इंसान का अपनी वास्तविक पहचान से दूर होने का सजीव मंचन
सुपवा में नाटक ‘बियोंड द इमेजिनेशन’ के तीन दिवसीय मंचन का समापन
रोहतक। दादा लख्मी चंद स्टेट यूनिवर्सिटी ऑफ परफॉर्मिंग एंड विजुअल आर्ट्स (डीएलसीसुपवा) में गुरुवार को नाटक ‘बियोंड द इमेजिनेशन’ के तीन दिवसीय मंचन का समापन हो गया। इसमें फिल्म एवं टेलीविजन फैकेल्टी के एक्टिंग डिपार्टमेंट के छात्रों ने इंसान का अपनी वास्तविक पहचान से दूर होने का सजीव मंचन किया।
गुरुवार को शो के दौरान हरियाणा कला परिषद के निदेशक नागेंद्र शर्मा ने बतौर अतिथि शिरकत की। इस दौरान डीएलसीसुपवा के कुलगुरु डॉ अमित आर्य, रजिस्ट्रार डॉ गुंजन मलिक मनोचा ने छात्रों की हौंसला अफजाई की। नाटक ‘बियोंड द इमेजिनेशन’ का मंचन फिल्म एवं टेलीविजन फैकेल्टी के एक्टिंग डिपार्टमेंट के छात्रों ने मिनी ऑडिटोरियम में किया। इसके लगातार तीन दिन तक पांच शो किए गए। यह मराठी के प्रसिद्ध नाटक प्रतिबिंब पर आधारित रहा, जिसे जाने-माने लेखक, साहित्यकार महेश एलकुंचवार ने लिखा है। नाटक में दिखाया गया कि मनुष्य अपने ही प्रतिबिंब, यानी अपनी वास्तविक पहचान से दूर होता जा रहा है। आधुनिक जीवन की दौड़, सामाजिक अपेक्षाएं व आत्मकेंद्रितता उसे मानसिक रूप से खोखला बना देती है। नाटक के जरिए अस्तित्वगत चिंता और जीवन के अर्थ की खोज जैसे गहरे प्रश्न उठाए गए।
एक्टिंग के चौथे सेमेस्टर के छात्र भारती, प्रिंस व पुष्कर इसके मुख्य पात्र रहे। इसका निर्देशन एनएसडी से स्नातक सुशील कांत ने किया, जबकि प्रॉडक्शन डिजाइन की जिम्मेदारी बिपिन गोबाले ने संभाली। एनएसडी की ही पूर्व छात्रा पाली फुकॉन ने कॉस्ट्यूम डिजाइन किया। इसका हिंदी अनुवाद वसंत देव ने किया, जबकि साउंड की जिम्मेदारी दीपा वर्मा ने संभाली। नाटक ‘बियोंड द इमेजिनेशन’ के मंचन के दौरान आम जनता के लिए एंट्री निशुल्क रही। थियेटर, नाटक व कला प्रेमियों ने जीवंत प्रस्तुति के लिए सुपवा के छात्रों की सराहना की। दर्शकों को थियेटर वाला अहसास कराने के लिए एफटीवी स्थित मिनी ऑडिटोरियम के मंच को भव्य सेट का रूप दिया गया। मुंबई से आई एक्सपर्ट की टीम ने सुपवा के छात्र कलाकारों की लगातार जिस तरह से रिहर्सल कराई, उसका परिणाम उनकी अदाकारी में साफ झलकता नजर आया।


