बैंकर कुलभूषण पराशर और उनसे जुड़े लगभग 20 प्रतिष्ठानों पर एक साथ बड़ी कार्रवाई, 20 से ज्यादा टीमें और 200 से अधिक अधिकारी तैनात
नोएडा। देश के शेयर बाजार में जारी तेजी और आईपीओ की बाढ़ के बीच अब एक बड़ा सच सामने आने लगा है। आम निवेशक जहां मुनाफे के सपने देख रहा था, वहीं पर्दे के पीछे कुछ लोग आईपीओ को लूट का औज़ार बना चुके थे। इसी काले खेल पर अब आयकर विभाग ने सीधा प्रहार किया है।
बीते दो दिनों से आयकर विभाग, नोएडा की जांच शाखा ने प्रधान आयकर निदेशक(जाँच), कानपुर के नेतृत्व में दिल्ली आधारित मर्चेंट बैंकर कुलभूषण पराशर और उनसे जुड़े लगभग 20 प्रतिष्ठानों पर एक साथ बड़ी कार्रवाई छेड़ रखी है। यह कार्रवाई देश के 3 से अधिक शहरों में फैले ठिकानों पर की जा रही है, जिसमें विभाग की 20 से ज्यादा टीमें और 200 से अधिक अधिकारी तैनात हैं।
सूत्रों के मुताबिक, अब तक की जांच में SME आईपीओ से जुड़ी गंभीर अनियमितताओं, नियमों की खुली धज्जियाँ और मासूम निवेशकों के साथ सुनियोजित धोखाधड़ी के ठोस सबूत हाथ लगे हैं। जांच में सामने आया है कि खासतौर पर छोटी और मझोली कंपनियों के आईपीओ में बढ़ती मध्यम वर्गीय भागीदारी को निशाना बनाया गया।
रिश्तेदार, नौकर और फर्जी निवेशक—पूरा खेल पहले से तय
जांच एजेंसियों का कहना है कि आईपीओ लाने से पहले ही कंपनियां अपने रिश्तेदारों, करीबी संपर्कों और यहां तक कि घरेलू नौकरों के नाम पर बिना किसी वास्तविक भुगतान के शेयर अलॉट कर देती थीं। इसके बाद उन्हीं शेयरों को योजनाबद्ध तरीके से रूट कर असली लाभार्थियों के नाम कर दिया जाता था।
इस कृत्रिम मांग और कीमतों के खेल में आम निवेशक फंसता गया और कुछ लोग करोड़ों का अवैध मुनाफा समेटते रहे। यही नहीं, इस पूरे नेटवर्क के तार दिल्ली, मुंबई, कोलकाता से लेकर दुबई तक फैले हवाला लेन-देन से जुड़े पाए गए हैं, जिनसे संबंधित अहम दस्तावेज जब्त किए गए हैं।
बेनामी संपत्ति और एजेंसियों की एंट्री..
पराशर और उससे जुड़े अन्य ठिकानों से बेनामी संपत्तियों और अघोषित आय से जुड़े कई चौंकाने वाले खुलासे भी सामने आए हैं। विश्वस्त सूत्रों की मानें तो इस मामले की जानकारी भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी) सहित अन्य केंद्रीय जांच एजेंसियों को भी साझा की जा सकती है ।
अब माना जा रहा है कि जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ेगी, आईपीओ के नाम पर निवेशकों से खिलवाड़ करने वाले और भी बड़े नाम बेनकाब हो सकते हैं।


