देश के वंचित समुदायों के युवा शिक्षार्थियों के सीखने के परिणामों में सुधार लाने को पुनः सुदृढ़ कर रही है P&G Shiksha

देश के वंचित समुदायों के युवा शिक्षार्थियों के सीखने के परिणामों में सुधार लाने को पुनः सुदृढ़ कर रही है P&G Shiksha

P&G Shiksha अपनी पहल के माध्यम से 1 करोड़ बच्चों को सकारात्मक रुप से प्रभावित कर रही है

P&G Shiksha ने आज भारत भर में 1 करोड़ बच्चों तक पहुंचने और उनके जीवन पर सकारात्मक प्रभाव डालने की उपलब्धि की घोषणा की, जिसका उद्देश्य सीखने के अंतर को मिटाना है। यह उपलब्धि देश भर में बुनियादी साक्षरता और संख्यात्मक ज्ञान को सशक्त बनाने के लिए दो दशकों से अधिक समय से जारी निरंतर प्रतिबद्धता का प्रतीक है।

भारत की अनेक कक्षाओं में सीखने के दौरान होने वाली झिझक अक्सर अनदेखी रह जाती है-कोई बच्चा पैराग्राफ पढ़ते हुए रुक जाता है, किसी अवधारणा को लेकर असमंजस में होता है, या हाथ उठाने में संकोच करता है। जब ऐसे क्षण जब लाखों में बदलते है, तो चुनौती का वास्तविक स्वरूप सामने आता है। यह उपलब्धि केवल पहुँच का आँकड़ा नहीं है, बल्कि यह संख्या के पीछे छिपी प्रत्येक बच्चे की व्यक्तिगत सीखने की यात्राओं को दर्शाती है - यह सुनिश्चित करती है कि अस्थायी शैक्षणिक अंतराल किसी बच्चे के दीर्घकालिक आत्मविश्वास या संभावनाओं को परिभाषित न करें।

ऐसे समय में जब भारत में कक्षा 5 के 50% से अधिक बच्चे (ASER 2024 के अनुसार) कक्षा 2 के स्तर का पाठ पढ़ने में सक्षम नहीं हैं, बुनियादी सीखने की कमियों को दूर करने के लिए प्रारंभिक पहचान, लक्षित सुधारात्मक हस्तक्षेप और निरंतर सहयोग अत्यंत आवश्यक हो जाता है। पिछले 21 सालो में P&G Shiksha ने केवल विद्यालय आधारभूत संरचना सुदृढ़ करने की भूमिका से आगे बढ़ते हुए एक समग्र मॉडल विकसित किया है, जो शिक्षा तंत्र की बदलती आवश्यकताओं के अनुरूप रोकथाम और सुधार पर ध्यान देता है।

इस उपलब्धि का जश्न मनाने के लिए P&G Shiksha ने हैदराबाद के एक आदिवासी सरकारी स्कूल में एक समारोह का आयोजन किया - ऐसा परिवेश जो वह स्थान दर्शाता है जहाँ उसका कार्य सबसे गहराई से जुड़ा हुआ है। स्थल का चयन उन समुदायों का प्रतीक था जहां सीखने की कमियां अक्सर सबसे पहले सामने आती हैं और जहां संरचित हस्तक्षेप सबसे बड़ा बदलाव ला सकता है।

शिक्षकों, भागीदारों और विशेषज्ञों ने समझ के साथ सीखने के महत्व पर प्रकाश डालने के लिए एक साथ मिलकर काम किया, क्योंकि 1 करोड़ की उपलब्धि की घोषणा के साथ कक्षाओं से जुड़ी वास्तविक कहानियाँ प्रस्तुत की गईं, जिन्होंने कार्यक्रम के ठोस जमीनी प्रभाव को स्पष्ट रुप से दर्शाया।

कार्यक्रम में एक विशेष पैनल चर्चा भी की गई , जिसका संचालन आदर्श रेड्डी (विकास और साझेदारियाँ, शैक्षिक पहल) ने किया। पैनल में प्रणिता सुभाष (भारतीय अभिनेत्री), समीरा रेड्डी (भारतीय अभिनेत्री और सेलिब्रिटी इन्फ्लुएंसर), प्रणव कोठारी (सीईओ – Educational Initiatives) और रजत ब्रार (सीनियर डायरेक्टर – ब्रांड ऑपरेशन्स, पी एंड जी इंडिया) शामिल रहे।

पैनल चर्चा में इस बात पर विस्तार से चर्चा की गई कि सीखने के अंतराल अक्सर झिझक, संकोच या नकारात्मक लेबल के रूप में सामने आते हैं, जो बच्चों के आत्मविश्वास को प्रभावित करते हैं। इस संदर्भ में प्रारंभिक पहचान, अभिभावकों की जागरूकता तथा निर्णयात्मक दृष्टिकोण के बजाय समय पर प्रोत्साहन के महत्व को रेखांकित किया गया।

कार्यक्रम की एक प्रमुख झलक P&G Shiksha और Educational Initiatives के सहयोग से स्थापित AI-बैक्ड ‘Mindspark’ अनुकूलनशील शिक्षण प्रयोगशाला का प्रदर्शन था, जहाँ उपस्थित अतिथियों ने प्रत्यक्ष रूप से अनुभव किया कि किस प्रकार तकनीक प्रत्येक बच्चे के सीखने के सटीक स्तर की पहचान कर उसके लिए व्यक्तिगत शिक्षण पथ तैयार करती है।

हर 1 करोड़ में से एक व्यक्ति में एक महत्वपूर्ण मोड़ छिपा होता है, एक ऐसा क्षण जहां समय पर मिली सहायता परिस्थितियों के कारण क्षमता को सीमित होने से बचाती है। इस कार्यक्रम में साझा की गई कहानियों में से एक कहानी रमेश की थी, जो तेलंगाना के एक आदिवासी स्कूल में कक्षा 7 में पढ़ने वाला पहली पीढ़ी का छात्र है।

लांबाड़ी भाषी एक दूरस्थ गाँव से आने वाले इस विद्यार्थी ने आकांक्षाओं और अनिश्चितताओं के साथ कक्षा में प्रवेश किया — जहाँ वह बुनियादी गणित की चुनौतियों से जूझने के साथ नई शिक्षण भाषा के अनुरूप स्वयं को ढालने का प्रयास कर रहा था। ये कमियां सिर्फ अकादमिक नहीं थीं इनका असर रमेश के आत्मविश्वास और भागीदारी पर भी चुपचाप पड़ रहा था। P&G Shiksha और Educational Initiatives द्वारा समर्थित AI पावर्ड ‘Misndpark’ लर्निंग टूल के माध्यम से रमेश को सीखने के स्तर पर व्यक्तिगत सहायता मिली।  उन्होंने 120 घंटे से अधिक का अभ्यास किया, जिससे उनकी सीखने की क्षमता में 3 स्तरों की महत्वपूर्ण प्रगति दर्ज हुई।  उनकी यात्रा यह दर्शाने का एक सशक्त उदाहरण है कि जब पहली पीढ़ी के शिक्षार्थियों को सही समय पर सही सहयोग मिलता है, तो झिझक आत्मविश्वास में और संघर्ष प्रगति में बदल सकता है।

इस उपलब्धि पर बोलते हुए, P&G India के ब्रांड ऑपरेशन्स के सीनियर डायरेक्टर रजत ब्रार ़ ने कहा, “*74% माता-पिता प्रारंभिक शिक्षा संबंधी कठिनाइयों को महज एक अस्थायी चरण मानते हैं, और बच्चे के भविष्य पर पड़ने वाले दीर्घकालिक जोखिमों को कम आंकते हैं। यह इस बात का स्पष्ट प्रमाण है कि सीखने की कमियों पर अक्सर ध्यान नहीं दिया जाता और उन्हें दूर नहीं किया जाता। यही कारण है कि P&G Shiksha का 1 करोड़ बच्चों तक पहुंचना इतना महत्वपूर्ण है। यह सिर्फ पहुंच नहीं है - यह उन 1 करोड़ पलों को दर्शाता है जहां समय पर और व्यवस्थित सहायता ने आत्मविश्वास बहाल करने में मदद की और मूलभूत शिक्षा को मजबूत किया। प्रारंभिक पहचान, अनुकूल उपचारात्मक उपायों और निरंतर साझेदारी के माध्यम से, P&G Shiksha यह सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है कि सीखने की एक अस्थायी कमी बच्चे के दीर्घकालिक भविष्य को निर्धारित न करे।”

भारतीय अभिनेत्री प्रणिता सुभाष ने कहा, “जब आपको यह एहसास होता है कि *आधे से ज़्यादा वयस्क अपने स्कूली दिनों में कुछ विषयों में पिछड़ने के अनुभव को याद करते हैं, तो यह बात दिल को छू जाती है। मैंने खुद भी इस तरह के आत्मविश्वास की कमी महसूस की है, और एक अभिभावक होने के नाते, मैं इस बात को लेकर ज़्यादा सचेत हूँ कि बचपन की मुश्किलों को कितनी आसानी से नज़रअंदाज़ किया जा सकता है। मुझे P&G Shiksha की जो बात सबसे अच्छी लगती है, वह है सही समय पर मदद करने पर इसका ध्यान, क्योंकि प्रोत्साहन, व्यवस्थित सहयोग और समय पर हस्तक्षेप बच्चे के आत्मविश्वास को टूटने से पहले ही फिर से जगा सकता है। यह देखकर बहुत खुशी होती है कि वे पहले से ही 1 करोड़ से ज़्यादा बच्चों के जीवन पर सकारात्मक प्रभाव डाल रहे हैं।”

भारतीय अभिनेत्री और सेलिब्रिटी इन्फ्लुएंसर समीरा रेड्डी ने आगे कहा, “हममें से कई लोग अपने स्कूली दिनों में कुछ विषयों में पिछड़ने की यादें संजोए हुए हैं, और ये शुरुआती अनुभव अक्सर कक्षा से परे आत्मविश्वास को आकार देते हैं- वास्तव में, कक्षा 5 के 50% छात्र कक्षा 2 के स्तर का पाठ नहीं पढ़ पाते (ASER रिपोर्ट 2024 के अनुसार)। यही कारण है कि P&G Shiksha जैसी पहल महत्वपूर्ण हैं। ये हमें सीखने की कमियों को जल्दी पहचानने, आलोचना के बजाय समझदारी से प्रतिक्रिया देने और ऐसा वातावरण बनाने के लिए प्रोत्साहित करती हैं जहाँ बच्चों को खुद पर विश्वास फिर से कायम करने के लिए पर्याप्त समर्थन मिले। उनके काम का प्रमाण वे कहानियाँ हैं जो हमने आज सुनीं, रमेश जैसे बच्चों की कहानियां जो सशक्त महसूस कर रहे हैं और अपनी सीखने की यात्रा जारी रखने के लिए सक्षम हैं।”

प्रणव कोठारी, सीईओ – Educational Initiatives (Ei) ने कहा, “ज़मीनी स्तर पर, हम देखते हैं कि कैसे व्यवस्थित और प्रारंभिक पहचान से सीखने की प्रक्रिया में बदलाव आ सकता है। P&G Shiksha के साथ हमारी साझेदारी के माध्यम से, हम बड़े पैमाने पर समाधान लागू करने में सक्षम हैं। Mindspark जैसे अनुकूलनशील उपकरण प्रत्येक बच्चे के सीखने के सटीक स्तर की पहचान करते हैं और अवधारणात्मक स्पष्टता और निरंतर प्रगति के लिए व्यक्तिगत मार्ग बनाते हैं।

जब प्रौद्योगिकी, शिक्षक और कक्षा एकीकरण एक साथ आते हैं, तो बच्चे झिझक से आत्मविश्वास की ओर बढ़ते हैं। उदाहरण के लिए, तेलंगाना और महाराष्ट्र में, P&G Shiksha और ईआई ईआई ट्राइबल वेलफेयर डिपार्टमेंट, तेलंगाना एकलव्य मॉडल रेजिडेंशियल स्कूल्स सोसाइटी और अन्य राज्य-संचालित संस्थानों के साथ मिलकर आदिवासी और वंचित समुदायों के बच्चों के लिए सीखने के परिणामों को मजबूत करने के लिए काम कर रहे हैं।”