फेलिक्स अस्पताल में एडवांस्ड एंडोस्कोपी से 81 वर्षीय मरीज को मिली नई जिंदगी

फेलिक्स अस्पताल में एडवांस्ड एंडोस्कोपी से 81 वर्षीय मरीज को मिली नई जिंदगी

बड़ी आंत का ट्यूमर लिवर तक फैलने की स्थिति में, बिना चीरे की तकनीक से किया गया जटिल उपचार

नोएडा। गंभीर हालत में इलाज के लिए फेलिक्स हॉस्पिटल में पहुंचे 81 वर्षीय बुजुर्ग मरीज को आधुनिक चिकित्सा तकनीक ने नई जिंदगी दे दी। बड़ी आंत (कोलन) में ट्यूमर से जूझ रहे इस मरीज की स्थिति इतनी नाजुक थी कि वह न ठीक से खाना खा पा रहा था और न ही पानी पी पा रहा था। लगातार उल्टी, पेट दर्द और सूजन के कारण परिजन चिंतित थे। समय रहते मरीज को फेलिक्स अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां डॉक्टरों की टीम ने जटिल एंडोस्कोपी प्रक्रिया के जरिए सफल उपचार कर उसकी जान बचाई।

डॉक्टर ताबिश, कंसलटेंट गैस्ट्रोएंटरोलॉजी और उनकी टीम  के अनुसार जांच में सामने आया कि मरीज की बड़ी आंत में मौजूद ट्यूमर तेजी से बढ़ रहा था और लिवर तक फैलने की स्थिति में पहुंच चुका था। ट्यूमर के कारण आंत में ब्लॉकेज हो गया था, जिससे भोजन और तरल पदार्थ का सामान्य प्रवाह रुक गया था। यही वजह थी कि मरीज को उल्टी, पेट फूलना और तेज दर्द जैसी समस्याएं हो रही थीं। अस्पताल में भर्ती होने के बाद सबसे पहले मरीज की विस्तृत जांच की गई। कोलोनोस्कोपी और अन्य जरूरी परीक्षणों के जरिए डॉक्टरों ने बीमारी की गंभीरता का आकलन किया। रिपोर्ट में स्पष्ट हुआ कि मरीज की उम्र और हालत को देखते हुए पारंपरिक सर्जरी करना बेहद जोखिम भरा हो सकता है। ऐसे मामलों में आमतौर पर बड़ी आंत को बाहर निकालकर ऑपरेशन किया जाता है, जिसमें जटिलताएं और खतरे ज्यादा होते हैं।

इसी को देखते हुए डॉक्टर ताबिश और उनकी टीम ने एडवांस्ड एंडोस्कोपी तकनीक अपनाने का निर्णय लिया। यह एक आधुनिक और कम जोखिम वाली प्रक्रिया है, जिसमें बिना बड़े चीरे के शरीर के अंदर कैमरा और विशेष उपकरणों की मदद से इलाज किया जाता है। इस तकनीक के तहत मरीज की आंत में एडवांस्ड स्टेंट डाला गया, जिससे ब्लॉकेज को बायपास कर दिया गया और भोजन का रास्ता फिर से सुचारु हो गया। यह प्रक्रिया बेहद जटिल थी, क्योंकि मरीज की उम्र अधिक थी और ट्यूमर काफी फैल चुका था। बावजूद विशेषज्ञों की टीम ने सावधानीपूर्वक एंडोस्कोपी के जरिए सफलतापूर्वक स्टेंट डाला। इस प्रक्रिया में न तो बड़ा ऑपरेशन करना पड़ा और न ही किसी प्रकार का बड़ा चीरा लगाया गया। खास बात यह रही कि इसमें ब्लड लॉस भी नहीं हुआ और संक्रमण का खतरा भी काफी कम रहा।

एडवांस्ड एंडोस्कोपी और इंसीजन-लेस सर्जरी जैसी तकनीकें उन मरीजों के लिए वरदान साबित हो रही हैं, जिनके लिए पारंपरिक सर्जरी जोखिम भरी होती है। इस तकनीक से मरीज को कम दर्द होता है और रिकवरी भी तेजी से होती है। यही कारण है कि गंभीर और जटिल मामलों में अब इस तरह की प्रक्रियाओं का उपयोग बढ़ रहा है। इस तरह की तकनीकों का इस्तेमाल केवल कोलन ट्यूमर ही नहीं, बल्कि अचलासिया कार्डिया, पित्त की थैली में पथरी, पैनक्रियाज की सिस्ट जैसी बीमारियों के इलाज में भी किया जा रहा है। फेलिक्स हॉस्पिटल सभी तरह की सर्जरी होती है।

आधुनिक उपकरणों और विशेषज्ञता के चलते अब बिना बड़े ऑपरेशन के भी कई जटिल बीमारियों का सफल इलाज संभव हो रहा है। मरीज की हालत में अब सुधार है। इस तरह की सर्जरी सामान्य नहीं होती है। यह सर्जरी मल्टी स्पेशलिटी अस्पतालों में ही उपलब्ध है। फेलिक्स हॉस्पिटल में मरीज को बेहतर सुविधा देने के साथ वरिष्ठ डॉक्टरों की टीम के द्वारा इस तरह की सर्जरी होती है।

पेट दर्द की समस्या को नहीं करें नजरअंदाज:
फेलिक्स हॉस्पिटल के डॉक्टर ने बताया कि पेट से जुड़ी समस्याओं को हल्के में न लें। यदि लगातार पेट दर्द, वजन कम होना, भूख में कमी, उल्टी या मल त्याग में बदलाव जैसे लक्षण दिखाई दें तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें। समय पर जांच और सही इलाज से कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों पर भी काबू पाया जा सकता है। जागरूकता और समय पर इलाज ही इस तरह की बीमारियों से बचाव का सबसे प्रभावी तरीका है। आधुनिक चिकित्सा तकनीकों के चलते अब गंभीर से गंभीर मरीजों को भी नया जीवन मिलना संभव हो गया है।