IHIF नोएडा सेंटर ने रखा व्हीलचेयर रोगियों के लिए परामर्श सत्र, दिए गए व्हीलचेयर और अन्य सहायक उपकरण

IHIF नोएडा सेंटर ने रखा व्हीलचेयर रोगियों के लिए परामर्श सत्र, दिए गए व्हीलचेयर और अन्य सहायक उपकरण

नोएडा। आज एसबीआई फाउंडेशन द्वारा समर्थित आईएचआईएफ नोएडा सेंटर में व्हीलचेयर रोगियों के लिए एक मेंटर मीटिंग हुई जिसमें मरीज और उनके परिजनों को जागरूक किया गया। कार्यक्रम के दौरान व्हीलचेयर और अन्य सहायक उपकरण वितरित किए गए।

प्रशासन प्रमुख सुश्री हेमनजोत ने कई अन्य आईएचआईएफ परियोजनाओं के बारे में बताया जैसे सिर की चोट की रोकथाम और हेलमेट पहनने का महत्व, सरकारी/सरकारी सहायता प्राप्त स्कूलों के स्कूली बच्चों को आईएसआई चिह्नित हेलमेट का दान, जो अपने माता-पिता के साथ पीछे की सीट पर सवारी करते हैं।

IHIF: हेड इंजरी के मरीजों के लिए एक शानदार मुहिम

सीनियर न्यूरो थेरेपिस्ट और इंडियन हेड इंजरी फाउंडेशन यानी आईएचआईएफ की केंद्र प्रभारी डॉक्टर जयश्री ने कहा है कि उनके मरीज बहुत ही तेजी से स्वस्थ हो रहे हैं। क्योंकि उनके केंद्र की ओर से जो सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं, वे पूरे नोएडा में कहीं भी नहीं मिल पातीं। साथ ही उन्होंने व्हीलचेयर रोगियों को हृदय स्वास्थ्य के बारे में बताया।

IHIF: बीपीएल मरीजों से नहीं लिया जाता एक भी पैसा

इंडियन हेड इंजरी फाउंडेशन की ओर से आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान डॉक्टर जयश्री ने कहा, हम उन बीपीएल मरीजों का विशेष ध्यान रखते हैं जो महंगी चिकित्सा सुविधाओं को अफोर्ड नहीं कर पाते। हमारे यहां ऐसे भी मरीज हैं जो आईटी स्पेशलिस्ट हैं। सड़क दुर्घटना में स्पाइनल कोड इंजरी के कारण उनके दोनों पैर काम नहीं करते। फिर भी हमने उन्हें आत्मनिर्भर बनाने का काम किया है। 

हेड इंजरी का यह मतलब नहीं कि जीवन बेकार

फिजियो थेरेपी विभागाध्यक्ष डॉक्टर तरुण लाल ने कहा कि किसी को हेड इंजरी हो गई है तो इसका यह मतलब कतई नहीं है कि उसका जीवन बेकार हो चुका है। चिकित्सा विज्ञान इतना विकसित हो चुका है कि ऐसे मरीजों को अपने पैर पर खड़े होने लायक बना सकता है। अगर कोई डॉक्टर अनजाने में यह बोलता है कि मरीज का जीवन बेकार हो चुका है और अब उसे दूसरों की सेवा पर निर्भर रहना होगा तो यह बिलकुल गलत है। क्योंकि हमारी संस्था ऐसी बातों को झुठला चुकी है। हमारे यहां तो ऐसे भी मरीज हैं, जिनका हाथ पैर कुछ भी काम नहीं कर रहा था। लेकिन अब वे अपना व्यवसाय भी संभालने में सक्षम हो चुके हैं। 

उन्होंने कहा कि ऐसे मरीजों को डिसएबल कहना गलत होगा। सरकार की नीतियों के अनुसार उन्हें डिफरेंटली एबल कहा जाना चाहिए। ऐसे की लोगों के लिए फिजियोथेरेपी वरदान साबित हो रही है। इसी संदर्भ में हमारे कुछ मरीजों ने बताया कि आप बैठे बैठे भी तमाम क्षेत्रों में बहुत अच्छा कर सकते हैं। और हमारे मरीज वैसा कर भी रहे हैं। ऐसे मरीज प्रशासनिक सेवा में अच्छा कर रहे हैं। उनके लिए टीवी, रेडियो और शिक्षा जैसे क्षेत्रों के दरवाजे खुले हैं। हम ऐसी कंपनियों, प्रतिष्ठानों और लोगों के शुक्रगुजार हैं जो हमारे मरीजों को बेहतर मौका दे रहे हैं। सा ही उन्होंने व्हीलचेयर रोगियों को समग्र शरीर की ताकत के लिए लाइव प्रदर्शन दिया।

फिजियोथेरेपी का रोल काफी महत्वपूर्ण

डॉक्टर सुप्रिया ने कहा कि फिजियोथेरेपी का रोल काफी महत्वपूर्ण है। आस्टो अथराइटिस की बात करें तो पहले उससे बुजुर्ग ही परेशान होते थे, लेकिन अब उसने युवाओं को भी प्रभावित करना शुरू कर दिया है। इसलिए आपको नियमित व्यायाम पर विशेष रूप से ध्यान देना होगा। क्योंकि एक्सरसाइज एक दवा की तरह है। जैसे आप दवा की सारी गोलियां एक साथ नहीं खा सकते, ठीक उसी प्रकार रेगुलर एक्सरसाइज को ठीक से समझना होगा। उसकी भी मात्रा दवा की ही तरह तय करनी होगी। तभी पर्याप्त लाभ मिल पाएगा। 

घुटनों की समस्या पर उन्होंने कहा कि घुटना तो एक हड्डी है। उसे ताकत देती हैं मांसपेशियां। और मांसपेशियों को मजबूत रखने के लिए एकमात्र उपाय है एक्सरसाइज। यहां तक कि लोग घुटना बदलवा देते हैं तो भी उनकी समस्या खत्म नहीं होती। इसलिए घुटना बदलवाने से पहले मांसपेशियों को मजबूत करना बहुत जरूरी हो जाता है। शरीर में दर्द तो एक संकेत मात्र है कि बीमारी आने वाली है। इसलिए बीमारी आने से पहले ही एक्सरसाइज या फिजियोथेरेपी के महत्व को समझने का प्रयास शुरू कर देना चाहिए। 

दिन प्रतिदिन की गतिविधियों में हेड इंजरी आम बात

बता दें कि महिलाएं, बच्चे और पुरुष आए दिन हेड इंजरी के कारण प्रभावित होते हैं। वे या तो कभी गिर जाते हैं या कभी सड़क दुर्घटना के शिकार हो जाते हैं। खेल गतिविधियों में भी हेड इंजरी के केस सामने आते रहते हैं। इन दिन प्रतिदिन की गतिविधियों में हेड इंजरी आम बात हो गई है। और उससे लाखों लोगों का जीवन प्रभावित हो रहा है। यहां तक कि उससे लोगों की आजीविका भी छिन जाती है। 

सड़कों पर यातायात इतना खतरनाक हो चुका है कि देश में एक मिनट के अंतराल पर एक मौत या एक सीरियस इंजरी का केस सामने आ जाता है। क्योंकि भारत में 18 करोड़ से ज्यादा वाहन हैं, जिनमें 50 प्रतिशत सड़कों पर होते हैं। ऐसे में दुर्घटना से बच पाना बहुत मुश्किल हो गया है। तभी तो दुर्घटना के शिकार लोगों के जीवन में एक नया सवेरा लाने के लिए इंडियन हेड इंजरी फाउंडेशन की टीम पूरी कार्यकुशलता के साथ सक्रिय है।

मिस दीपांशी ने व्हीलचेयर की पहुंच और गतिशीलता पर एक सत्र आयोजित किया। उन्होंने उस पोर्टल के बारे में बताया जो व्हीलचेयर रोगियों के पंजीकरण में मदद करता है।

नूरुद्दीन ने मूत्राशय प्रबंधन के बारे में बताया वही शैलेश ने आंत्र प्रबंधन के बारे में बताया, निखिल और शैलजा ने व्हीलचेयर रोगियों के लिए शैक्षणिक मार्ग पर जोर दिया।

ईशान ने नौकरी के अवसर और विशेष छात्रवृत्ति प्रदान करने वाली सरकारी एजेंसियों के बारे में बताया।

एनआईयू के फिजियोथेरेपी विभाग की एचओडी डॉ. सुप्रिया अवस्थी ने व्हीलचेयर रोगियों के लिए एर्गोनोमिक सलाह दी।