सरकार द्वारा स्पेशल ऑडिट के नाम पर एससी /एसटी व ओबीसी कोटे के पदों को समाप्त करना है : डॉ.सुमन
दिल्ली सरकार के 12 कॉलेजों का स्पेशल ऑडिट कराए जाने पर फोरम ने कड़े शब्दों में निंदा की
दस वर्षों से नहीं हुई दिल्ली सरकार के 12 कॉलेजों में शिक्षकों / कर्मचारियों की स्थायी नियुक्ति फो
दिल्ली। फोरम ऑफ एकेडेमिक्स फॉर सोशल जस्टिस ( शिक्षक संगठन ) ने दिल्ली सरकार से पूर्ण वित्त पोषित 12 कॉलेजों का स्पेशल ऑडिट कराए जाने के आदेश की कड़े शब्दों में निंदा की है और कहा है कि स्पेशल ऑडिट तो सरकार का बहाना है वह इस ऑडिट के बहाने एससी /एसटी व ओबीसी कोटे के शिक्षकों व कर्मचारियों के पदों को समाप्त करना है । वह आरक्षित श्रेणी के शिक्षकों व कर्मचारियों की स्थायी नियुक्ति न करने व उनका बैकलॉग , शॉटफॉल पदों को नहीं भरने से भाग रही है ।
सरकार द्वारा बनाई गई कमेटी में स्पेशल ऑडिट करने के लिए सरकार के 12 कॉलेजों से संबंधित मुद्दों की जाँच पर विशेष लेखा परीक्षा आयोजित करने के लिए सक्षम अधिकारी की मंजूरी से अवगत कराने का निर्देश दिया गया है । साथ ही स्पेशल ऑडिट के संचालन के लिए एक टीम नियुक्त की गई है जिसमें आठ सदस्यों को रखा गया है । फोरम के चेयरमैन डॉ.हंसराज सुमन का कहना है कि सरकार जब भी किसी कमेटी का गठन करती है उसमें सरकार के सदस्यों के अलावा दिल्ली विश्वविद्यालय के सीनियर प्रोफेसर , प्रिंसिपल व आरक्षित श्रेणी के सीनियर प्रोफेसर को ऑब्जर्वर के रूप में रखा जाता है जबकि सरकार की इस कमेटी में किसी को नहीं रखने से कमेटी अपने आपमें अपूर्ण है ?
फोरम के चेयरमैन डॉ. हंसराज सुमन का कहना है कि स्पेशल ऑडिट के नाम पर दिल्ली सरकार की शर्मनाक हरकत बताया है । उन्होंने बताया है कि दिल्ली सरकार द्वारा वित्तपोषित 12 कॉलेजों के शिक्षकों, कर्मचारियों और छात्रों का उत्पीड़न जारी है। सरकार के इन कॉलेजों में नियुक्त एडहॉक टीचर्स , अतिथि शिक्षकों व कर्मचारियों को डरा धमकाकर इन पदों को भरना नहीं चाहती । नई मुख्यमंत्री सुश्री आतिशी के नेतृत्व में दिल्ली सरकार ने पूर्ण वित्त पोषित कॉलेजों को अनुदान देने के बजाय इन कॉलेजों में विशेष ऑडिट का आदेश दिया है। इन कॉलेजों में सरकार के स्व-वित्तपोषित मॉडल को लागू करने के बहाने खोजने का प्रयास कर रही है। डॉ.सुमन का कहना है कि स्पेशल ऑडिट के माध्यम से, यह संदेह है कि एक बार फिर छात्रों के फंड पर सवाल उठेंगे और आप सरकार छात्रों के वेतन का भुगतान करने के लिए फीस खर्च करने पर जोर देगी। उन्होंने बताया है कि आप सरकार दूसरी बार स्पेशल ऑडिट का आदेश दे रही है । सरकार ने इससे पहले भी एक निजी कंपनी द्वारा कराए गए स्पेशल ऑडिट में वित्तीय अनियमितताएं नहीं पाई गई थीं । डॉ. सुमन का कहना है कि असली एजेंडा शिक्षा का निजीकरण, इन कॉलेजों की मान्यता रद्द करना और वित्तपोषित करने की जिम्मेदारी से भागना है ।
बार-बार ऑडिट कराना उच्च शिक्षा का निजीकरण करना है --डॉ. हंसराज सुमन का कहना है कि दिल्ली सरकार 12 कॉलेजों का बार -बार ऑडिट कराने के पीछे इनकी मंशा उच्च शिक्षा का निजीकरण करना है । इन कॉलेजों में शिक्षण और गैर-शिक्षण कर्मचारियों की सभी नियुक्तियाँ यूजीसी और विश्वविद्यालय के मानदंडों के अनुसार शासी निकायों और दिल्ली सरकार की मंजूरी के माध्यम से की जाती हैं। हर साल सरकारी एजेंसियों द्वारा तीन स्तरों पर वित्तीय ऑडिट किए जाते हैं । सरकार के 12 कॉलेज अपनी स्थापना के समय से ही दिल्ली विश्वविद्यालय का हिस्सा हैं और आगे भी डीयू का हिस्सा रहेंगे, लेकिन जब से दिल्ली में आप सरकार सत्ता में आई है, तब से इन संस्थानों के वित्त पोषण और प्रशासन की समस्या शुरू हो गई है। आप सरकार द्वारा फंड में कटौती, वेतन के भुगतान में देरी और कर्मचारियों को बकाया सहित अन्य देय राशि का भुगतान न करना। निजी कंपनियों द्वारा विशेष ऑडिट का आदेश दिया जाना यह दर्शाता है कि सरकार इन कॉलेजों की ग्रांट देने में असमर्थ है ।
पिछले 10 वर्षों से सरकार के कॉलेजों में नहीं हुई शिक्षकों की स्थायी नियुक्ति ---डॉ. सुमन ने यह भी बताया है कि पिछले 10 वर्षों से दिल्ली सरकार से पूर्ण वित्त पोषित 12 कॉलेजों में शिक्षकों व कर्मचारियों की स्थायी नियुक्ति नहीं हुई है । यहाँ सबसे ज्यादा एससी/एसटी व ओबीसी कोटे के शिक्षकों व कर्मचारियों के पद खाली है । सरकार के 4 कॉलेजों ने अपने यहाँ शिक्षकों के पदों को भरने का विज्ञापन दिया , 8 कॉलेजों ने अभी तक रोस्टर पास नहीं कराया । इन कॉलेजों में 500 से अधिक शिक्षकों के पद खाली है , गेस्ट टीचर्स व एडहॉक टीचर्स के सहारे ये कॉलेज चल रहे हैं । उन्होंने बताया है कि पिछले दो साल में 53 से अधिक कॉलेजों में शिक्षकों की स्थायी नियुक्ति हुई लेकिन दिल्ली सरकार इन पदों को भरने के निर्देश नहीं दे रही । उन्होंने पुनः सरकार के 12 कॉलेजों की स्पेशल ऑडिट कराए जाने पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा है कि स्पेशल ऑडिट से ज्यादा महत्वपूर्ण है शिक्षकों व कर्मचारियों की स्थायी नियुक्ति करना है , शिक्षकों व कर्मचारियों के साथ तभी सही न्याय होगा ।


