फर्स्ट सोलर ने भारत में अपने 3.3 गीगावॉट क्षमता वाले विनिर्माण संयंत्र का किया उद्घाटन

यह भारत का पहला पूरी तरह वर्टिकली इंटिग्रेटेड सौर विनिर्माण संयंत्र है

भारत। फर्स्ट सोलर इंक (नैस्डैकः एफएसएलआर) ने आज तमिलनाडु में अपने पहले संयंत्र का उद्घाटन (अनवील) किया। यह कंपनी का देश में पहला पूरी तरह वर्टिकली इंटिग्रेटेड सौर विनिर्माण संयंत्र है। इस अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में तमिलनाडु सरकार के उद्योग, संवर्धन और वाणिज्य (इंडस्ट्रीज, प्रमोशंस और कॉमर्स) मंत्री डॉ. टी आर बी राजा के साथ-साथ भारत में अमेरिका के राजदूत एरिक गार्सेटी और यूएस इंटरनेशनल डेवलपमेंट फाइनेंस कॉर्पोरेशन (डीएफसी) के चीफ एग्जीक्यूटिव ऑफिसर स्कॉट नाथन उपस्थित रहे।

डॉ. टी आर बी राजा ने कहा, “हमें खुशी है कि फर्स्ट सोलर ने इस ऐतिहासिक निवेश के लिए तमिलनाडु को चुना, जिससे भारत के विनिर्माण केंद्र के रूप में हमारे राज्य की स्थिति मजबूत हुई।” उन्होंने कहा, “यह कारखाना स्थिरता और बेहतर विनिर्माण की दिशा में एक उच्च मानक स्थापित करता है और हमारे राज्य में अपनी उपस्थिति के साथ अच्छी नौकरियां पैदा करता है, और इससे सौर प्रौद्योगिकी के मामले में आत्मनिर्भर बनने की भारत की महत्वाकांक्षा को समर्थन मिलता है। इस काम के लिए तमिलनाडु को चुनने पर श्री मार्क विडमर और उनकी टीम को विशेष धन्यवाद।

फर्स्ट सोलर के सीरीज 7 फोटोवोल्टिक (पीवी) सौर मॉड्यूल का उत्पादन करने वाले इस संयंत्र की सालाना नेमप्लेट क्षमता 3.3 गीगावाट (जीडब्ल्यू) है और यह प्रत्यक्ष रूप से लगभग 1,000 लोगों को रोजगार देता है। इस मॉड्यूल को अमेरिका में कंपनी के अनुसंधान और विकास केंद्रों में विकसित किया गया था और भारतीय बाज़ार को ध्यान में रखते हुए इसे अनुकूलित किया गया था।
फर्स्ट सोलर अमेरिकी मुख्यालय वाली अकेली कंपनी होने के कारण दुनिया के सबसे बड़े सौर विनिर्माताओं में बेजोड़ है। कंपनी का टेल्यूरियम-आधारित सेमीकंडक्टर आज उपलब्ध दूसरी सबसे आम फोटोवोल्टिक तकनीक है, जो इसे चीनी क्रिस्टलीय सिलिकॉन आपूर्ति श्रृंखलाओं पर निर्भरता से बचने में सक्षम बनाता है।

राजदूत एरिक गार्सेटी ने कहा, “एक महीने पहले दुबई में, सीओपी28 प्रतिभागियों ने 2050 तक नेट-जीरो उत्सर्जन हासिल करने के लिए, दुनिया को जीवाश्म ईंधन से दूर जाने के लिए एक साहसिक आह्वान किया था। फर्स्ट सोलर का यह उत्पादन संयंत्र हमारे स्वच्छ, हरित ऊर्जा की ओर वैश्विक बदलाव को संभव बनाने में मदद करेगा। यह इस बात का एक बेहतरीन उदाहरण है कि जब संयुक्त राज्य अमेरिका और भारत जलवायु से जुड़े लक्ष्य हासिल करने के लिए सरकारी और निजी क्षेत्रों में मिलकर काम करते हैं तो क्या हासिल किया जा सकता है।”
लगभग 700 मिलियन डॉलर के निवेश वाला यह संयंत्र फर्स्ट सोलर का छठा परिचालन कारखाना है और इसके साथ कंपनी के वैश्विक विनिर्माण का अमेरिका, मलेशिया और वियतनाम सहित चार देशों में विस्तार हो गया है। इसमें पहले घोषित डीएफसी के लिए 500 मिलियन डॉलर का वित्तपोषण शामिल है।

डीएफसी के सीईओ स्कॉट नाथन ने कहा, “संयुक्त राज्य अमेरिका दुनिया भर में महत्वपूर्ण ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखलाओं में विविधता लाने और भारत में आर्थिक विकास को बढ़ावा देने के लिए अमेरिकी नवाचार और प्रौद्योगिकी का दोहन कर रहा है।” उन्होंने कहा, “यह संयुक्त राज्य अमेरिका के लिए अच्छा है और यह भारत के लिए भी अच्छा है। इस 500 मिलियन डॉलर के वित्तपोषण से डीएफसी के सबसे बड़े बाजार और एक गतिशील निजी क्षेत्र के साथ समान विचारधारा वाले भागीदार भारत के साथ हमारी साझेदारी की बढ़ती ताकत का पता चलता है।”

इस दशक की शुरुआत के बाद से, फर्स्ट सोलर ने 4.1 बिलियन डॉलर की विनिर्माण विस्तार रणनीति शुरू की है, जिससे इसका परिचालन 2020 के लगभग 6 गीगावॉट से बढ़कर 2023 के अंत में 16 गीगावॉट वैश्विक नेमप्लेट क्षमता तक पहुंच गया है। इसके भारतीय संयंत्र के अलावा, कंपनी ने 2023 में ही ओहियो में स्थित अपना तीसरा अमेरिकी कारखाना भी चालू किया। कंपनी अपने ओहियो स्थित विनिर्माण परिसर के 0.9 गीगावॉट विस्तार और अलबामा और लुइसियाना राज्यों में नए कारखानों के साथ अमेरिका में अपनी पहुंच को और बढ़ा रही है, जिनमें से प्रत्येक के स्थापित होने और चालू होने के बाद वार्षिक नेमप्लेट क्षमता 3.5 गीगावॉट बढ़ने का अनुमान है। कंपनी को 2026 तक वैश्विक सालाना नेमप्लेट क्षमता 25 गीगावॉट के स्तर पर पहुंचने का अनुमान है।

फर्स्ट सोलर के सीईओ मार्क विडमर ने कहा, “इस ऐतिहासिक विनिर्माण संयंत्र का उद्घाटन और भारत में ग्राहकों के लिए वाणिज्यिक आपूर्ति की शुरुआत दीर्घकालिक और टिकाऊ विकास की हमारी यात्रा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है।” उन्होंने कहा, “जिस गति से हम इस संयंत्र का निर्माण और इसे चालू करने में सक्षम हुए हैं, वह भारत की संघीय और तमिलनाडु राज्य की सरकारों की नीतियों का ही प्रमाण है।”

विडमर ने कहा, “हमें अपने सहयोगियों पर गर्व है जिन्होंने भारत के लिए हमारे उन्नत सौर विनिर्माण टेम्पलेट को तैयार करने और अनुकूलित बनाने के लिए अथक प्रयास किए। उनके काम के दम पर ही, हमारे नवीनतम संयंत्र से न केवल हमारा वैश्विक विनिर्माण बढ़ा है, बल्कि यह हमारे उद्योग के लिए मानक भी तय करता है।”

उच्च बेसलाइन जल क्षेत्र वाले क्षेत्र में स्थित यह फैक्ट्री दुनिया की पहली नेट-जीरो जल निकासी वाली सौर विनिर्माण सुविधा मानी जाती है। स्थानीय जल संसाधनों पर इसके प्रभाव को कम करने के लिए डिजाइन की गई यह सुविधा पूरी तरह से शहर के सीवेज उपचार संयंत्र से तृतीयक उपचारित रिवर्स ऑस्मोसिस पानी पर निर्भर करेगी और इससे किसी भी तरह अपशिष्ट जल नहीं निकलेगा। इसके अलावा, इस कारखाने में भारत का पहला सौर पीवी रीसाइक्लिंग संयंत्र है। कंपनी ने अच्छे स्तर की सौर रीसाइक्लिंग का बीड़ा उठाया है, जो नए मॉड्यूल में उपयोग के लिए क्लोज-लूप सेमीकंडक्टर रिकवरी प्रदान करता है, जबकि इससे एल्यूमीनियम, कांच और लैमिनेट्स सहित अन्य सामग्रियां भी फिर से प्राप्त होती हैं।