बागपत के ईंट भट्टे में बिना वेतन के करवाई जा रही थी जबरन मजदूरी : निर्मल गोराना

बागपत के ईंट भट्टे में बिना वेतन के करवाई जा रही थी जबरन मजदूरी : निर्मल गोराना

मासूम बच्चों से कराई जा रही थी बंधुआ मजदूरी

दिल्ली से कुछ दूरी पर स्थित बागपत जिले के नैथला गांव के केबीएफ  कृष्णा ब्रिक फील्ड  से 28 बंधुआ एवं बाल बंधुआ मजदूरों को मुक्त कराया।

लगभग 4 माह पूर्व रोशनी (बदला हुआ नाम) उम्र 13 वर्ष एवं उसके भाई बहन को पेट भरने के लिए ईंट के भट्टे में काम करना पड़ा किंतु उन्हें नहीं पता था कि वो काम के चक्कर में बंधुआगिरी के शिकार हो जाएंगे। आज मुक्ति के समय ये बच्चे आंखों में आंसू भरकर अपनी मुक्ति एवं मजदूरी मांगते नजर आए किन्तु उनके हाथ खाली थे। रमजान में रोजे के समय जहां लोग भूखे प्यासे रहकर नमाज प्रार्थना करते है वहीं ये बच्चे भूखे प्यासे कठोर श्रम में लगे हुए थे।

वर्ष 2025 के अक्टूबर माह में कुछ मजदूर परिवारों के मुखिया को ईंट भट्टा मालिक विजय पाल पंडित ने एडवांस राशि देकर उनके मुखिया के साथ पूरे परिवारों को जिसमें बच्चे एवं महिलाएं सम्मिलित है को केबीएफ कृष्णा ब्रिक फील्ड में ईंट निकासी के काम में लगाया। मालिक विजयनपाल एवं मुनीम राहुल द्वारा प्रतिदिन सभी मजदूरों एवं बच्चों से 12 घंटे से भी ज्यादा कठोर श्रम करवाया जाता था। फिर ईंट भट्टा मालिक ने माह दिसंबर में इन परिवारों के अन्य मजदूर रिश्तेदारों को भी काम करने के लिए बुला लिया। जब भी मजदूर वेतन की मांग करते तो उन्हें खाने का सामान दे दिया जाता न कि वेतन। मालिक ने मजदूरों को वेतन के बदले खाली पेट भरने का सामान देकर ईंट का कारोबार चलाना चाहा।  मालिक ने मजदूरों को बताया कि उसकी बड़ी पहुंच है और प्रशासन उसकी जेब में रहता है इससे वर्कर्स डर रहे थे कि यदि कही शिकायत कर दी गई तो उल्टी बदले में पिटाई ही मिलेगी इसलिए सब भयभीत एवं चुप थे।

एक मजदूर जिसका नाम सोनू था ने अपने परिवार को मुक्त कराने के लिए दिल्ली पहुंचा जहां नेशनल कैंपेन कमेटी फॉर इरेडिकेशन ऑफ बॉन्डेड लेबर को सारी जानकारी दी और बंधुआ एवं बाल बंधुआ मजदूरों को मुक्त कराने की गुहार लगाईं।



नेशनल कैंपेन कमेटी फॉर इरेडिकेशन ऑफ बॉन्डेड लेबर ने तत्काल मामले का पता कर दिनांक 23 फरवरी, 2025 को जिलाधिकारी बागपत को शिकायत दी एवं 24 फरवरी को  नेशनल कैंपेन कमेटी फॉर इरेडिकेशन ऑफ बॉन्डेड लेबर के अधिवक्ता चौधरी अली जिया कबीर,  अधिवक्ता विनोद कुमार सिंह, नवोदय लोकचेतना कल्याण समिति के महासचिव देवेंद्र धामा, नायब तहसीलदार, सदर अमीन, कोतवाली पुलिस की टीम केबीएफ कृष्णा ब्रिक फील्ड पर पहुंचे और बंधुआ एवं बाल बंधुआ मजदूरों के बयान दर्ज कर उन्हें मुक्त कराया।  

इधर बाल बंधुआ मजदूरों की मां ने बाल कल्याण समिति बागपत के समक्ष बाल बंधुआ मजदूरों को मुक्त करने की गुहार लगाई किंतु चाइल्ड लाइन ने लेबर ऑफिस नहीं होने के कारण बच्चों की मुक्ति में भाग ही नहीं लिया जिसका बाल बंधुआ मजदूरों की मां को बड़ा अफसोस रहा।

नेशनल कैंपेन कमेटी फॉर इरेडिकेशन ऑफ बॉन्डेड लेबर के कनवीनर निर्मल गोराना ने बताया कि बंधुआ मजदूरी कानून को लागू करने के लिए अभी बागपत प्रशासन को और भी अत्यधिक संवेदनशील होने की आवश्यकता है। चाइल्ड लाइन द्वारा मुक्ति की प्रक्रिया में भाग न लेना बड़ा दुखद है। प्रशासन द्वारा तमाम बंधुआ एवं बाल बंधुआ मजदूरों को मुक्ति प्रमाण पत्र जारी किए जाने चाहिए एवं सभी मुक्त बंधुआ एवं बाल बंधुआ मजदूरों को 30,000 रुपए की तत्काल सहायता राशि  प्रदान करनी चाहिए। मुक्त कराए गए बच्चों को शिक्षा से जोड़ना एवं सभी बंधुआ मजदूरों का पुनर्वास सुनिश्चित किया जाना चाहिए।

देवेंद्र धामा ने बताया कि मौके पर बच्चों एवं सभी मजदूरों से बयान दर्ज करते हुए यह आभास हो रहा था कि बंधुआ मजदूरी कानून को लागू हुए 50 वर्ष पूर्ण हुए किंतु बंधुआ मजदूरी आज भी व्याप्त है इसलिए इस बीमारी को छिपाने की बजाय इसका खत्मा पूरी सख्ती से किया जाना चाहिए। साथ ही बागपत प्रशासन जरूर मुक्त बंधुआ एवं बाल बंधुआ मजदूरों को न्याय देगा।

एडवोकेट चौधरी अली जिया कबीर ने बताया कि वो दिल्ली हाई कोर्ट एवं सुप्रीम कोर्ट में बंधुआ मजदूरी के कई मामलों में बतौर अधिवक्ता लड़ रहे है। किंतु जमीन पर हालात कुछ अलग है। ईंट भट्टो में मजदूरों के काम की परिस्थितियों एवं जीवन जीने की परिस्थितियों को देखकर वो दंग रह गए।

अधिवक्ता विनोद कुमार सिंह ने बताया कि नेशनल कैंपेन कमेटी फॉर इरेडिकेशन ऑफ बॉन्डेड लेबर की शिकायत पर प्रशासन ने मुक्ति तो करवा दी किंतु पुनर्वासित करना सबसे महत्वपूर्ण कदम है। अगर मुक्त बंधुआ मजदूरों का पुनर्वास नहीं होगा तो ये किसी ओर भट्टे में दोहरे बंधुआ बनकर काम करते पाए जाएंगे। प्रशासन इस कुचक्र को तोड़कर तमाम मुक्त परिवारों को समाज की मुख्य धारा से जोड़े तब यह रेस्क्यू सफल होगा।