तापमान के उतार-चढ़ाव से सर्दी-जुकाम, वायरल बुखार, एलर्जी और डिहाइड्रेशन के मामले बढ़े

तापमान के उतार-चढ़ाव से सर्दी-जुकाम, वायरल बुखार, एलर्जी और डिहाइड्रेशन के मामले बढ़े

डॉक्टरों ने कहा कि बदलते मौसम में बढ़ रहीं मौसमी बीमारियां, सतर्कता है जरूरी

नोएडा। बदलते मौसम के साथ मौसमी बीमारियों का प्रकोप भी बढ़ने लगा है। इसी कारण इस समय मौसमी बीमारियों के मामले तेजी से बढ़ने लगे हैं। अस्पतालों और क्लीनिकों में सर्दी-जुकाम, वायरल बुखार, एलर्जी, गले का संक्रमण और डिहाइड्रेशन के मरीजों की संख्या बढ़ी है। डॉक्टरों का कहना है कि थोड़ी सी लापरवाही से ये बीमारियां तेजी से फैल सकती हैं, इसलिए इस मौसम में विशेष सावधानी जरूरी है।
फेलिक्स हॉस्पिटल के फिजिशियन ने बताया कि मार्च का महीना मौसम के बदलाव का समय होता है।

सर्दी धीरे-धीरे खत्म होती है और गर्मी की शुरुआत होने लगती है। दिन में गर्मी और सुबह-शाम हल्की ठंड के कारण शरीर को मौसम के अनुसार ढलने में समय लगता है। बदलते मौसम में कई प्रकार की बीमारियां देखने को मिलती हैं।

इनमें सबसे आम सर्दी-जुकाम और वायरल बुखार है। इसके अलावा गले में खराश, एलर्जी, खांसी, फ्लू, फूड पॉइजनिंग और डिहाइड्रेशन जैसी समस्याएं भी बढ़ जाती हैं। कई लोगों में धूल और पराग कणों की वजह से एलर्जी की शिकायत भी देखने को मिलती है। बच्चों और बुजुर्गों में इन बीमारियों का असर ज्यादा होता है।

मौसम में अचानक बदलाव बीमारियों का सबसे बड़ा कारण होता है। दिन में तेज धूप और सुबह-शाम ठंड रहने से शरीर की प्रतिरोधक क्षमता कमजोर हो जाती है। इसके अलावा धूल, प्रदूषण, गंदा पानी, बासी खाना, संक्रमण और साफ-सफाई की कमी भी बीमारियों को बढ़ावा देती है। ठंड से गर्मी के मौसम में बदलाव के कारण लोग अक्सर कपड़ों और खान-पान में लापरवाही कर देते हैं, जिससे संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है।

बदलते मौसम में होने वाली बीमारियों को मुख्य रूप से वायरल, बैक्टीरियल और एलर्जिक श्रेणियों में बांटा जाता है। वायरल संक्रमण में फ्लू, सर्दी-जुकाम और वायरल बुखार शामिल हैं। बैक्टीरियल संक्रमण में गले का संक्रमण और फूड पॉइजनिंग जैसी समस्याएं आती हैं। वहीं एलर्जिक बीमारियों में धूल या पराग कणों से होने वाली एलर्जी प्रमुख है।

मौसमी बीमारियों के कुछ सामान्य लक्षण इस प्रकार हैं। अगर ये लक्षण लगातार बने रहें तो डॉक्टर से परामर्श लेना जरूरी है। बच्चों और बुजुर्गों को इस मौसम में ज्यादा सावधानी बरतनी चाहिए। अगर बुखार, उल्टी-दस्त या कमजोरी जैसे लक्षण लंबे समय तक बने रहें तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।

सही खान-पान, स्वच्छता और सतर्कता अपनाकर बदलते मौसम की बीमारियों से काफी हद तक बचाव किया जा सकता है। शुरुआती लक्षण दिखाई देने पर पर्याप्त आराम करें। शरीर को हाइड्रेट रखने के लिए पर्याप्त मात्रा में पानी पिएं। हल्का, ताजा और पौष्टिक भोजन लें। जरूरत पड़ने पर डॉक्टर की सलाह से ही दवाएं लें। बुखार या संक्रमण ज्यादा होने पर तुरंत चिकित्सकीय जांच कराएं। बिना डॉक्टर की सलाह के एंटीबायोटिक दवाएं लेने से बचें।

बीमारी के प्रमुख लक्षण: बुखार आना, सिर दर्द होना, नाक बहना, गले में खराश, खांसी, शरीर में दर्द, कमजोरी महसूस होना, कुछ मामलों में उल्टी-दस्त, पेट दर्द, डिहाइड्रेशन, एलर्जी होने पर लगातार छींक आना, आंखों में जलन, त्वचा पर खुजली जैसी समस्याएं,

बचाव और रोकथाम के उपाय:

शरीर की प्रतिरोधक क्षमता मजबूत रखने के लिए संतुलित आहार लें।
पर्याप्त मात्रा में पानी पिएं।
नियमित व्यायाम करें।
सुबह-शाम हल्की ठंड को देखते हुए मौसम के अनुसार कपड़े पहनें।
बाहर का बासी या अस्वच्छ भोजन खाने से बचें।
हाथों को नियमित रूप से साबुन से धोएं।
साफ-सफाई और स्वच्छता का विशेष ध्यान रखें।