अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन की नई प्लेटफॉर्म /गिग वर्कर्स पर अंतरराष्ट्रीय कन्वेंशन के संबंध में GIPSWU का बयान

अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन की नई प्लेटफॉर्म /गिग वर्कर्स पर अंतरराष्ट्रीय कन्वेंशन के संबंध में GIPSWU का बयान

देशभर में प्लेटफॉर्म एवं गिग वर्कर्स से अब ये कहा जा रहा है कि वे ILO कन्वेंशन को एक ऐतिहासिक उपलब्धि के रूप में स्वीकार करें। लेकिन गिग वर्कर्स के नज़रिए से देखे तो यह कन्वेंशनश जीत से कहीं अधिक एक चेतावनी जैसा लगता है। दुनिया भर के प्लेटफॉर्म वर्कर्स के वर्षों के प्रयास, संगठन, हड़तालों, गवाहीयो और मांगों के बाद जो कुछ कन्वेंशन के रूप में सामने आया है, वह गिग वर्कर्स की लड़ाई से हासिल किया गया परिवर्तन नहीं, बल्कि एक समझौता-आधारित दस्तावेज है, जो अब भी प्लेटफॉर्म कंपनियों को गिग वर्कर्स की तुलना में बहुत अधिक शक्ति देता है, सरकारों को बहुत अधिक छूट देता है, और आम गिग वर्कर्स की ज़िंदगी में तुरंत कोई ठोस बदलाव या शक्ति नहीं लाता है।

हाल ही में पास किया गया यह कन्वेंशन स्वीकार करता है कि प्लेटफॉर्म अर्थव्यवस्था में गरिमापूर्ण कार्य की कमियाँ हैं। यह असुरक्षित काम, एल्गोरिदमिक नियंत्रण, अपर्याप्त सुरक्षा, वर्गीकरण की समस्याएँ, कमजोर सामाजिक सुरक्षा पहुँच, अनुचित भुगतान प्रथाओं, मनमानी रूप से ऐप को बंद करना, और डिजिटल लेबर प्लेटफॉर्मों की मनमर्जी को मान्यता देता है। लेकिन मान्यता दे देना न्याय नहीं हो सकता बल्कि गिगवर्कर्स के साथ हो रहे शोषण और अत्याचार समाप्त होने चाहिए।

प्लेटफॉर्म कंपनियाँ पहले से ही वैश्विक स्तर पर संगठित हैं। उनके व्यवसाय मॉडल, पूँजी, निवेशक, डेटा सिस्टम और एल्गोरिदमिक नियंत्रण उनकी हर मनमर्जी की सीमाओं के पार काम करते हैं, जबकि वर्कर्स को देश-दर-देश, कानून-दर-कानून और मामले-दर-मामले में संघर्ष करने के लिए मजबूर किया जाता है। ऐसी स्थिति में, यदि कोई कन्वेंशन स्पष्ट शब्दों में मजबूत और लागू किए जा सकने वाले अधिकार स्थापित नहीं करता, तो वह गिग वर्कर्स की ज़िंदगी में कोई ठोस बदलाव नहीं ला सकता। बाध्यकारी वैश्विक मानकों या मापदंडों के बिना, कंपनियाँ हर खुद की ज़िम्मेदारी को इधर-उधर करती रहेंगी, कानूनी खामियों का फायदा उठाती रहेंगी, और एक क्षेत्राधिकार को दूसरे के खिलाफ इस्तेमाल करती रहेंगी, जबकि वर्कर्स कम वेतन, असुरक्षा, निगरानी और चुप्पी में फँसे रहेंगे और बोल भी नहीं पाएंगे इसीलिए कई मजदूर इस परिणात्मक कन्वेंशन की जीत को गहराई से अपर्याप्त मानते हैं। यह कन्वेंशन कुछ श्रेणियों के प्लेटफॉर्मों या मजदूरों के लिए छूट की अनुमति देता है, कई महत्वपूर्ण सुरक्षा उपायों को राष्ट्रीय कानून और व्यवहार पर छोड़ देता है, और बहुत हद तक राज्यों की आगे की मान्यता देते हुए कानून मैं परिवर्तन, कार्यान्वयन और जमीन पर लागू करने पर निर्भर करता है। वर्कर्स जानते हैं कि व्यावहारिक रूप में इसका क्या मतलब होता है: देरी, कमजोर करना, और उसके अंदर के कमियों का फायदा उठाना।

इस कन्वेंशन में उचित भुगतान की बात की गई है, लेकिन सभी प्लेटफॉर्म वर्कर्स के लिए सार्वभौमिक जीविकोपार्जन योग्य वेतन की कोई गारंटी नहीं दी गई है। यह सामाजिक सुरक्षा की बात करता है, लेकिन केवल मजदूरों के वर्गीकरण के अनुसार, जबकि यही वह जगह है जहाँ प्लेटफॉर्म ऐतिहासिक रूप से वर्कर्स का गलत वर्गीकरण करके ज़िम्मेदारी से बचते रहे हैं। यह एल्गोरिदमिक पारदर्शिता और समीक्षा की बात करता है, लेकिन फिर भी वर्कर्स को ऐसे अपारदर्शी सिस्टमों के हवाले छोड़ देता है जो तय करते हैं कि किसे काम मिलेगा, किसे दंड मिलेगा, और किसे ऐप से हटाया जाएगा।

वर्कर्स ने सिर्फ बेहतर भाषा के लिए संघर्ष नहीं किया। उन्होंने शक्ति, सामूहिक सौदेबाज़ी के अधिकार, प्रतिशोध से सुरक्षा, पूर्ण श्रमिक पहचान, नियोक्ता की जवाबदेही, और अधिकारों के उल्लंघन पर वास्तविक उपायों के लिए संघर्ष किया। ऐसा ढाँचा जो अब भी बहुत सारे वर्कर्स को इसकी परिधि से बाहर रखने की अनुमति देता हो, न्याय को राष्ट्रीय प्रक्रियाओं तक टालता हो, और नियोक्ता की जिम्मेदारियों को कमजोर करता हो, उसे गिग वर्कर्स समुदाय की पूरी उपलब्धि नहीं कहा जा सकता।

हम किसी भी सरकार, अंतरराष्ट्रीय संस्था, या प्लेटफॉर्म कंपनी के इस प्रयास को अस्वीकार करते हैं कि इसे एक पूरी जीत के रूप में प्रस्तुत किया जाए। ज़मीनी स्तर पर काम करने वाले वर्कर्स के लिए वहाँ कोई जीत नहीं है जहाँ वेतन अस्थिर रहता है, लागत श्रम पर डाली जाती है, सामाजिक सुरक्षा अनिश्चित रहती है, और deactivation किसी की रोज़ी-रोटी को रातोंरात खत्म कर सकती है। वहाँ कोई जीत नहीं है जहाँ वर्कर्स को सिद्धांत में तो मान्यता दी जाती है, लेकिन व्यवहार में न्याय से वंचित रखा जाता है।

इसलिए GIPSWU का स्पष्ट मत है कि इस कन्वेंशन को संघर्ष के जारी रहने के आधार के रूप में देखा जाना चाहिए, न कि उसके अंत के रूप में। सरकारों को इसे तुरंत ratify करना चाहिए, हर तरह की छूट को समाप्त करना चाहिए, मजबूत राष्ट्रीय कानून बनाने चाहिए, और श्रम निरीक्षण, सामूहिक सौदेबाज़ी के अधिकार, सामाजिक सुरक्षा, वेतन संरक्षण, डेटा अधिकार, तथा मनमाने निलंबन और समाप्ति से सुरक्षा के माध्यम से पूर्ण अनुपालन सुनिश्चित करना चाहिए। प्लेटफॉर्म वर्कर्स को केवल प्रतीकात्मक मान्यता नहीं चाहिए। उन्हें लागू किए जा सकने वाले अधिकार, वैश्विक जवाबदेही, और ऐसा तंत्र चाहिए जो डिजिटल शोषण के ऊपर मानव गरिमा को सुरक्षित रखे।