकास के लिए
•जीवन आनंद संस्थान, (महाराष्ट्र) – महिला एवं बाल विकास में योगदान हेतु
•समर्पण फाउंडेशन, (उत्तर प्रदेश) – भारतीय चिंतन एवं सामाजिक योगदान हेतु
सेवा सम्मान के अंतर्गत ₹1 लाख की राशि सहित 12 व्यक्तियों एवं संस्थाओं को सम्मानित किया गया —
जनजातीय विकास के क्षेत्र में: महामंडलेश्वर रघुनाथ दास जी फर्सीवाले बाबा (महाराष्ट्र), डा. अंबेडकर वनवासी कल्याण ट्रस्ट (गुजरात), श्री कटुंग वाघे (अरुणाचल प्रदेश)।
ग्रामीण विकास में: ग्राम विकास संघम (आंध्र प्रदेश), रेखा प्रभाकर चौहान (महाराष्ट्र), निधि त्रिपाठी (उत्तर प्रदेश)।
विशेष योगदान के तहत: श्री मारिंगमेई गैंगमलुंग (मणिपुर), मातृ छाया ट्रस्ट (गोवा), केशव सेवा धाम दिव्यांग आश्रम (मध्य प्रदेश)।
महिला एवं बाल विकास में: किसनराव अंजना बाबनराव चौरे (महाराष्ट्र), चित्रा शाह (पुडुचेरी), मानव सेवा संस्थान एजुकेशनल एंड सोशल वेलफेयर ट्रस्ट (बिहार), पोटुकुची श्रीनिवास (तेलंगाना)।
विशेष सेवा सम्मान के तहत दो राष्ट्रीय स्तर पर प्रभावशाली संस्थाओं — AWWA (Army Wives Welfare Association) और नेत्र कुंभ 2025 को सम्मानित किया गया।
AWWA, जो 1966 में स्थापित हुई, लगातार सेना परिवारों को कौशल विकास, शिक्षा और वीर नारियों के सम्मानजनक पुनर्वास में सहयोग देती रही है।
वहीं, नेत्र कुंभ 2025 ने प्रयागराज महाकुंभ के दौरान लाखों श्रद्धालुओं को निःशुल्क नेत्र जांच, दवाइयाँ, चश्मे एवं उपचार प्रदान कर अंधत्व निवारण की दिशा में उल्लेखनीय योगदान दिया।
उल्लेखनीय है कि संत ईश्वर सम्मान का यह प्रयास समाज में निःस्वार्थ सेवा, करुणा और मानवता की कहानियों को प्रकाश में लाने का है—ऐसी प्रेरक यात्राएँ जो न केवल सम्मानित व्यक्तियों का गौरव बढ़ाती हैं, बल्कि पूरे समाज को भी अपने जीवन में इन मूल्यों को अपनाने के लिए प्रेरित करती हैं


