इस्कॉन में श्री चैतन्य महाप्रभु का आविर्भाव दिवस, गौर पूर्णिमा एवं होली महोत्सव मनाया

इस्कॉन में श्री चैतन्य महाप्रभु का आविर्भाव दिवस, गौर पूर्णिमा एवं होली महोत्सव मनाया

नोएडा। इस्कॉन नोएडा में श्री चैतन्य महाप्रभु का आविर्भाव दिवस गौर पूर्णिमा एवं होली महोत्सव बड़े ही धूमधाम से मनाया गया। कलियुग में जब अधर्म बढ़ गया तथा धार्मिक रीति-रिवाजों का प्रयोग केवल दिखावे के लिए हो रहा था, ऐसे समय में वास्तविक धर्म की स्थापना हेतु एवं सभी को प्रेम प्रदान करने के लिए आज से लगभग 500 वर्ष पूर्व स्वयं भगवान श्रीकृष्ण, चैतन्य महाप्रभु के रूप में  होली के पवित्र दिन पर प्रकट हुए। इसीलिए गौड़ीय वैष्णव परम्परा में होली को गौर पूर्णिमा के रूप में मनाया जाता है।

प्रातः 4:30 बजे भगवान के मंगल दर्शन से उत्सव का प्रारम्भ हुआ। इस्कॉन नोएडा में गौर पूर्णिमा का उत्सव सांय 5 बजे से 8:30 बजे तक मनाया गया। इस उत्सव के लिए मन्दिर में काफी समय से तैयारियाँ चल रही थीं। मन्दिर को फूलों एवं अन्य साज-सामग्री से सजाया गया। भगवान के लिए भक्तों द्वारा विशेष पोशाक एवं आभूषण तैयार किए गए थे, जिन्हें भगवान को आज पहनाया गया। भगवान का सुन्दर फूलों से श्रृंगार किया गया। मुख्य उत्सव सांय 5 बजे शुरू हुआ।

पूरे उत्सव के दौरान मनमोहक कीर्तन होता रहा। भगवान का पंच गव्य अभिषेक किया गया। गाय के दूध, दही, घी, शहद, ताजे फलों के रस, नारियल पानी आदि से भगवान का अभिषेक किया गया। भगवान की महा आरती भी की गई। भगवान को 108 भोग अर्पित किए गए। पिज्जा, पास्ता, बर्गर, विभिन्न प्रकार के केक और पेस्ट्री जैसे विदेशी व्यंजनों के साथ-साथ परम्परागत व्यंजन जैसे पराँठे, पूरी, कचौड़ी, हलवा, गुझिया आदि भी भगवान को अर्पित किए गए। श्री श्री राधा गोविन्द देव के अभिषेक के लिए एक हजार किलो ताजा सुगन्धित पुष्पों का प्रयोग किया गया।

उत्सव में अमरीका, फ़्रांस, ब्रिटेन, कनाडा एवं ऑस्ट्रेलिया आदि देशों के साथ-साथ देश-विदेश के लगभग 2000 लोगों ने भाग लिया। उत्सव में भाग लेने के लिए विशेष रूप से इस्कॉन के संस्थापकाचार्य श्रील प्रभुपाद के प्रिय शिष्य, श्रीमन वैयासकी प्रभुजी आए थे। लन्दन में जन्मे श्रीमन वैयासकी प्रभु वर्ष 1970 में इस्कॉन के सम्पर्क में आए एवं 1973 में श्रील प्रभुपाद से विधिवत दीक्षा के पश्चात वे अपने मधुर कीर्तन के माध्यम से देश-विदेशों में कृष्णभावनामृत का प्रचार कर रहे हैं। विगत कईं वर्षों से वे वृन्दावन में वास कर रहे हैं। प्रभुजी ने अपने सुमधुर कीर्तन से सब का मन मोह लिया। उनके मधुर कीर्तन पर लोग स्वयं को नृत्य करने से रोक नहीं पाए एवं कृष्ण-प्रेम में सराबोर हो गए। अपने प्रवचन में उन्होंने चैतन्य महाप्रभु की अनेकों लीलाओं का वर्णन किया एवं किस प्रकार से हम चैतन्य महाप्रभु की शिक्षाओं को अपने जीवन में उतार सकते हैं, इसकी चर्चा की।

श्रद्धालुओं ने फूलों की होली का जमकर आनन्द लिया। सभी लोग एक दूसरे को गले मिलकर और एक-दूसरे को होली एवं गौर पूर्णिमा की बधाई दे रहे थे। उत्सव के अन्त में सभी ने भगवान को अर्पित भोग को महाप्रसाद के रूप में स्वीकार किया तथा सभी ने रात्रि भोज मन्दिर में ही ग्रहण किया। कुल मिलाकर उत्सव बड़े हर्षोल्लास के साथ सम्पन्न हुआ।