मेरा वोट, मेरी धरोहर - प्रोफेसर जयंती रंजन

मेरा वोट, मेरी धरोहर - प्रोफेसर जयंती रंजन

"मेरा वोट, मेरी धरोहर" एक ऐसा मन्त्र है जो हमारे लिए बहुत महत्वपूर्ण है। यह न केवल एक अधिकार का प्रतीक है, बल्कि यह हमारी जिम्मेदारी का प्रमुख स्रोत भी है। वोट देने का अधिकार हमारे संविधान द्वारा प्रदत्त है, जो हमें एक स्वतंत्र और न्यायप्रिय देश की दिशा में आगे बढ़ने का मार्ग दिखाता है ये कहना है शारदा विश्वविद्यालय आगरा की कुलपति प्रोफेसर (डॉ) जयंती रंजन का।

वोटिंग का महत्व सिर्फ राजनीतिक स्तर पर ही सीमित नहीं है, बल्कि यह हमारे समाज के हर क्षेत्र में प्रभाव डालता है। वोटिंग एक सकारात्मक परिवर्तन लाने का माध्यम है जो अधिकारों की एक सजीव रक्षा करता है और समृद्धि और समानता की दिशा में हमें आगे बढ़ने का मार्ग प्रदान करता है।

समाज के निर्माण में हमारी भूमिका को समझने के लिए हमें यह ध्यान रखना चाहिए कि हमारा वोट हमारी धरोहर है, जिसे हमें संरक्षित रखने और समृद्ध करने की जिम्मेदारी है। यह हमारे अधिकारों और कर्तव्यों का प्रतिनिधित्व करता है और हमें एक सक्रिय और सहयोगी समाज की दिशा में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करता है। इस तरह, "मेरा वोट, मेरी धरोहर" हमें एक समर्थ नागरिक के रूप में समर्थित करता है, जो समाज में परिवर्तन लाने की शक्ति को समझता है और समृद्धि और समानता की दिशा में अपना योगदान देने के लिए सक्रिय होता है।

हमारा वोट हमें वह सत्यापित करता है कि हम समाज के निर्माण में सक्रिय भागीदार हैं। यह हमें अपने देश के भविष्य को समर्थन करने का अवसर प्रदान करता है। हमारी धरोहर को समझने के लिए, हमें अपने वोट का महत्व समझना आवश्यक है। हमें यह समझना चाहिए कि हमारे वोट का असर अधिकारियों के नियुक्ति, नीतियों का निर्धारण, और सरकार की रूपरेखा पर होता है। अपने वोट के माध्यम से, हम उन नेताओं को चुनते हैं जो हमारे मूल्यों और आदर्शों को प्रतिष्ठा देते हैं।

वोटिंग के माध्यम से, हम समाज में परिवर्तन लाने की शक्ति को स्वीकार करते हैं। वोटिंग एक महत्वपूर्ण कदम है जो हमें सक्रिय नागरिक बनाता है और सार्वजनिक नीतियों में अपनी भागीदारी का एहसास कराता है। जब हम वोट डालते हैं, तो हम अपनी स्वतंत्रता को और मजबूत करते हैं और अपने देश के लिए सही निर्णयों की प्रेरणा देते हैं।

हमारा वोट हमारे अधिकारों का प्रतिनिधित्व करता है और समाज के सभी वर्गों को समानता और न्याय की भावना दिलाता है। इस धारणा के साथ, हमें यह भी ध्यान में रखना चाहिए कि हमारा वोट केवल एक अधिकार नहीं है, बल्कि यह हमारा कर्तव्य भी है। हमें अपने नागरिकता के प्रति जिम्मेदारी महसूस करनी चाहिए और अपने अधिकारों का उपयोग इस प्रकार करना चाहिए कि समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाया जा सके।

साभार : प्रोफेसर (डॉ) जयंती रंजन कुलपति शारदा विश्वविद्यालय आगरा